तेलंगाना: के कविता ने BRS छोड़ी, केसीआर की बेटी का अगला कदम क्या होगा?

तेलंगाना के पूर्व सीएम के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता ने बीआरएस छोड़ने का ऐलान कर दिया है. के कविता का पार्टी छोड़ना बीआरएस के लिए कितना नुकसानदेह साबित हो सकता है?

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वाईएस शर्मिला की राह चलीं के कविता (Photo: ITG) वाईएस शर्मिला की राह चलीं के कविता (Photo: ITG)

aajtak.in

  • हैदराबाद,
  • 04 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 12:48 AM IST

के कविता ने अपने पिता और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) को राक्षसों से घिरा भगवान बताया था. के कविता के इस बयान को मूश्किल से तीन महीने ही बीते थे, कि भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का हवाला देकर उनकी प्राथमिक सदस्यता निलंबित करन का ऐलान कर दिया.

आहत कविता ने अपने ही पिता की पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया और विधान परिषद की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया. तेलंगाना के पूर्व सीएम केसीआर की बेटी के कविता की ये कहानी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी की बहन वाईएस शर्मिला जैसी है. वाईएस शर्मिला ने संपत्ति विवाद के बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अपने भाई वाईएस जगनमोहन रेड्डी के खिलाफ बगावत कर दी थी.

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वाईएस शर्मिला ने तेलंगाना में वाईएसआरटीपी नाम से अपनी पार्टी भी बनाई. हालांकि, उन्होंने बाद में वाईएसआरटीपी का कांग्रेस में विलय कर दिया था और आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष बनाई गईं. के कविता ने भविष्य के कदम को लेकर अभी कोई ऐलान नहीं किया है. हालांकि, उनके बयानों से साफ है कि निशाने पर बीआरएस के कुछ नेता हैं.

रेवंत रेड्डी की अगुवाई वाली तेलंगाना सरकार ने केसीआर सरकार के कार्यकाल के दौरान कालेश्वरम परियोजना में कथित अनियमितता की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की घोषणा की थी. रेवंत रेड्डी सरकार के इस ऐलान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए के कविता ने एक सितंबर को दावा किया था कि केसीआर के कुछ करीबियों ने उनके नाम का इस्तेमाल कर लाभ उठाया है.

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के कविता ने आगे कहा था कि ऐसे लोगों के कुकर्मों के कारण उन्हें (केसीआर को) बदनाम किया जा रहा है. उन्होंने कालेश्वरम सिंचाई परियोजना में भ्रष्टाचार और इसमें केसीआर का नाम आने के लिए अपने चचेरे भाई हरीश राव और संतोष कुमार को जिम्मेदार बताया. वाईएस शर्मिला की बात करें तो 2024 के आम चुनाव और आंध्र प्रदेश चुनाव में तत्कालीन सीएम जगन को लेकर उनके बयानों ने विपक्ष के लिए हथियार की तरह काम किया और वाईएसआर कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था.

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वाईएस शर्मिला की अगुवाई में कांग्रेस कोई सीट नहीं जीत पाई, लेकिन आंध्र प्रदेश में जगनमोहन की इमेज जरूर डेंट हुई और टीडीपी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने सरकार बना ली. वाईएस शर्मिला के उलट के कविता ने अपने भाई और बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव पर तीखे हमले बोलने से परहेज किया, लेकिन, यह जरूर कहा कि जब पार्टी के कुछ समर्थकों ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कैंपेन चलाया, तब केटीआर ने उचित प्रतिक्रिया नहीं दी.

क्या कहते हैं जानकार

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक तेलकापल्ली रवि ने कहा कि के कविता का पार्टी छोड़ना बीआरएस के लिए निश्चित रूप से निगेटिव फैक्टर होगा. हालांकि, वह बहुत प्रभावी नहीं साबित होंगी. कई क्षेत्रीय दलों में महिलाओं को या तो आगे बढ़ाया जाता है, या सियासी हालात को देख पीछे कर लिया जाता है. कविता ने दिल्ली शराब घोटाले में अपनी गिरफ्तारी के लिए बीजेपी को जिम्मेदार बताते हुए मोर्चा खोल रखा था, अब उस दल पर वह चुप हैं.

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तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष क्या बोले

तेलंगाना कांग्रेस के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने इस मसले पर कहा कि यह पूरी तरह से केसीआर के परिवार की कलह से जुड़ा विषय है. इससे कांग्रेस का कोई लेना-देना नहीं है. तेलंगाना कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि के कविता अगर कांग्रेस में शामिल होने के लिए संपर्क करेंगी भी, तो ऐसा नहीं होगा. कांग्रेस केसीआर और उनके परिवार सेदूर ही दिखना चाहती है.

(सोर्सः PTI)

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