'घर नहीं मिलने तक हर महीने दें 2 हजार', खोरी गांव के विस्थापितों के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Supreme court: तीन जजों की खंडपीठ ने विस्तृत सुनवाई के दौरान पाया कि इस मामले में प्रभावित लोगों को बाहर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 8:22 AM IST
  • स्थायी आवास मिलने तक लोगों को दी जाएगी आर्थिक मदद
  • पजेशन लेटर तक देने होंगे 2000 रुपये

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में अरावली की तलहटी वाले वन क्षेत्र में बसे खोरी गांव को ढहाकर पुनर्वास कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस एएस ओका और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने हरियाणा सरकार और स्थानीय निकाय को निर्देश दिया है कि सबका पुनर्वास होने यानी फ्लैट मिलने तक सभी पात्र लोगों को हर महीने दो हजार रुपए दिए जाएं.
  
सुप्रीम कोर्ट ने खोरी गांव के विस्थापित किए गए लोगों से संबंधित मुकदमे में निर्देश दिया कि जब तक विस्थापितों में से पात्र व्यक्तियों को स्थायी आवास की पेशकश पूरी नहीं हो जाती है तब तक फरीदाबाद नगर निगम 2000 रुपए प्रति माह की अनुग्रह राशि का भुगतान करेगा. 

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पजेशन लेटर मिलने तक दी जाएगी रकम

कोर्ट ने आदेश में ये भी साफ कर दिया है कि फरीदाबाद नगर निगम को यह रकम तब तक अदा करनी होगी जब तक निगम सभी पात्र लोगों को आवासीय घरों का कब्जा पत्र यानी पजेशन लेटर जारी नहीं कर देगा.
  
तीन जजों की खंडपीठ ने विस्तृत सुनवाई के दौरान पाया कि इस मामले में प्रभावित लोगों को बाहर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. वजह ये है कि उनके घर ढहाए जा चुके हैं और फिलहाल अस्थाई तौर पर आवंटित परिसर में पानी और जल निकासी की सुविधा नहीं है.

 

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