'मुझे भी मिला ऑफर लेकिन...', AAP सांसद सीचेवाल का दावा, बताया 7 सांसदों ने कैसे लिखी बगावत की पटकथा

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने दावा किया कि विक्रमजीत सिंह साहनी ने उन्हें 'आजाद समूह' में शामिल होने का प्रस्ताव दिया, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया. सीचेवाल ने भाजपा में शामिल हुए सात सांसदों पर पार्टी से 'बेवफाई' का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इन नेताओं को पंजाब के मुद्दे उठाने के लिए राज्यसभा भेजा गया था, लेकिन उन्होंने जिम्मेदारी नहीं निभाई. सीचेवाल ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें राज्यसभा में विधेयकों पर बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया.

Advertisement
बलबीर सिंह सीचेवाल ने दावा किया कि उन्हें 'आजाद समूह' से ऑफर मिला था. (Photo: ITG) बलबीर सिंह सीचेवाल ने दावा किया कि उन्हें 'आजाद समूह' से ऑफर मिला था. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:23 PM IST

आम आदमी पार्टी के भीतर मचे सियासी भूचाल के बीच पार्टी के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उन्हें 'आजाद समूह' में शामिल होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर इनकार कर दिया. सीचेवाल ने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सांसदों ने आम आदमी पार्टी के साथ 'बेवफाई' की है.

Advertisement

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, सीचेवाल ने बताया कि शुक्रवार सुबह उन्हें राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी का फोन आया था. साहनी ने उनसे कहा कि पंजाब के मुद्दों को उठाने के लिए एक नया  'आजाद समूह' बनाया जा रहा है, जिसमें 6-7 राज्यसभा सदस्य पहले ही हस्ताक्षर कर चुके हैं. हालांकि सीचेवाल ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी ऐसी किसी समूह में शामिल होने की कोई मंशा नहीं है.

क्या बोले बलबीर सिंह सीचेवाल?
उन्होंने कहा कि बाद में उन्हें मीडिया के जरिए पता चला कि सात सांसदों ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में विलय कर लिया है. इस घटनाक्रम ने पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है. सीचेवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने इन नेताओं को राज्यसभा में इसलिए भेजा था ताकि वे संसद में पंजाब के मुद्दों को मजबूती से उठा सकें. लेकिन पार्टी छोड़कर उन्होंने अपने दायित्व से मुंह मोड़ लिया. 

Advertisement

सीचेवाल के मुताबिक यह सिर्फ राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि पार्टी के विश्वास के साथ धोखा है.
उन्होंने खास तौर पर राघव चड्ढा और संदीप पाठक के फैसले पर आश्चर्य जताया. सीचेवाल ने कहा कि इन दोनों नेताओं ने पंजाब में सभी शक्तियों का लाभ उठाया, लेकिन आखिर में पार्टी का साथ छोड़ दिया. 

'राज्यसभा में बोलने का अवसर नहीं मिला'
उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें कभी भी राज्यसभा में किसी विधेयक पर बोलने का अवसर नहीं दिया गया, क्योंकि राघव चड्ढा और संदीप पाठक ही अधिकतर चर्चा में हिस्सा लेते थे. सीचेवाल ने कहा कि वे केवल शून्यकाल या विशेष उल्लेख के जरिए ही अपने मुद्दे उठा पाते थे. 

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे और भाजपा में शामिल होने से पार्टी को बड़ा झटका लगा है. इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement