बिहार में जातिगत जनगणना शुरू होने से उत्तर प्रदेश में भी सियासी तपिश गरमा गई है. इसे लेकर सपा यूपी में सड़क से सदन तक माहौल बनाने में जुट गई है. जातीय जनगणना पर सूबे के हर जिले में विधानसभा वार ब्लॉक स्तर पर पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से संगोष्ठी शुरू करने जा रही है, लेकिन उससे एक दिन पहले ही अखिलेश यादव ने सदन में इस मुद्दे को उठाकर अपने तेवर दिखा दिए हैं. सपा प्रमुख ने बीजेपी के सहयोगी संजय निषाद और अपना दल के आशीष पटेल जैसे नेताओं के साथ-साथ सुभासपा के ओम प्रकाश राजभर को उलझा दिया है.
अखिलेश ने सदन में बीजेपी को घेरा
नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को विधानसभा में जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाते हुए कहा, 'भाजपा सबका साथ, सबका विकास का नारा देती है, लेकिन जातीय जनगणना नहीं कराना चाहती है. बिना जातीय जनगणना के बीजेपी का यह नारा अधूरा है. जब बिहार में जनगणना हो सकती है तो यूपी में क्यों नहीं हो सकती है? यदि सपा की सरकार बनी तो तीन महीने में जातीय जनगणना कराएंगे.' उन्होंने योगी सरकार से भी जनगणना के साथ ही जातीय जनगणना कराने की भी मांग की.
राजभर-निषाद-पटेल को उलझाया
अखिलेश यादव ने जोर देते हुए कहा कि पूरा विपक्ष जातिगत जनगणना की मांग कर रहा है. उन्होंने इस मुद्दे पर अपने पक्ष में समर्थन दिखाने के लिए सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और योगी सरकार में सहयोगी निषाद पार्टी के संजय निषाद और अपना दल के आशीष पटेल की ओर इशारा करते हुए पूछा कि आप बताएं कि जातीय जनगणना चाहते हैं या नहीं. इस तरह से अखिलेश ने एक तरफ जातिगत जनगणना पर ओबीसी की सियासत करने वाली पार्टियों को कशमकश डाला तो दूसरी तरफ बसपा के एकलौते विधायक उमाशंकर सिंह को भी उलझा दिया.
बता दें कि सूबे में कभी सपा की सहयोगी पार्टी रही सुभासपा जातिगत जनगणना की मांग पहले ही कर चुकी है. सुभासपा के मुखिया ओपी राजभर कई मौकों पर जातिगत जनगणना की मांग उठा चुके हैं. इसी तरह से निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद और अपना दल (एस) के आशीष पटेल भी जातिगत जनगणना के पक्ष में आवाज बुलंद कर चुके हैं. ये दोनों ही नेता योगी सरकार में सहयोगी दल के तौर पर मंत्री हैं. राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि हम तो आपके साथ थे ही, लेकिन आपने तो मुझे भगा दिया. इस पर अखिलेश ने कहा कि आप मंत्री बनने के लिए छोड़कर गए हैं.
सपा के जातीय एजेंडे के धार दे रहे स्वामी
सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के सपा से अलग होने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य पार्टी के सबसे बड़े गैर-यादव ओबीसी चेहरा बनकर उभरे हैं. अभी हाल ही में रामचरितमानस पर स्वामी प्रसाद अपने बयान से लगातार सुर्खियों में हैं और जातिगत जनगणना को लेकर अपना पक्ष रख रहे हैं. ऐसे में जातीय जनगणना पर सपा शुक्रवार से संगोष्ठी अभियान शुरू कर रही है, जिसकी अगुवाई का जिम्मा स्वामी प्रसाद मौर्य को दिया गया है.
सपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी पर जातीय जनगणना को लेकर हीलाहवाली का आरोप लगा रहे. उन्होंने बुधवार को ट्वीट कर कहा, 'पिछड़ी जाति में पैदा होने के कारण मुझे नीच कहा गया के दर्द को खुलकर सार्वजनिक मंचों से साझा करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आखिर पिछड़ों को न्याय, अधिकार और समानुपातिक सहभागिता दिलाने के लिए जातिवार जनगणना कराने से नानुकुर क्यों?'
सपा के साथ खड़े दिखे सहयोगी दल
जातिगत जनगणना पर जयंत चौधरी की रालोद और कृष्णा पटेल की अपना दल (कमेरावादी) का भी समर्थन अखिलेश को हासिल है. सपा-रालोद विधायकों ने गुरुवार को सदन में जातीय जनगणना के मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेरते हुए हंगामा किया. दोनों पार्टियों के विधायकों ने जातीय जनगणना कराने की मांग करते हुए सदन में धरना दिया. वेल में नारेबाजी कर सरकार पर दलित व पिछड़ा वर्ग विरोधी होने का आरोप लगाया. जयंत चौधरी भी अखिलेश के सुर में सुर मिलाते नजर आए तो पल्लवी पटेल ने बीजेपी को ओबीसी विरोधी कठघरे में खड़ा किया.
जातीय जनगणना से पीछे हटी बीजेपी
केशव प्रसाद मौर्य भले ही जातिगत जनगणना के समर्थन में अपनी बात रख चुके हों, लेकिन योगी सरकार इस पर राजी नहीं है. विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सपा विधायक डॉ. संग्राम सिंह यादव ने प्रश्न किया कि क्या सरकार लोकसभा चुनाव से पहले जातीय जनगणना कराएगी? इस पर योगी सरकार ने साफ इंकार कर दिया. योगी सरकार की ओर से कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विधानसभा में स्पष्ट कहा कि जातीय जनगणना कराना केंद्र सरकार का अधिकार है. यूपी अब विकास की दृष्टि से बहुत आगे निकल चुका है, उसे पिछड़ेपन और संकीर्णता के शिकार बिहार की तरफ नहीं ले जाना चाहिए. बीजेपी जातिगत जनगणना को लेकर राजी नहीं है तो सपा इसे लेकर गांव-गांव माहौल बनाने जा रही है.
पूर्वांचल से सपा का अभियान शुरू
जातीय जनगणना पर सपा ने अपने अभियान के पहले चरण में पूर्वांचल के 5 जिलों को चिन्हित किया गया है, जहां पर ब्लॉक स्तर पर संगोष्ठी का आयोजन का माहौल तैयार करेगी. सपा 24-25 फरवरी को वाराणसी, 26-27 फरवरी को सोनभद्र, 28 फरवरी और 1 मार्च को मिर्जापुर, 2-3 मार्च को भदोही में जातिगत मुद्दे पर संगोष्ठियां आयोजित कर रही है. प्रयागराज में 4-5 मार्च को कार्यक्रम का समापन होगा.
सपा स्वामी प्रसाद मौर्य के जरिए जातिगत जनगणना के संगोष्ठी का जिम्मा देकर सूबे में गैर-यादव ओबीसी वोटरों को साधने की पुरजोर कोशिश कर रही है. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो स्वामी प्रासद मौर्य का पार्टी में बढ़ता कद सिर्फ उनके वोट बैंक से ही नहीं, बल्कि उनकी सियासी आक्रामकता से भी जुड़ा है जो सपा को नई धार दे रहा है खासकर जातिगत मुद्दे पर. इसीलिए सपा ने भले ही रामचरितमानस पर खुद के कदम पीछे खींच लिए हैं, लेकिन स्वामी प्रसाद एजेंडे पर बने हुए हैं और जातीय आरक्षण पर खुलकर उतर गए हैं.
सपा का ओबीसी वोटों पर नजर
मिशन-2024 के के लिए सपा अपने सियासी समीकरण को दुरुस्त करने में जुट गई है. सूबे में लगातार दो लोकसभा चुनाव और दो विधानसभा चुनाव में बीजेपी ओबीसी वोटों को साधकर सत्ता पर काबिज हुई है. अखिलेश इस बात को समझ चुके हैं कि बिना ओबीसी वोटों के साथ लिए बीजेपी को मात नहीं दिया जा सकता है. ओबीसी वोटों पर अखिलेश फोकस कर रहे हैं और जातीय जनगणना के जरिए सभी पिछड़ी जातियों के नेताओं को एक साथ लाते दिखाई दिए, क्योंकि सूबे में 52 फीसदी ओबीसी मतदाता हैं और उन्हीं के इर्द-गिर्द सियासत सिमटी हुई है. ऐसे में देखना है कि जातिगत जनगणना के एजेंडे पर 2024 में सपा क्या बीजेपी को घेर पाएगी?
कुबूल अहमद