रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने नई दिल्ली में अपनी प्रेस ब्रीफिंग को तब कुछ देर के लिए रोक दिया, जब एक मीडियाकर्मी ने फोन पर जोर से बात करके प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाधा डाल दी. ऐसा दो-दो बार हुआ. तब थोड़ा तंज और थोड़ा मजाकिया अंदाज में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि , "सर अगर आप अपना फोन सरेंडर नहीं करते हैं तो वे बंदूक निकाल लेंगे."
76 वर्ष के सर्गेई लावरोव क्रेमलिन के दिग्गज डिप्लोमैट माने जाते हैं. लावरोव दिल्ली में ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक में शिरकत करने आए थे. शुक्रवार को वे नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस संबोधित कर रहे थे.
सर्गेई लावरोव प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल ही रहे थे कि एक पत्रकार ने फोन पर बात करना शुरू कर दिया. लावरोव ने इस शख्स को संबोधित करते हुए अंग्रेजी में कहा, "Can you just leave us sir? its either you yourself or your phone..."
इतना कहने के बाद सर्गेई लावरोव ने रूसी भाषा में अपनी पीसी फिर से शुरू कर दी.
लेकिन उन्होंने कुछ ही वाक्य बोला था कि उस मीडियाकर्मी ने फिर से फोन पर बात शुरू कर दी.
इसके बाद रूसी विदेश मंत्री सर्गेई नाराज दिखे. उन्होंने फिर उस पत्रकार से मुखातिब होते हुए अंग्रेजी में कहा, "Look can you leave us? I am not joking. Can you leave us please.
कुछ सेकेंड के बाद लावरोव ने उस पत्रकार से फिर कहा, "Sir excuse me, if you don't surrender you phone, they will take out a gun."
दरअसल इस बीच कुछ लोग उस पत्रकार के पास पहुंच गए थे, और उससे उसका फोन मांग रहे थे.
ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव 13 मई 2026 को भारत पहुंचे थे. अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक की और BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में शिरकत की.
ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों के बैठक की अध्यक्षता भारत ने की. लावरोव ने भारत-रूस संबंधों को 'अटूट' और 'रॉक सॉलिड' बताया. उन्होंने कहा कि रूस भारत को स्थिर ऊर्जा और तेल की आपूर्ति जारी रखेगा, चाहे कितना भी बाहरी दबाव क्यों न हो. दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा सहयोग, परमाणु ऊर्जा (कुडनकुलम परियोजना) और BRICS प्लेटफॉर्म पर गहरी चर्चा हुई.
इस दौरान लावरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली और ऊर्जावान नेताओं में शामिल किया.
सर्गेई लावरोव ने ईरान युद्ध में भारत की भूमिका पर जोर दिया और कहा कि ईरान वॉर में भारत मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है. उन्होंने कहा, पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू करवाने में मदद कर रहा है ताकि ज़रूरी समस्याओं को सुलझाया जा सके. अगर वे किसी दीर्घकालिक मध्यस्थ की तलाश करते हैं, तो भारत अपनी विशाल कूटनीतिक अनुभव को देखते हुए यह भूमिका निभा सकता है."
अपनी ब्रीफिंग में लावरोव ने इस क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता के महत्व पर ज़ोर दिया जो कि ऊर्जा का एक प्रमुख केंद्र है.
उन्होंने कहा कि भारत जो वर्तमान में BRICS का अध्यक्ष है और जिसकी क्षेत्रीय स्थिरता में सीधी दिलचस्पी है, प्रमुख हितधारकों को बातचीत के लिए एक साथ लाने में मदद कर सकता है.
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