भगवंत मान सरकार की इस योजना से सड़क हादसों में आई भारी कमी, हाईवे क्राइम पर भी लगाम

पंजाब में AAP सरकार की 'सड़क सुरक्षा फोर्स' कैंपेन की वजह से दो साल में हाईवे हादसों और ऑन-द-स्पॉट मौतों में बड़ी कमी आई है. 6 मिनट के रिस्पॉन्स टाइम वाली SSF अब तक सैकड़ों लोगों की जान बचा चुकी है.

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6 मिनट के अंदर मदद पहुंचाती है भगवंत मान सरकार की 'सड़क सुरक्षा फोर्स' (File Photo: ITG) 6 मिनट के अंदर मदद पहुंचाती है भगवंत मान सरकार की 'सड़क सुरक्षा फोर्स' (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • चंडीगढ़,
  • 03 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:16 AM IST

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा शुरू की गई सड़क सुरक्षा फोर्स (SSF) ने आज अपने संचालन के 2 वर्ष पूरे कर लिए हैं. मुख्यमंत्री भगवंत मान की इस पहल के चलते साल 2024 में हाईवे पर होने वाली ऑन-द-स्पॉट मौतों की संख्या घटकर 1,016 रह गई है, जो साल 2023 में 1,955 थी. एसएसएफ ने वक्त पर हादसे वाली जगह पर पहुंचकर अब तक 940 लोगों की जान बचाई है. 

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मौजूदा वक्त में करीब 1500 कर्मचारियों वाली यह फोर्स हर 30 किलोमीटर पर तैनात रहती है और औसतन 6 से 6.5 मिनट में मदद के लिए पहुंच जाती है. आधुनिक उपकरणों जैसे कटर और फर्स्ट एड किट से लैस ये गाड़ियां एआई (AI) और बैकएंड सपोर्ट की मदद से काम कर रही हैं. 

आंकड़ों के मुताबिक, कुल सड़क हादसे 4,700 से घटकर 2,338 पर आ गए हैं. इस फोर्स की मौजूदगी से न सिर्फ हादसों में कमी आई है, बल्कि हाईवे पर होने वाली लूट और चोरी की घटनाओं पर भी लगाम लगी है.

6 मिनट में मदद...

सड़क सुरक्षा फोर्स की सबसे बड़ी खूबी इसका रिस्पॉन्स टाइम है. एक्सीडेंट की जानकारी मिलते ही महज 6 मिनट के अंदर टीम मौके पर पहुंच जाती है. साल 2023 के मुकाबले 2024 में सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की तादाद में करीब 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. एसएसएफ ने अब तक 940 ऐसे लोगों को जीवनदान दिया है, जो वक्त पर इलाज न मिलने की वजह से दम तोड़ सकते थे. यह फोर्स उन परिवारों के लिए एक वरदान साबित हुआ है, जिन्होंने अपनों को सुरक्षित घर लौटते देखा है.

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AI तकनीक और अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल...

यह सिर्फ एक पुलिस पेट्रोलिंग टीम नहीं है, बल्कि एक तकनीकी रूप से एडवांस फोर्स है. इसमें तैनात 1,500 कर्मचारी एआई तकनीक और मजबूत बैकएंड सपोर्ट के साथ काम करते हैं. एसएसएफ की गाड़ियों में एक्सीडेंट के दौरान फंसे लोगों को निकालने के लिए कटर, प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड बॉक्स और अन्य रेस्क्यू टूल्स मौजूद रहते हैं. हाईवे पर हर 30 किलोमीटर पर इनकी मौजूदगी ने यात्रियों के मन में सुरक्षा का भाव पैदा किया है.

सड़क सुरक्षा फोर्स ने केवल जान ही नहीं बचाई, बल्कि अपराध पर भी चोट की है. हाईवे पर गश्त बढ़ने से लूटपाट और चोरी की वारदातों में भारी कमी आई है. लोग अब देर रात भी हाईवे पर सफर करते समय एसएसएफ की गाड़ियों को देखकर खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं. आम आदमी पार्टी सरकार का दावा है कि यह फोर्स इस सोच का नतीजा है कि सरकार लोगों की जान की कीमत समझती है, जिसकी जरूरत सूबे को लंबे वक्त से थी.

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