दुनिया के कई हिस्सों में इस समय जंग और तनाव का माहौल बना हुआ है. मिडिल ईस्ट में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं. ऐसे दौर में भारत अपनी रक्षा क्षमता को लगातार मजबूत करने में जुटा है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता ने भारत की सैन्य तैयारी और ताकत को दुनिया के सामने मजबूती से पेश किया है. वहीं आत्मनिर्भर भारत का संकल्प भी देश के रक्षा क्षेत्र को नई मजबूती और गति दे रहा है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोलकाता में आयोजित ‘सागर संकल्प’ मैरीटाइम कॉन्क्लेव में संबोधित करते हुए रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई अहम जानकारियां दी हैं. राजनाथ सिंह ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में भारत पूरी गति के साथ आत्मनिर्भरता की ओर अपने कदम बढ़ा चुका है.
पिछले वित्तीय वर्ष तक हमारा डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन, डेढ़ लाख करोड़ रूपये के रिकॉर्ड आंकड़े को भी पार कर चुका है. साथ ही हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट भी 24,000 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड आंकड़े को पार चुका है.
हालांकि इन आंकड़ों से हमें प्रभावित नहीं हो जाना है. हमें अभी और बहुत आगे जाना है. राजनाथ सिंह कहते हैं कि ये सारे नंबर कुछ मायने नहीं रखेंगे. हमें नंबर से भी आगे देखना है. मुझे पूरा विश्वास है कि हम सब मिलकर और आगे बढ़ेंगे. आत्मनिर्भरता हमारे लिए केवल एक स्लोगन नहीं रही बल्कि एक प्रैक्टिकल रियलिटी के रूप में स्थापित हो रही है.
रक्षा मंत्री बताते हैं आज स्थिति यह है कि हम जिस आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के साथ आगे बढ़े थे, उसके सकारात्मक परिणाम हमारे सामने है. आज भारतीय नौसेना के लिए भी, जितने युद्धपोत और पनडुब्बियां ऑर्डर पर हैं, वे सभी भारतीय शिपयार्ड्स में बन रही हैं.
आज हम डिजाइन, इंजीनियरिंग, निर्माण से लेकर लाइफसाइकल सपोर्ट तक की पूरी क्षमता विकसित कर रहे हैं.यही तो आत्मनिर्भरता का वास्तविक अर्थ है. जब हम कहते हैं कि हम बिल्डर्स नेवी बन चुके हैं, तो यह कोई स्लोगन नहीं है, यह ग्राउंड रियलिटी है.
GRSE आज केवल एक बड़े शिपयार्ड की कहानी नहीं है; इसके पीछे एक विशाल MSME इकोसिस्टम खड़ा है. हजारों MSMEs, स्टार्टअप्स और स्वदेशी वेंडर्स इस सप्लाई चेन का हिस्सा हैं.
राजनाथ सिंह कहते हैं कि भारत सरकार ने इस दिशा में कई खास पहल और जरूरी सुधार किए हैं. लेकिन मैं इसे सिर्फ नीतियों की भाषा में नहीं कहना चाहता. अगर हमें भारत को शिपबिल्डिंग के क्षेत्र में आगे ले जाना है, तो हमें इंडस्ट्री को भरोसा देना होगा. इसी भावना से हम अनेक फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम्स लेकर आए हैं.
लॉन्ग टर्म फंडिंग के लिए हमने एक डेडिकेटेड मैकेनिज्म बनाया है. FDI norms को भी लिबरलाइज किया गया है, हमने PPP मॉडल को बढ़ावा दिया है.
3 लाख करोड़ का इनवेस्टमेंट प्लान
रक्षा मंत्री कहते हैं कि मैरिटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरिटाइम अमृत काल विजन 2047 के तहत, वर्ल्ड-क्लास शिपबिल्डिंग क्लस्टर्स डेवलप करने के लिए करीब 3 लाख करोड़ रूपये का इन्वेस्टमेंट प्लान तैयार किया गया है.
आज कोस्टल स्टेट्स में क्लस्टर्स तैयार हो रहे हैं. हमारा लक्ष्य साफ है, 2030 तक हमें टॉप 10 शिपबिल्डिंग नेशंस में स्थान बनाना है, और 2047 तक टॉप 5 में पहुंचना है.
यह सपना बड़ा तो है लेकिन असंभव नहीं. यह केवल सरकार का लक्ष्य नहीं है, यह हम सब की जिम्मेदारी होनी चाहिए. यह इंडस्ट्री, वर्कफोर्स और पॉलिसी सिस्टम तीनों की जिम्मेदारी है.
राजनाथ सिंह कहते हैं कि मैं ‘सागर संकल्प’ कॉन्क्लेव में यह कहना चाहूंगा कि सागर यानी समुद्र, जो आज मौका भी है, और चैलेंज भी है. यदि हम कोऑर्डिनेटेड प्लानिंग, टेक्नोलॉजी एडॉप्शन और इंस्टीट्यूशनल सिनर्जी के साथ आगे बढ़ें, तो भारत का मैरिटाइम डोमेन सुरक्षित, समृद्ध और सशक्त होगा.
यही समय है, जब हमें अपने मैरिटाइम विजन को साफ कॉन्फिडेंट और कलेक्टिव रूप में आगे बढ़ाना है. भारतीय नौसेना की तैयारी, ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों की सफलता और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बढ़ते कदम, ये सभी संकेत देते हैं कि भारत का रक्षा क्षेत्र सही दिशा में आगे बढ़ रहा है.
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