आदमपुर एयरपोर्ट से डेरा तक, जानिए पीएम मोदी की पंजाब यात्रा के पीछे का सियासी 'गणित'

प्रधानमंत्री मोदी ने जालंधर में गुरु रविदास जयंती पर डेरा सचखंड बल्लां का दौरा किया और आदमपुर एयरपोर्ट का नाम गुरु रविदास जी के नाम पर रखा. पंजाब की 32% दलित आबादी वाले इस क्षेत्र में पीएम की सक्रियता को 2027 के चुनावों से पहले एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है.

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PM मोदी ने गुरु रविदास जयंती पर डेरा सचखंड बल्लां में टेका मत्था (Photo-PTI) PM मोदी ने गुरु रविदास जयंती पर डेरा सचखंड बल्लां में टेका मत्था (Photo-PTI)

अमन भारद्वाज

  • चंडीगढ़,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:48 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत रविदास की 649वीं जयंती के अवसर पर पंजाब के जालंधर जिले का दौरा किया. यह यात्रा न सिर्फ धार्मिक और सामाजिक महत्व रखती है, बल्कि 2027 पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले इसे एक अहम राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है. 

प्रधानमंत्री का यह दौरा रविदासिया और आद-धर्मी समुदाय से संवाद और जुड़ाव की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. प्रधानमंत्री दोपहर करीब 3:45 बजे जालंधर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने आदमपुर एयरपोर्ट का नाम ‘श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट’ रखने की औपचारिक घोषणा की. 

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इसके साथ ही आदमपुर से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हलवारा (लुधियाना) एयरपोर्ट के सिविल टर्मिनल का उद्घाटन किया, जिससे पंजाब के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र को नई उड़ान मिलने की उम्मीद है.

कई मायनों में खास रहा पीएम का दौरा

इसके बाद प्रधानमंत्री करीब 4:30 बजे डेरा सचखंड बल्लां पहुंचे, जहां उन्होंने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया. लगभग एक घंटे के कार्यक्रम के बाद वे 5:25 बजे आदमपुर एयरबेस लौटे. पूरे दौरे के दौरान कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे.

यह यात्रा राजनीतिक रूप से इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में केंद्र सरकार ने डेरा प्रमुख संत निरंजन दास को पद्मश्री से सम्मानित किया है. इसे रविदासिया समुदाय के साथ रिश्तों को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

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दलित वोट बैंक

 डेरा सचखंड बल्लां जालंधर से करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित है और दोआबा क्षेत्र में दलित आबादी पर इसका खासा प्रभाव माना जाता है. पंजाब की कुल आबादी में दलितों की हिस्सेदारी लगभग 32 प्रतिशत है, जो देश में सबसे अधिक है. दोआबा क्षेत्र से विधानसभा की 23 सीटें आती हैं और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार डेरा का प्रभाव करीब 19 सीटों तक माना जाता है.

ऐतिहासिक रूप से, आदि-धर्मी/रविदासिया समुदाय को कांग्रेस का एक मजबूत समर्थन आधार माना जाता था. कांशीराम के उदय के साथ यह समीकरण बदल गया, जिसके बाद BSP एक पसंदीदा विकल्प के रूप में उभरी जब भी वह चुनावी रूप से प्रतिस्पर्धी दिखी. बाद में शिरोमणि अकाली दल ने भी चुनिंदा पैठ बनाई, खासकर प्रकाश सिंह बादल के कार्यकाल के दौरान, जिन्होंने प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व और कल्याणकारी पहलों के माध्यम से रामदासिया सिखों के बीच पैठ बढ़ाई.

2019 के लोकसभा चुनावों में, BSP जालंधर में दलित वोटों को एकजुट करने में कामयाब रही. हालांकि, 2024 में, संविधान और राजनीतिक स्थिरता के इर्द-गिर्द की प्रमुख कहानियों ने दलित वोटर्स के एक बड़े हिस्से को कांग्रेस की तरफ धकेल दिया, जिससे BSP के वोट शेयर में तेज़ी से गिरावट आई.

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प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के विकास, उद्योग, “मेक इन पंजाब”, राजस्व और निर्यात में राज्य की भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने डेरा से अपने पुराने जुड़ाव और मानवता के लिए उसके वैश्विक योगदान का भी उल्लेख किया. विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा पंजाब की दलित राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा करता है.
 

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