SCBA में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण का आदेश, SC ने कहा-यह प्रयोगात्मक आधार पर दिया गया

कोर्ट ने कहा कि SCBA इस बाबत अपनी वेबसाइट या अन्य तरीकों से सदस्यों से 19 जुलाई तक सुझाव मंगाए. यानी सुझाव 19 जुलाई तक भेजे जा सकते हैं.  इसके बाद आम वकीलों से मिलने वाले ये सुझाव scba डिजिटल या प्रिंटेड फॉर्मेट में संकलित कर कोर्ट को दे. यानी उन सुझावों के आधार पर अभी सुधारों और बदलाव का सिलसिला अभी जारी रहेगा.

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 06 मई 2024,
  • अपडेटेड 6:24 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने एससीबीए में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण वाले आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा है कि ये एक्सपेरिमेंटल बेसिस यानी एक तजुर्बे के तौर पर दिया गया था. कोर्ट ने आज सुबह इस आदेश को स्पष्ट करने की मेंशमिंग किए जाने के बाद ये बातें कहीं.
 
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने 2 मई को आदेश दिया था कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यसमिति में महिला वकीलों के लिए न्यूनतम एक तिहाई पद आरक्षित किए जाएं. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने बी डी कौशिक के मामले में सुप्रीम कोर्ट के ही पुराने फैसले को स्पष्ट करते हुए ये निर्देश दिए हैं. पीठ के दो मई को जारी निर्देश के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के ट्रेजरर यानी कोषाध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित रहेगा. इसके अलावा एससीबीए में सीनियर एडवोकेट्स के लिए बनी सीनियर कार्यकारिणी के छह सदस्यों में से दो और सामान्य कार्यकारिणी के नौ सदस्यों में से तीन सदस्य के पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे.

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इस आदेश का परिपालन पहली बार 16 मई को होने वाले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में होगा. इन चुनाव का नतीजा 18 मई रविवार को आएगा. अब एससीबीए के पदाधिकारियों अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष में कोषाध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा.

कोर्ट ने कहा कि उम्मीदवारों की योग्यता और शर्तों में आवश्यक बदलाव व सुधार की बाबत आठ प्रस्ताव आए लेकिन वो नाकाम हो गए. इनके अलावा एसोसिएशन का सदस्य बनने के लिए फीस और चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की जमानत राशि को लेकर भी लाए गए प्रस्ताव 30 अप्रैल को आयोजित स्पेशल जनरल बॉडी मीटिंग में गिर गए.

ऐसे में कोर्ट ने महसूस किया कि नियम, योग्यता, शर्तों और फीस को लेकर निर्णय लेने को जरूरत है. क्योंकि इन चीजों को दशकों तक लटकाए नहीं रखा जा सकता. समय रहते सुधार और बदलाव जरूरी हैं.

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कोर्ट ने कहा कि SCBA इस बाबत अपनी वेबसाइट या अन्य तरीकों से सदस्यों से 19 जुलाई तक सुझाव मंगाए. यानी सुझाव 19 जुलाई तक भेजे जा सकते हैं.  इसके बाद आम वकीलों से मिलने वाले ये सुझाव scba डिजिटल या प्रिंटेड फॉर्मेट में संकलित कर कोर्ट को दे. यानी उन सुझावों के आधार पर अभी सुधारों और बदलाव का सिलसिला अभी जारी रहेगा.

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