यूजीसी के भेदभाव रोकने वाले नए नियम को लेकर सवर्ण समाज के लोगों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर तत्काल रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नए नियमों के सेक्शन 3 (सी) को असंवैधानिक बताया गया था. सुप्रीम कोर्ट से रोक के बाद अब सरकार भी नए नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की तैयारी में जुट गई है.
सूत्रों की मानें तो यूजीसी के नए नियमों को लेकर फैली आशंकाओं पर सरकार जल्द स्थिति स्पष्ट करने जा रही है. इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्रालय के भीतर लगातार मंथन चल रहा है और सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है. शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक यूजीसी के नए नियमों को लेकर जो भ्रम और विरोध सामने आया है, उसे दूर करने के लिए व्यापक चर्चा हो रही है.
सूत्र बताते हैं कि मामला इस समय सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. ऐसे में सरकार कानूनी दायरे में रहते हुए अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर सकती है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य किसी भी वर्ग को निशाना बनाना नहीं है. नियमों के तहत गठित जांच समितियां निष्पक्ष होंगी और इनमें सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है, जिससे इसमें किसी भी प्रकार के भेदभाव या एकतरफा कार्रवाई की आशंका न रहे.
यह भी पढ़ें: UGC के नए नियम... जो सुरक्षा के लिए ढाल बनने थे, वो आज एक तलवार बन गए!
सूत्रों का यह भी कहना है कि जांच प्रक्रिया को लेकर जो सवाल उठाए जा रहे हैं, उन्हें देखते हुए सरकार जल्द ही SOP जारी करेगी. इस एसओपी में यह स्पष्ट किया जाएगा कि शिकायतों की जांच किस तरह होगी, अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी और दुरुपयोग की किसी भी संभावना को कैसे रोका जाएगा. सरकार का मानना है कि यूजीसी के नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम हैं.
यह भी पढ़ें: UGC के नए नियमों के सेक्शन 3-C में ऐसा क्या लिखा है, जिस पर कोर्ट ने पहली सुनवाई में लगाया स्टे
सरकार के सूत्रों की मानें तो यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि नए नियमों की व्याख्या या क्रियान्वयन के दौरान किसी समुदाय, छात्र या शिक्षक के साथ अन्याय न हो. गौरतलब है कि सवर्ण समाज के लोग और छात्र नए नियमों को सीधे-सीधे अपने खिलाफ बता रहे हैं. यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने भी यह दलील दी कि यह संविधान की समानता की भावना के विपरीत है.
हिमांशु मिश्रा