61 साल की महिला ने पास की 10वीं, मिले 77 प्रतिशत अंक; दो पोतों की दादी हैं नरेंद्र कौर

पंजाब के जालंधर की 61 वर्षीय नरेंद्र कौर ने दसवीं कक्षा की परीक्षा पास कर मिसाल कायम की है. दो पोतों की दादी ने शहीद भाई तारा सिंह खालसा ओपन स्कूल से 650 में से 500 अंक हासिल किए. उन्होंने बताया कि शादी के समय पढ़ाई रुक गई थी, लेकिन सीखने की इच्छा बनी रही. परिवार के सहयोग से उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की. उनके बेटे अमेरिका और कनाडा में रहते हैं. अब वे 12वीं और आगे स्नातक करना चाहती हैं.

Advertisement
नरेंद्र कौर के दो पोते हैं. Photo ITG नरेंद्र कौर के दो पोते हैं. Photo ITG

aajtak.in

  • जालंधर,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:05 PM IST

पंजाब के जालंधर जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां 61 वर्ष की उम्र में दो पोतों की दादी ने दसवीं कक्षा की परीक्षा पास कर पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल कायम की है. यह उपलब्धि शहीद भाई तारा सिंह खालसा वरिष्ठ माध्यमिक (ओपन) विद्यालय की छात्रा नरेंद्र कौर ने हासिल की है. उन्होंने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित परिणामों में 650 में से 500 अंक प्राप्त करते हुए लगभग 77 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं.

Advertisement

जालंधर के नकोदर क्षेत्र के गांव सरहाली की रहने वाली नरेंद्र कौर का जीवन अब तक पारिवारिक जिम्मेदारियों और घरेलू कार्यों में ही बीता था. लेकिन शिक्षा के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि जिस समय उनकी शादी हुई थी, उस दौर में लड़कियों की पढ़ाई को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था. परिस्थितियों के कारण वे अपनी पढ़ाई को आगे नहीं बढ़ा पाईं, लेकिन मन में शिक्षा पाने की इच्छा हमेशा बनी रही.

अमेरिका और कनाडा में रहते हैं बेटे
नरेंद्र कौर के अनुसार, समय के साथ जब परिवार की जिम्मेदारियां थोड़ी कम हुईं, तो उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू करने का फैसला किया. परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. उनके दो बेटे हैं, जिनमें से एक अमेरिका और दूसरा कनाडा में अपने परिवार के साथ रहते हैं. बावजूद इसके, उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा और निरंतर मेहनत करती रहीं.

Advertisement

जीवन का सबसे यादगार पल बताया
परीक्षा परिणाम आने के बाद नरेंद्र कौर का कहना है कि यह उनके जीवन का सबसे यादगार पल है. 61 वर्ष की उम्र में इस उपलब्धि ने उन्हें न केवल आत्मविश्वास दिया है, बल्कि समाज के लिए भी यह संदेश दिया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती.

अब नरेंद्र कौर की इच्छा है कि वे आगे भी पढ़ाई जारी रखें. उन्होंने बताया कि वे बारहवीं कक्षा पास करने के बाद स्नातक की पढ़ाई भी करना चाहती हैं. उनकी यह सफलता उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो उम्र या परिस्थितियों को अपने सपनों के बीच बाधा मान लेते हैं.

---- समाप्त ----
रिपोर्ट- दविंदर कुमार

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement