ईशा ग्रामोत्सवम 2023 के फिनाले में शामिल हुए खेल मंत्री अनुराग ठाकुर, बोले- इससे ग्रामीण भावना हो रही पुनर्जीवित

2004 में सद्गुरु द्वारा शुरू की गई इस सामाजिक पहल का उद्देश्यगांव के लोगों के जीवन में खेल और जीवंतता की भावना जगाना है. इस महत्वपूर्ण अवसर पर मंत्री के साथ ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु, लोकप्रिय तमिल अभिनेता संथानम और पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान धनराज पिल्लै भी मौजूद थे.

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सद्गुरु के साथ केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर सद्गुरु के साथ केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 10:53 PM IST

युवा मामले और खेल मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर शनिवार को कोयंबटूर में ईशा ग्रामोत्सवम 2023 के ग्रैंड फिनाले में पहुंचे. इस दौरान उन्होंने कहा, "मुझे यह जानकर खुशी हुई कि ईशा ग्रामोत्सवम सामाजिक रूपांतरण के लिए एक प्रभावी माध्यम बन गया है जो ग्रामीणों को व्यसनों से दूर जाने, समुदाय के भीतर जातिगत बाधाओं को तोड़ने, महिलाओं को सशक्त बनाने और लचीली ग्रामीण भावना को पुनर्जीवित करने में मदद करता है."  

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2004 में सद्गुरु द्वारा शुरू की गई इस सामाजिक पहल का उद्देश्यगांव के लोगों के जीवन में खेल और जीवंतता की भावना जगाना है. इस महत्वपूर्ण अवसर पर मंत्री के साथ ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु, लोकप्रिय तमिल अभिनेता संथानम और पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान धनराज पिल्लै भी मौजूद थे.

अनुराग ठाकुर ने कहा, “सद्गुरु द्वारा की गई अनोखी पहल ग्रामीण खेलों और संस्कृति का उत्सव मनाती है. इसके जैसी कोई दूसरी नहीं है. ईशा ग्रामोत्सवम की शुरुआत 2004 में ग्रामीण जनता के लिए स्वास्थ्य, समृद्धि और कल्याण लाने के उद्देश्य से की गई थी और मैं यहां खिलाड़ियों को देख रहा था, उनमें से कुछ मजदूर, खेतिहर और मछुआरों के रूप में काम करते हैं, लेकिन मैं उनमें प्रतिस्पर्धी भावना भी देख रहा था." 

112 फीट ऊंचे आदियोगी के पास आयोजित समापन समारोह में खिलाड़ियों ने ग्रामीण कौशल का मनमोहक प्रदर्शन किया. दुनिया के कोने-कोने से समारोह में इकट्ठा हुए हजारों दर्शकों ने पूरे जुनून और उमंग के साथ चैंपियनशिप ट्रॉफी के लिए खेल रहे खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया.

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25 हजार गांवों में 60 हजार से अधिक खिलाड़ी: सद्गुरु

इस अवसर पर बोलते हुए सद्गुरु ने कहा, “उत्सव जीवन का आधार है और यह तभी संभव है जब आप चंचल हों. तो यह देखना शानदार है कि 25,000 गांवों में 60,000 से अधिक खिलाड़ी और उन गांवों में सैकड़ों और हजारों दर्शक, सभी किसी न किसी समय, यह बिना जाने कि वे क्या कर रहे हैं, वे कूदे होंगे, चिल्लाए होंगे, चीखे होंगे, हंसे होंगे और रोए होंगे. जीवन को घटित करने के लिए इसी की जरूरत है.”

जीवन में चंचलता लाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए सद्गुरु ने कहा, “हमारे मंत्री कह रहे थे, आपको कुछ खेल खेलना चाहिए. मुझे नहीं पता कि आपका माहौल क्या है. आप किसी अपार्टमेंट बिल्डिंग में या कहीं और रहते हैं. ठीक है, आप कम से कम एक दूसरे पर गेंद फेंक सकते हैं. यदि आपके पास गेंद नहीं है, तो एक प्याज फेंकें. यदि प्याज बहुत महंगा है, तो एक आलू फेंक दें - जीवन को आनंदमय बनाने के लिए जरूर कुछ करें.”

'हम ईशा स्वयंसेवकों के बहुत आभारी हैं'

ग्रामोत्सवम फाइनल में प्रतिस्पर्धा कर रही आंध्र प्रदेश की आनंदपुरम थ्रोबॉल टीम की कप्तान कुमारी ने साझा किया, 'शुरुआत में, हमारे परिवार हमें खेलने देने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन फाइनल में पहुंचने के बाद उनका नजरिया बदल गया. अब वे हमारे सबसे बड़े चीयरलीडर्स बन गए हैं. हमारी टीम के साथी आमतौर पर दैनिक कामकाज में उलझे रहते हैं और हर रात को खेल के लिए अभ्यास करते थे. टीम की एक साथी फाइनल में भाग लेने के लिए अपने तीन महीने के बच्चे को घर पर छोड़कर आई है! यहां होना एक सपने के साकार होने जैसा है, और हम ईशा स्वयंसेवकों के बहुत आभारी हैं जो प्रशिक्षण से लेकर कोयंबटूर की यात्रा तक हमारे साथ खड़े रहे.'

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ये रहा ग्रैंड फाइनल का रिजल्ट

इस बीच, ईशा ग्रामोत्सवम के फाइनल अपनी प्रतिष्ठा पर कायम रहा और करीबी मुकाबले से दर्शकों को उनकी सीटों पर बांधकर रखते रहे. वॉलीबॉल में, सेलम के उथमासोलपुरम ने FEC सिथुराजापुरम को हराते हुए शीर्ष स्थान कबिज किया. थ्रोबॉल में, पीजी पुदुर, कोयंबटूर ने चैंपियन ट्रॉफी जीती, जबकि मारागोडु, कर्नाटक का ब्लैक पैंथर दूसरे स्थान पर रहा. रेड और डिफेंस के शानदार प्रदर्शन के बाद, इरोड टीम ने महिला कबड्डी में डिंडीगुल टीम को हराया. पैरालंपिक खेल में, कोयंबटूर पैरा वॉलीबॉल एसोसिएशन, कोयंबटूर ने कुमारी किंग्स, कन्याकुमारी को हराकर पैरालंपिक वॉलीबॉल चैंपियनशिप जीती.

इन राज्यों में हुआ खेलों का महाकुंभ

अगस्त के महीने में शुरू हुआ खेल का महाकुंभ दक्षिणी राज्यों तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में शुरू हुआ था. 194 से ज्यादा ग्रामीण जगहों पर खेले गए, ईशा ग्रामोत्सवम में 60 हजार खिलाड़ियों की भागीदारी देखने को मिली, जिसमें 10 हजार से ज्यादा ग्रामीण महिलाएं हैं, जिनमें ज्यादातर घरेलू महिलाएं थीं, जिन्होंने कबड्डी और थ्रोबॉल जैसे आयोजनों में भाग लिया.'

ईशा ग्रामोत्सवम का फॉर्मेट भी अनोखा है और यह आयोजन पेशेवर खिलाड़ियों के लिए नहीं है बल्कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी, मछुआरे और गृहिणियों से लेकर रोजमर्रा के ग्रामीण लोगों के लिए यह मंच तैयार किया गया है, ताकि वे अपने दैनिक कामकाज के साथ खेलों की उत्सव और एकजुट होने के आनंद को भी अनुभव कर सकें.

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ईशा आउटरीच को एनएसपीओ के रूप में मान्यता मिली

ईशा ग्रामोत्सवम का आयोजन करने वाले ईशा आउटरीच को खेल और युवा मामलों के मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय खेल संवर्धन संगठन (एनएसपीओ) के रूप में मान्यता दी गई है. सचिन तेंदुलकर, ओलंपिक पदक विजेता राजवर्धन सिंह राठौड़ और कर्णम मल्लेश्वरी जैसी खेल हस्तियां इससे पहले खेल महोत्सव के फाइनल में विशेष अतिथि के रूप में भाग ले चुके हैं. मिताली राज, पीवी सिंधु, वीरेंद्र सहवाग, जवागल श्रीनाथ, शिखर धवन ने भी ईशा ग्रामोत्सवम के बारे में बोलते हुए इस आयोजन का समर्थन किया है.

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