120 घंटे तक तबला बजाकर पंजाब के इस युवक ने बना दिया रिकॉर्ड

पंजाब में एक युवक ने लगातार 120 घंटे तक तबला बजाकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है. युवक ने 9 साल की उम्र से ही तबला वादन शुरू कर दिया था. अब उसका लक्ष्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना है.

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युवक ने तबला बजाने का बनाया रिकॉर्ड युवक ने तबला बजाने का बनाया रिकॉर्ड

aajtak.in

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  • 24 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 12:03 AM IST

पंजाब के बटाला में एक युवक ने 120 घंटे तक तबला बजाकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है. बटाला के गुरु नानक कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रहे अमृतप्रीत सिंह ने बताया कि उन्होंने 31 दिसंबर 2022 को 11 बजे से लेकर 5 जनवरी 2023 की सुबह 11 बजे तक लगातार तबला बजाया. 

5 दिनों तक दिन रात तबला बजाकर उन्होंने यह कीर्तिमान मनाया है जिसके बाद उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है. अमृतप्रीत सिंह ने बताया कि अब वो अपना नाम "लिम्का बुक" और " गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड" में दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं. 

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अमृतपीत सिंह ने बताया कि वो बचपन से ही जब कोई संगीत सुनते थे तो उसमें केवल तबला सुनते थे और उन्होंने घर में थाली बजाना शुरू कर दिया . उसके बाद 9 साल की उम्र में उन्होंने तबला सीखना शुरू किया और रोजाना 6 से 7 घंटे रियाज करना शुरू किया जो अब तक चल रहा है. 

धर्म का प्रचार करने वाले विभिन्न संगठनों के साथ वो सेवा करने लगे थे, इसके अलावा 17 साल की उम्र से ही उन्होंने अमृतसर में गुरुद्वारा शहीदा साहिब और श्री हरिमंदर साहिब जी में भी कार्यक्रमों में शिरकत की थी.

उन्होंने कहा कि रागी भाई गुरदेव सिंह, भाई गुरप्रीत सिंह के साथ सेवा कर रहे हैं. अमृतप्रीत सिंह ने कहा कि इस मुकाम को हासिल करने में उनके परिवार का पूरा सहयोग मिला है.

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उन्होंने कहा कि युवाओं को अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और गुरुओं के आशीर्वाद से मेहनत करनी चाहिए, फिर मंजिल पाने में कोई भी बाधा नहीं आ सकती है.

अमृत ​​सिंह प्रसिद्ध धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता गुरदर्शन सिंह के पुत्र हैं. उनके पिता गुरदर्शन सिंह ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनके बेटे ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है. उन्होंने सिख संगठनों और कमेटियों सहित सिख संगठनों से अपील की है कि माता-पिता अपने बच्चों के हुनर ​​को पहचाने और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करें ताकि बच्चे ​देश-विदेश में परिवार, शहर और देश का नाम रोशन कर सकें. (इनपुट - विशंभर बिट्टू)

 

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