आज देश भर के लोगों को एक बार फिर निर्भया कांड की याद आई है. लोग फिर सड़कों पर कैंडल मार्च निकाल रहे हैं. विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. मासूम के प्रति अपनी संवेदना दिखा रहे है. कठुआ में 8 साल की मासूम गुड़िया के साथ जो हुआ, उससे उसके परिवार में दुख और मातम छाया हुआ है. हर कोई गुड़िया और उसके परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कर रहा है. इसी संवेदनशील मुद्दे पर आज हर राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी रोटियां सेंकने में लगा है. फिर चाहे कांग्रेस हो या फिर आप. हर कोई सड़कों पर उतरकर उन्नाव और कठुआ रेप कांड पर सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहा हैं.
भी इसका विरोध कर रही है. आप नेता सड़कों पर उतरकर विरोध किए और केंद्र सरकार को चेतावनी देकर घर चले गए. लेकिन दिल्ली सरकार का ये विरोध संवेदनशील मुद्दे को लेकर था. मीडिया के सामने उन्होंने केंद्र को जमकर कोसा, आरोप लगाए, महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए. लेकिन इस विरोध प्रदर्शन के पीछे एक और तस्वीर भी है जो आपको ये सोचने पर मजबूर कर देगी कि ये विरोध क्या सिर्फ मीडिया के लिए था या फिर विरोध प्रदर्शन करने आये ये सब कार्यकर्ता वाकई मासूम के साथ हुई घटना के प्रति सवेंदना रखते थे.
दरअसल आम आदमी पार्टी ने को लेकर जो विरोध किया था, उस विरोध प्रदर्शन से पहले आम आदमी पार्टी के कुछ नेता और कार्यकर्ता हंसते और मजाक करते तस्वीरों में कैद हुए. आम आदमी पार्टी के ये नेता आये तो विरोध करने थे, लेकिन विरोध से पहले सब लोगों के साथ ठड़ाके मारते हुए नजर आए. इस दौरान कुछ महिलाओं से बात की गई.
उन्होंने महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए और कुछ देर बाद वे सेल्फी लेती नजर आईं. मीडिया का कैमरा सामने आया तो सभी नारे लगाने लगे. ऐसे में सवाल उठता है कि ये सभी महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के प्रति वाकई में कितने संवेदनशील हैं?
सुशांत मेहरा / राहुल विश्वकर्मा