केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की हिरासत का बचाव किया. सरकार ने अदालत को बताया कि वांगचुक के सार्वजनिक तौर पर दिए गए भाषण राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक शांति और स्ट्रैटेजिकली तौर से सेंसिटिव बॉर्डर एरिया के लिए खतरा बन सकते हैं. यह मामला वांगचुक की पत्नी गीतांजलि द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें वांगचुक की हिरासत को चुनौती दी गई थी.
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्न वराले शामिल थे, ने यह साफ किया कि अनुच्छेद 32 के तहत अदालत हिरासत आदेशों पर अपील की तरह विचार नहीं करती. मुख्य सवाल यह होता है कि हिरासत आदेश के कारण, आधार और सामग्री का नेशनल सिक्योरिटी से कोई संबंध है या नहीं.
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अदालत का काम अपनी सटिस्फैक्शन जांचने का नहीं है, बल्कि यह देखना है कि जिला मजिस्ट्रेट हिरासत आदेश के संबंध में सेटिस्फाइड थे या नहीं. उन्होंने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट ने निष्कर्ष निकाला कि वांगचुक के भाषण युवाओं को भड़काने वाले हैं और सार्वजनिक शांति को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
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मेहता ने यह भी कहा कि वांगचुक ने युवाओं को नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे हालात की ओर ले जाने का प्रयास किया, जहां हिंसक उथल-पुथल और राजनीतिक अस्थिरता देखी गई. ऐसे संदेश सेंसिटिव लद्दाख के एरिया में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं.
सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि हिरासत आदेश सही प्रक्रिया के तहत पारित किया गया और चार घंटे के भीतर कार्रवाई की गई. एक डीआईजी ने वांगचुक से मुलाकात की और उनके भाषणों के वीडियो क्लिप दिखाए, जिन्हें वांगचुक ने स्वीकार किया.
बता दें कि सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया था. वह वर्तमान समय में राजस्थान के जोधपुर में स्थित सेंट्रल जेल में बंद हैं.
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