कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने बुधवार को प्रतिष्ठित अखबार वॉशिंगटन पोस्ट से बेटे ईशान को निकालने जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और कंपनी के इस फैसले को एक अजीब व्यावसायिक निर्णय बताया है.
दरअसल, जेफ बेजोस के स्वामित्व वाले वॉशिंगटन पोस्ट अखबार ने वैश्विक स्तर पर छंटनी करने हुए अपने लगभग एक-तिहाई कर्मचारियों यानी 300 से अधिक पत्रकारों को नौकरी से निकाल दिया है. जिसमें थरूर के बेटे ईशान थरूर भी शामिल हैं.
शशि थरूर ने अखबार के व्यावसायिक तर्क पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि ईशान का कॉलम इंटरनेट पर बेहद लोकप्रिय था. उनके WorldView न्यूजलेटर के 5 लाख से अधिक (हाफ मिलियन प्लस!) व्यक्तिगत सब्सक्राइबर्स थे.
उन्होंने बताया कि मैंने दुनिया भर के विदेश मंत्रियों, राजनयिकों और विद्वानों से मुलाकात की है जो उनके लेखों को रोजाना पढ़ते थे. थरूर के अनुसार, इतने बड़े पाठक वर्ग वाले न्यूजलेटर को बंद करना समझ से परे है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखबार इसे भुनाने की कोशिश कर सकता था, लेकिन इसे खत्म करना खुद को नुकसान पहुंचाने जैसा कृत्य है.
इतिहास की सबसे बड़ी कटौती
वहीं, वॉशिंगटन पोस्ट के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने चार फरवरी को एक कंपनी-व्यापी कॉल के दौरान इस छंटनी की घोषणा की. अखबार ने इसे गिरते डिजिटल ट्रैफिक और लगभग 100 मिलियन डॉलर के वित्तीय घाटे से निपटने के लिए एक 'दर्दनाक लेकिन आवश्यक' कदम बताया है. ये अखबार के 150 साल के इतिहास की सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है. ईशान के साथ-साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्टाफ और कई अनुभवी सहयोगियों को भी अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है.
ईशान थरूर (वाशिंगटन पोस्ट में सीनियर इंटरनेशनल अफेयर्स कॉलमिस्ट थे और WorldView कॉलम के एंकर थे) ने छंटनी की खबर साझा की और बताया कि उन्हें नौकरी से निकला दिया गया है.
ईशान ने भी व्यक्त की निराशा
उन्होंने लिखा, 'आज मुझे वॉशिंगटन पोस्ट से निकाल दिया गया है, साथ ही अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्टाफ और कई अन्य शानदार सहकर्मियों को भी. मैं हमारे न्यूजरूम के लिए और खासकर उन बेजोड़ पत्रकारों के लिए दुखी हूं, जिन्होंने पोस्ट के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम किया- संपादक और संवाददाता जो लगभग 12 वर्षों से मेरे दोस्त और सहयोगी रहे हैं. उनके साथ काम करना सम्मान की बात थी.'
अपने योगदानों पर प्रकाश डालते हुए ईशान ने कहा, 'मैंने पाठकों को दुनिया और उसमें अमेरिका की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने के लिए जनवरी 2017 में वर्ल्डव्यू कॉलम शुरू किया था और मैं उन पांच लाख वफादार पाठकों का आभारी हूं जो सालों से हफ्ते में कई बार इस कॉलम को पढ़ते रहे हैं.'
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