देश में अमन शांति और लोकतंत्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गंभीर सवाल उठे हैं. हाल ही में दो जनहित याचिकाएं दाखिल की गईं जिनमें असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के एक वीडियो के कारण शिकायत की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी नेता विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि समाज में नफरती भाषण को नियंत्रित करने के लिए सामान्य स्तर पर गाइडलाइन बनानी जरूरी है. अदालत ने बताया कि नफरती भाषण हमारे विचारों से उत्पन्न होता है और इसे नियंत्रित करना कठिन है, फिर भी गाइडलाइन बनाने के लिए तैयार हैं.