पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के एक बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है. उनके द्वारा आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की आलोचना करने वाली टिप्पणियों पर अदालत ने नाराज़गी जताई है. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि मेनका गांधी ने कोर्ट की अवमानना की है.
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की बेंच ने कहा कि पूर्व मंत्री ने बिना सोचे-समझे सबके खिलाफ 'हर तरह की टिप्पणियां' की हैं.
मेनका गांधी की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन से सवाल करते हुए बेंच ने कहा, "आपने कहा कि कोर्ट को अपनी टिप्पणी में सावधान रहना चाहिए, लेकिन क्या आपने अपने क्लाइंट से पूछा है कि उन्होंने किस तरह की टिप्पणियां की हैं? क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है? उन्होंने बिना सोचे-समझे सबके खिलाफ हर तरह की टिप्पणियां की हैं. क्या आपने उनकी बॉडी लैंग्वेज देखी है?"
कोर्ट ने दिखाई दरियादिली
बेंच ने कहा कि कोर्ट की दरियादिली की वजह से वह पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं कर रही है.
जस्टिस मेहता ने रामचंद्रन से पूछा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री के तौर पर मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों की समस्या खत्म करने के लिए बजट में कितना पैसा दिलवाने में मदद की है.
रामचंद्रन ने जवाब देते हुए कहा कि वह आतंकवादी अजमल कसाब की तरफ से भी पेश हुए हैं और बजट का आवंटन एक पॉलिसी का मामला है.
जस्टिस नाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा, "अजमल कसाब ने कोर्ट की अवमानना नहीं की, लेकिन आपके क्लाइंट ने की है." बेंच ने कहा कि कुत्ते खिलाने वालों को जवाबदेह बनाने पर उसकी टिप्पणी व्यंग्य में नहीं थी, बल्कि गंभीरता से की गई थी, हालांकि यह बात मामले की सुनवाई के दौरान बातचीत में कही गई थी.
इस मामले में सुनवाई अभी पूरी नहीं हुई है.
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13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह राज्यों से कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए 'भारी मुआवजा' देने को कहेगा और ऐसे मामलों के लिए कुत्तों को खाना खिलाने वालों को ज़िम्मेदार ठहराएगा.
कोर्ट ने पिछले पांच साल से आवारा जानवरों पर नियमों को लागू न किए जाने पर भी चिंता जताई है.
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