पंजाब के चंडीगढ़ की सड़कों पर रोज झाड़ू लगाते बुजुर्ग अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू की कहानी में युवाओं के लिए प्रेरणा छिपी है. 88 साल की उम्र में भी वह अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा शहर की सफाई में समर्पित कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर उनके सफाई करते हुए वीडियो और तस्वीरें जब वायरल हुईं, तो बहुत कम लोगों को पता था कि उनका यह निस्वार्थ कोशिश उन्हें भारत के गौरवपूर्ण पद्मश्री सम्मान तक लेकर जाएगा.
इंदरजीत सिंह सिद्धू पंजाब कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं, जिन्होंने 1996 में DIG के पद से रिटायर होने के बाद भी सेवा भाव नहीं छोड़ा. वे चंडीगढ़ के सेक्टर-49 स्थित IAS-IPS सोसायटी में अकेले रहते हैं. हालांकि उनकी पत्नी दविंदर पाल कौर का 2023 में निधन हो चुका है, उनका बेटा अमेरिका में और बेटी मोहाली में रहती है. अकेले रहते हुए भी सिद्धू जी रोजाना आधार पर सोसायटी और आसपास के क्षेत्र की सफाई करते हैं.
सिद्धू की सेवा यात्रा 1963 में पंजाब सर्विस कमीशन से इंस्पेक्टर के रूप में शुरू हुई और 1981 में वे IPS अधिकारी बने. आतंकवाद के दौरान अमृतसर के सिटी SP और बाद में चंडीगढ़ में DIG CID के रूप में कानून-व्यवस्था संभालने वाले सिद्धू ने रिटायरमेंट के बाद सफाई को अपना नया मिशन बना लिया. उनका मानना है कि एक स्वच्छ शहर से ही स्वच्छ सोच जन्म लेती है.
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हालांकि 15 अगस्त को उन्हें राज्यपाल सम्मान दिया जाना था, लेकिन वे ज्यादा चर्चा और भीड़ से बचते हुए उस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए. इस बार उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा जा रहा है, जो समाज के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है।. पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकील गौरव गोयल ने भी इस सम्मान को समाज के लिए प्रेरक बताया है.
इंदरजीत सिंह सिद्धू आज भी मीडिया से दूरी बनाए रखते हैं और बिना किसी दिखावे के सादगी से अपने काम में लगे हुए हैं. उनकी कहानी हमें न केवल स्वच्छता के महत्व का एहसास कराती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि उम्र केवल एक संख्या है, असली ताकत तो हौसले की होती है.
अमन भारद्वाज