बजट सत्र: सर्वदलीय बैठक में हंगामा, CPIM सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्र पर उठाए सवाल, बोले- सरकार छिपा रही है अपना एजेंडा

बजट सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं. सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने सरकार पर विधायी कार्यों को गुप्त रखने का आरोप लगाते हुए विदेशी नीति और आर्थिक मुद्दों पर विशेष चर्चा की मांग की है.

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CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल. (File Photo: PTI) CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल. (File Photo: PTI)

मौसमी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:09 PM IST

संसद के बजट सत्र 2026 से पहले मंगलवार को हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला. सीपीएम (CPI(M)) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिट्टास ने बैठक के दौरान सरकार की कार्ययोजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि बजट सत्र का एजेंडा स्पष्ट नहीं है और मुख्य संसदीय कार्यवाही अस्पष्ट बनी हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार "सस्पेंस और स्टंट" वाली राजनीति बंद करे और एजेंडा पहले से सर्कुलेट करे, जैसा कि वादा किया गया था.

बताया जा रहा है कि सर्वदलीय बैठक में विपक्ष की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगातार भारत की विदेश नीति का बार-बार किया जा रहा अपमान और वेनेजुएला, फिलिस्तीन एवं ग्रीनलैंड के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की मांग की गई. इस पर सरकार ने केवल राष्ट्रपति के धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान चर्चा का विकल्प दिया, जिसे विपक्ष ने खारिज करते हुए एक संरचित ढांचे वाली बहस की मांग की.

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विदेश नीति पर तकरार

सर्वदलीय बैठक के बाद जॉन ब्रिटास ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि विदेश नीति के मोर्चे पर भारत को जिस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, उस पर संसद में बात होनी चाहिए.

उन्होंने वेनेजुएला, फिलिस्तीन और ग्रीनलैंड की मौजूदा स्थितियों का जिक्र करते हुए सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने को कहा. विपक्ष ने ये भी आरोप लगाया कि सरकार की 'सस्पेंस' वाली राजनीति और महत्वपूर्ण कार्यों को अंतिम समय तक गुप्त रखने की आदत अब बंद होनी चाहिए.

मनरेगा पर घेरने की तैयारी

विपक्ष ने मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की मांग की है. ब्रिटास के अनुसार, मनरेगा के लिए राज्य सरकारों की फंडिंग बढ़ाने के केंद्र के फैसले से उत्पन्न मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा. हालांकि, सरकार ने एजेंडा साझा करने का वादा किया है, लेकिन विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वे सरकार के कामकाज के तरीके से असंतुष्ट हैं और सत्र के दौरान इन गंभीर विषयों पर जवाबदेही तय करेंगे.

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