'मातृभाषा को निगल जाती है हिंदी...', उदयनिधि स्टालिन के फिर बिगड़े बोल

तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर हिंदी थोपे जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने हिंदी को अन्य राज्यों की स्थानीय भाषाओं को खत्म करने वाली भाषा बताया और फिल्म 'पराशक्ति' के एक संवाद पर सेंसर बोर्ड की आपत्ति को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की.

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उदयनिधि स्टालिन ने हिंदी को लेकर फिर दिया विवादित बयान.(Photo: PTI) उदयनिधि स्टालिन ने हिंदी को लेकर फिर दिया विवादित बयान.(Photo: PTI)

aajtak.in

  • चेन्नई,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:45 PM IST

तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सोमवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हिंदी भाषा को लेकर फिर विवादित बयान दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदी अपने संपर्क में आने वाली अन्य मातृभाषाओं को निगल जाती है और उनकी पहचान मिटा देती है. स्टालिन ने हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के लोग हिंदी के प्रभाव के कारण अपनी असली भाषाई पहचान खो चुके हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व में हिंदी थोपने के प्रयासों का कड़ा विरोध जारी रखने की बात कही.

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तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उद्धयनिधि स्टालिन ने हिंदी थोपने के खिलाफ एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि हिंदी एक ऐसी भाषा है जो अन्य राज्यों की मातृभाषाओं को 'निगल' जाती है और उनकी पहचान को मिटा देती है. उन्होंने हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां की स्थानीय भाषाएं हिंदी के प्रभाव से महत्वहीन या गैर-मौजूद हो गई हैं.

कई राज्यों में अस्त्विहीन हो चुकी है मातृभाषा

उद्धयनिधि स्टालिन ने अपने संबोधन में तर्क देते हुए  कहा, 'हिंदी एक ऐसी भाषा है जो आपकी मातृभाषा को निगल जाती है. आज कई राज्यों में उनकी मातृभाषा महत्वहीन या अस्तित्वहीन हो चुकी है. उदाहरण के लिए, हरियाणा में उनकी अपनी मातृभाषा थी, लेकिन हिंदी के कारण वे अपनी भाषा की कला खो बैठे. इसी तरह बिहार की मातृभाषा बिहारी है, लेकिन हिंदी के आने से उनकी पहचान मिट गई. छत्तीसगढ़, यूपी और अन्य जगहों पर भी यही चिंताजनक पैटर्न दिखता है.'

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 सेंसर बोर्ड की कैंची

उन्होंने एक साधारण संवाद 'लेट द फायर रेज ऑन' (तमिल में 'थी परवट्टुम') का जिक्र करते हुए कहा कि इतना साधारण डायलॉग भी कुछ लोगों को असुरक्षित महसूस कराता है. ये टिप्पणी फिल्म 'पराशक्ति' के प्रसिद्ध डायलॉग 'थी परवट्टुम' पर सेंसर बोर्ड (CBFC) द्वारा कट लगाने के संदर्भ में की गई हैं.

स्टालिन ने फिल्म 'पराशक्ति' के एक मशहूर संवाद 'थी परावट्टम' (आग को भड़कने दो) पर सीबीएफसी (CBFC) द्वारा लगाए गए कट पर भी टिप्पणी की फुल स्टॉप उन्होंने कहा कि केंद्र में बैठे लोग एक साधारण संवाद से भी असुरक्षित महसूस करते हैं और उन्हें इससे घबराहट होती है.

उन्होंने डीएमके की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, पेरियार, अन्नादुरै और कलाइग्नार करुणानिधि के पदचिह्नों पर चलते हुए हिंदी थोपने का विरोध जारी रखेंगे. उन्होंने इसे वह चिंगारी बताया जो पेरियार ने जलाई थी, जिसे अन्ना और करुणानिधि ने जलाए रखा और आज एमके स्टालिन इसे और तेज कर रहे हैं.

केंद्र पर साधा निशाना

उद्धयनिधि स्टालिन ने हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा नीति और हिंदी थोपने के मुद्दे पर भी केंद्र पर निशाना साधा था. उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि केंद्र तमिलनाडु पर हिंदी थोपने की कोशिश करेगा तो राज्य में एक और भाषा युद्ध होगा. उन्होंने कहा था कि हिंदी अपनाने वाले राज्य अपनी मातृभाषा खो देते हैं और तमिलनाडु कभी ऐसा नहीं होने देगा.

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