सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (28 जनवरी) को आवारा कुत्तों को लेकर सभी राज्यों की दलीलें सुनी थीं. अब गुरुवार को अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और सभी पक्षों को एक सप्ताह में अपनी लिखित दलीलें पेश करने का निर्देश दिया है.
अदालत ने सभी हितधारकों की दलील विस्तार से सुनी. डॉग लवर्स, कुत्ते के काटने की घटनाओं के पीड़ित, पशु अधिकार कार्यकर्ता और केंद्र और राज्य सरकारों के वकीलों ने कोर्ट में अपना-अपना पक्ष रखा, जिसके बाद सुनवाई समाप्त हुई.
सुनवाई पूरी होने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. इससे पहले बुधवार को अदालत ने कई राज्यों के आवारा कुत्तों की नसबंदी, डॉग पाउंड स्थापित करने और एजुकेशनल और दूसरे संस्थानों के परिसरों से कुत्तों को हटाने के लिए जरूरी कदम न उठाने पर कड़ी नाराजगी जताई थी.
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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को लगाई थी फटकार
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारी की बेच ने कहा था, ये सब हवाई महल बना रहे हैं. वहीं, जब राज्यों ने पहले के निर्देश मानने को लेकर तर्क दिए को अदातस ने इसे 'मनगढ़ंत कहानियां' बताया था.
असम में 2024 में 1.66 लाख कुत्ते के काटने के मामले दर्ज किए गए, जिसे लेकर कोर्ट ने सवाल उठाया कि राज्य में सिर्फ एक ही डॉग सेंटर क्यों है. जनवरी 2025 में 20,900 लोगों को कुत्तों ने काटा, जिसे लेकर अदालत ने चिंता जाहिर की.
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