कांग्रेस का मिशन ‘टैलेंट हंट’, बिहार से लेकर गुजरात तक नए जोश को जोड़ने की तैयारी!

कांग्रेस पार्टी एक बार फिर अपने साथ युवाओं को जोड़ने की कोशिश में जुट गई है. छात्र नेता रहे कन्हैया कुमार और गुजरात में आंदोलन कर पहचान बनाने वाले जिग्नेश मेवाणी के पार्टी के साथ में आने की अटकलें चल रही हैं.

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युवा चेहरों को साथ लाने में जुटी कांग्रेस? युवा चेहरों को साथ लाने में जुटी कांग्रेस?

मौसमी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 3:19 PM IST
  • युवाओं को पार्टी से जोड़ने में जुटी कांग्रेस
  • कन्हैया कुमार, जिग्नेश मेवाणी की एंट्री संभव
  • हाल ही में कई नेताओं ने छोड़ी है पार्टी

ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद और सुष्मिता देव जैसे बड़े नामों का साथ छूटने के बाद कांग्रेस पार्टी अब नए टैलेंट की तलाश में जुट गई है. युवा जोश को अपने साथ लाकर पार्टी की कोशिश कैडर में जान फूंकने की है. इस टैलेंट हंट में ताज़ा नाम जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्र नेता रहे कन्हैया कुमार का जुड़ सकता है.

एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आजतक को बताया कि लेफ्ट नेता कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) ने हाल ही में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से मुलाकात की थी. सिर्फ इतना ही नहीं गुजरात के जिग्नेश मेवाणी भी कांग्रेस के संपर्क में हैं और राहुल गांधी से मिल चुके हैं. ऐसे में बिहार से लेकर गुजरात कांग्रेस तक में हलचल मची हुई है. 

कन्हैया कुमार की राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से मुलाकात को बिल्कुल गोपनीय रखने की कोशिश की गई. इसका अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि बिहार के कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास को भी इसकी खबर नहीं लग पाई. 

कन्हैया पार लगाएंगे कांग्रेस की नाव?

कुछ लोगों का मानना है कि कन्हैया कुमार की पार्टी में एंट्री बिहार कांग्रेस में जान फूंक सकती है. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जिस तरह की हार मिली है, वह झकझोर देने वाली है. बिहार में कांग्रेस की गठबंधन साथी राजद और लेफ्ट पार्टियों ने उसके मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया था. 

बिहार की इस राजनीतिक हलचल पर नज़र रखने वाले एक नेता के मुताबिक, कन्हैया कुमार युवा नेता हैं जिनमें काफी क्षमता है. अगर किसी भी पार्टी के साथ जाते हैं, तो उसमें जोश लाएंगे और साथ ही सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर अच्छा रिजल्ट भी मिल सकता है. 

गौरतलब है कि कन्हैया कुमार के भाषण लगातार वायरल होते आए हैं, उनकी रैलियों में भारी भीड़ जुटती रही है और युवाओं में उनका बड़ा क्रेज़ है. 

हालांकि, ये सब इतना भी आसान नहीं है क्योंकि कन्हैया कुमार भी एक बार लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमा चुके हैं और उसमें फेल हो चुके हैं. भले ही कन्हैया कुमार भीड़ इकट्ठा कर पाए हों लेकिन उसे वोट में तब्दील नहीं कर सके. बिहार जातिगत राजनीति का केंद्र है और यहां तक कि कन्हैया कुमार को उनके समुदाय यानी भूमिहार के भी वोट नहीं मिल पाए थे. 

इसके अलावा कन्हैया कुमार का राजद के साथ सही कनेक्शन नहीं बैठता है. बीजेपी और जदयू के साथ कन्हैया कुमार के जाने के आसार नहीं दिखते हैं. ऐसे में कन्हैया कुमार के लिए भी बिहार में कांग्रेस की एक मात्र रास्ता दिखती है. 

कन्हैया कुमार की इस चर्चित मुलाकात को लेकर सीपीआई नेता डी. राजा ने भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि हम लोग कई नेताओं से मिलते रहते हैं, कन्हैया कुमार हमारी पार्टी के बड़े पद पर हैं, हाल ही में वह मीटिंग में भी शामिल हुए थे.  

गुजरात में बदलाव पर निगाहें

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के निधन के बाद गुजरात में लीडरशिप की दिक्कत है. अहमद पटेल के बाद राजीव सातव का भी निधन हुआ. ऐसे में गुजरात में भाजपा का मुकाबला करने में कांग्रेस को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. 

ऐसे में कांग्रेस को लगता है कि जिग्नेश मेवाणी (Jignesh Mevani) एक दलित चेहरा होते हुए पार्टी को कुछ मजबूती दे सकते हैं. ये भी गौर करने वाली बात है कि जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में कोई उम्मीदवार भी नहीं उतारा था. 

ऐसे में जिग्नेश मेवाणी अगर कांग्रेस में एंट्री करते हैं तो उनके लिए भी एक बेहतर मौका साबित होगा. अहमद पटेल भी इस मोर्चे पर बात को आगे बढ़ा चुके थे, लेकिन उनका अचानक निधन होने से काफी चीज़ें थमी की थमी रह गईं. 

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