मणिपुर में वर्ष 2023 में हुई हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एक अहम तथ्य सामने आया, जिस पर अदालत ने कड़ी नाराज़गी जताई. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया गया कि मणिपुर हिंसा की जांच और राहत कार्यों की निगरानी के लिए गठित अदालत-नियुक्त समिति को 2023 से अब तक कोई भुगतान नहीं किया गया है.
सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी इस समिति के किसी भी सदस्य को अब तक प्रतिपूर्ति (रीइंबर्समेंट) की राशि नहीं मिली है. इस पर सीजेआई ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद समिति के सदस्यों को भुगतान न होना गंभीर विषय है.
पीठ ने कहा कि अंतरिम राहत के तौर पर समिति के तीनों सदस्यों को फिलहाल 10-10 लाख रुपये दिए जाएं. अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राशि अभी केंद्र सरकार जारी करेगी और बाद में राज्य सरकार इसके हिस्से का भुगतान साझा करेगी. साथ ही, न्यायालय ने यह भी कहा कि समिति के सदस्यों को दिए जाने वाले अंतिम मानदेय पर आगे विचार कर निर्णय लिया जाएगा.
इसके अलावा, अदालत ने मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच का नेतृत्व कर रहे अधिकारी दत्तात्रेय को भी 10 लाख रुपये देने का आदेश दिया. कोर्ट ने माना कि इतने संवेदनशील और जटिल मामले में काम कर रहे अधिकारियों और समिति के सदस्यों को समय पर भुगतान मिलना आवश्यक है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो.
मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट लगातार निगरानी रखे हुए है. राज्य में जातीय तनाव और हिंसा की घटनाओं के बाद शीर्ष अदालत ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए विशेष समिति और सीबीआई जांच के निर्देश दिए थे. इस जांच समिति में जस्टिस शालिनी जोशी, जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस आशा मेनन शामिल हैं.
संजय शर्मा