बिहार की सियासत में बड़े बदलाव के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने नीतीश कुमार को लेकर तीखा बयान दिया है. अखिलेश ने कहा कि वे चाहते थे कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए राजनीति से संन्यास लें, लेकिन अब हालात ऐसे बन रहे हैं कि उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में रिटायर होना पड़ेगा. उन्होंने इसके लिए भारतीय जनता पार्टी पर धोखा देने का आरोप लगाया.
जयपुर में मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा, 'मैं तो चाहता था कि वो प्रधानमंत्री के रूप में रिटायर हों. हमारे INDIA गठबंधन के कई साथियों की भी यही इच्छा थी कि वे देश का नेतृत्व करते हुए राजनीति से विदा लें. लेकिन अब जो सुनने में आ रहा है, और देखा भी जा रहा है, उससे लगता है कि वे राज्यसभा सदस्य के तौर पर रिटायर होंगे. सोचिए, बीजेपी ने उनके साथ कितना बड़ा धोखा किया है.'
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय आया है जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले ली है. यह कदम उनके करीब दो दशक लंबे बिहार शासन के अंत की ओर इशारा करता है. बताया जा रहा है कि अब वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे, जिसके बाद एनडीए बिहार में नया नेता चुन सकती है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान केवल व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संदेश भी है. दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA ब्लॉक को तैयार करने में नीतीश कुमार की अहम भूमिका रही थी. इतना ही नहीं, उन्हें एक संभावित प्रधानमंत्री चेहरे के तौर पर भी देखा जा रहा था. हालांकि चुनाव से ऐन पहले ही नीतीश कुमार की जेडीयू ने एनडीए के साथ जाने का फैसला किया.
अब अखिलेश यादव ने अपने बयान के जरिए बीजेपी पर यह आरोप लगाने की कोशिश की है कि उसने रणनीतिक तरीके से नीतीश कुमार को मुख्यधारा की राजनीति से किनारे कर दिया. वहीं, नीतीश कुमार के राज्यसभा में आने के साथ ही बिहार की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है. एनडीए खेमे में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर मंथन जारी है और जल्द ही नई नेतृत्व व्यवस्था सामने आ सकती है.
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