बच्चा गोद लेने पर भी 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने गोद लिए गए बच्चों की माताओं को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव देने का आदेश दिया है. अदालत का मानना है कि गोद लेने वाली मां को भी बायोलॉजिकल मां के समान अधिकार मिलना चाहिए. कोर्ट ने पितृत्व अवकाश पर भी नीति बनाने का निर्देश दिया है.

Advertisement
 सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने की उम्र सीमा की शर्त भी हटाई. (Photo: ITGD) सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने की उम्र सीमा की शर्त भी हटाई. (Photo: ITGD)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 17 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:42 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देश की महिलाओं के हक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने आदेश दिया है कि गोद लिए गए बच्चे की मां को भी 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव दी जाएगी. खास बात ये है कि गोद लिए बच्चे की उम्र जो भी हो, मां को पूरे 12 हफ्ते की छुट्टी दी जाएगी. 

सुप्रीम कोर्ट ने उस कानूनी प्रावधान को निरस्त कर दिया है, जिसमें सिर्फ 3 महीने तक की उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही मैटरनिटी लीव की अनुमति थी. लेकिन अब ऐसी कोई शर्त नहीं है.

Advertisement

मौजूदा सामाजिक सुरक्षा संहिता की धारा 60(4) में ये नियम था कि गोद लेने वाली मां को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव तभी मिलेगी, जब गोद लिया गया बच्चा 3 महीने से कम उम्र का हो.

मैटरनिटी लीव पर कोर्ट का तर्क

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि एक बायोलॉजिकल मां की तरह ही गोद लिए गए बच्चे की मां को भी मैटरनिटी लीव मिलनी चाहिए. कोर्ट का मानना है कि मैटरनिटी का अधिकार और बच्चे की देखभाल की जरूरत उम्र पर निर्भर नहीं करती.

यह भी पढ़ें: महिला कर्मचारी को मैटरनिटी लीव देने से नहीं मना कर सकती कोई कंपनी: SC

3 महीने की उम्र सीमा हटाई

सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने की उम्र सीमा को हटाते हुए कहा कि ये भेदभाव करता है. अदालत ने माना कि बड़े बच्चे को गोद लेने वाली मां को भी बच्चे के साथ इमोशनल तालमेल बिठाने और उसकी देखभाल के लिए समय की जरूरत होती है.

Advertisement

पितृत्व अवकाश पर विचार का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के दौरान माओं के साथ-साथ पिताओं की भूमिका पर भी बात की. कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वो 'पितृत्व अवकाश' (Paternal Leave) पर भी एक ठोस नीति बनाने पर विचार करे. अदालत का मानना है कि बच्चे के पालन-पोषण में पिता की भागीदारी भी उतनी ही अहम है. इसीलिए इसे सामाजिक सुरक्षा लाभ के दायरे में लाना चाहिए.

यह भी पढ़ें: 'उनका करियर खत्म हो सकता है...' सुप्रीम कोर्ट ने 'पीरियड लीव' वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस महादेवन की बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि परिवार बनाने के लिए गोद लेना एक वैध रास्ता है. कोर्ट के मुताबिक, गोद लिए गए बच्चे और 'प्राकृतिक' बच्चे के बीच कानून कोई भेदभाव नहीं कर सकता.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement