सुप्रीम कोर्ट ने कड़कड़डूमा कोर्ट की एक महिला वकील पर उनके पति द्वारा किए गए जानलेवा हमले के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने पीड़िता की तत्काल मदद और घटना की गहन जांच के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने जांच अधिकारी (IO) को निर्देश दिया कि वे इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें.
इसके अलावा, पुलिस अधिकारियों को पीड़िता की दो नाबालिग बच्चियों के ठिकाने का पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
कोर्ट ने यह भी कहा है कि फिलहाल बड़ी बेटी की कस्टडी उसके नाना-नानी के पास ही रहेगी. कोर्ट ने इस दौरान पीड़िता के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की.
अस्पतालों के रवैये पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि पीड़िता को शुरुआती तीन अस्पतालों ने भर्ती करने से इनकार कर दिया था. पहले अस्पताल ने उसे सिर्फ प्राथमिक उपचार दिया, जिसके काफी वक्त बाद सुबह करीब 6 बजे उसे एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया गया. कोर्ट ने स्वास्थ्य सेवाओं के इस रवैये को गंभीरता से लिया है.
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पीड़िता की नाजुक स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) को विशेष निर्देश जारी किए हैं. कोर्ट ने कहा है कि NALSA पीड़िता के इलाज और उसकी बेटियों की देखभाल के लिए अंतरिम वित्तीय सहायता राशि कल तक अनिवार्य रूप से जारी करे, जिससे परिवार को इस संकट की घड़ी में आर्थिक सहारा मिल सके.
संजय शर्मा