केरलम विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को आए थे और 14 मई को कांग्रेस ने आखिरकार यह तय कर लिया कि इस तटीय राज्य में सत्ता की कमान किसे सौंपी जाएगी. केरल का पावर सेंटर कौन होगा, यह तय हो गया है लेकिन कर्नाटक का सत्ता संघर्ष नहीं सुलझ सका है. केरलम की गुत्थी सुलझने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर से जोर पकड़ता दिख रहा है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री की बहस फिर से तेज हो गई है. कर्नाटक में डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को अगला सीएम बताते हुए पोस्टर लगाए गए हैं.
सूबे के कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि केरलम के बाद पार्टी हाईकमान अब कर्नाटक सीएम को लेकर जरूर चर्चा करेगा. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया मंत्रिमंडल में फेरबदल पर जोर दे रहे हैं. सीएम के कैबिनेट में बदलाव में 15 नए मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल करने की बात है. सिद्धारमैया को लगता है कि नए मंत्रियों के मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद सरकार में उनका समर्थन बढ़ सकता है और वह मुख्यमंत्री पद पर बने भी रह सकते हैं. इसी उम्मीद में सीएम सिद्धारमैया कैबिनेट में बदलाव की बात पर जोर दे रहे हैं.
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वहीं, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार की अगुवाई वाला धड़ा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पद से हटाने के पक्ष में हैं. शिवकुमार गुट सीएम बदलने को लेकर दबाव बना रहा है. कर्नाटक में सिद्धारमैया और शिवकुमार गुट के साथ ही विधायकों की एक लॉबी ऐसी भी है, जिसका फोकस केवल और केवल मंत्री पद पाने पर है. वरिष्ठ विधायक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि मुख्यमंत्री कोई भी बने, मंत्रिमंडल में उनको जगह मिलनी चाहिए. कर्नाटक में कांग्रेस विधायकों के तीनों ही धड़े एक्टिव हैं और अपने-अपने तरीके से नेतृत्व पर दबाव बनाने में जुटे हैं.
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कांग्रेस सूत्रों की मानें तो कांग्रेस हाईकमान अब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, दोनों ही नेताओं से बातचीत कर सकता है. गौरतलब है कि कर्नाटक में ढाई-ढाई साल का सीएम फॉर्मूला चर्चा में रहा है. बेंगलुरु से दिल्ली तक बैठकों का दौर चला, डीके शिवकुमार से सीएम सिद्धारमैया तक ने दिल्ली दरबार में दौड़ लगाई, लेकिन सत्ता परिवर्तन पर फैसला नहीं हो सका.
नागार्जुन