साजिश या हादसा? अमेरिका-ईरान जंग के बीच भारत समेत 5 देशों की रिफाइनरी में कैसे लगी आग

राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी में उद्घाटन से पहले लगी आग ने न सिर्फ एक बड़े प्रोजेक्ट को झटका दिया, बल्कि वैश्विक स्तर पर तेल रिफाइनरियों में हो रही लगातार आग की घटनाओं के एक पैटर्न की ओर भी ध्यान खींचा है.

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 राजस्थान के बालोतरा स्थित एचपीसीएल पचपदरा रिफाइनरी में लगी आग पर काबू पाने का प्रयास करते फायर टेंडर. (Photo: PTI) राजस्थान के बालोतरा स्थित एचपीसीएल पचपदरा रिफाइनरी में लगी आग पर काबू पाने का प्रयास करते फायर टेंडर. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:20 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को राजस्थान के पचपदरा में एक रिफाइनरी का उद्घाटन करने वाले थे. करीब 13 साल पहले देखे गए इस प्रोजेक्ट का सपना अब पूरा होने जा रहा था. लेकिन उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले भीषण आग ने रिफाइनरी के मेन प्रोसेसिंग यूनिट्स को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे इसका उद्घाटन टालना पड़ा.

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की इस रिफाइनरी में लगी भीषण आग के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है. हैरानी की बात यह है कि दुनिया भर में ऑयल एसेट्स, खासकर रिफाइनरियों में आग लगने की घटनाओं का एक पैटर्न नजर आ रहा है. यह सब ऐसे समय हो रहा है, जब पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच तेल और गैस जैसे प्राकृतिक संसाधनों को को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.

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अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 से ईरान पर हवाई हमले शुरू किए और पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष की शुरुआत हुई, उसके बाद से भारत सहित छह देशों की तेल रिफाइनरियों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं. ये सभी रिफाइनरियां युद्ध क्षेत्र से बाहर हैं. इन घटनाओं को लेकर अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या रिफाइनरियों में लग रही आग महज संयोग है या इसके पीछे कोई पैटर्न है.

पीएम मोदी बाड़मेर जिले के पचपदरा में स्थित एचपीसीएल रिफाइनरी का 21 अप्रैल को उद्घाटन करने वाले थे. (Photo: PTI)

बीते दो महीने में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मेक्सिको, इक्वाडोर और रूस की रिफाइनरियों में आग के कारण व्यवधान देखा गया है. रूस का मामला अलग है, क्योंकि वहां के तेल संयंत्रों पर यूक्रेन ने हमले किए हैं. रूस और यूक्रेन फरवरी 2022 से एक दूसरे के खिलाफ युद्ध में हैं. हालांकि बाकी सभी देशों की रिफाइनरियों में आग की घटनाएं प्लांट के भीतर तकनीकी खामियों या आंतरिक समस्याओं के कारण हुई बताई गई हैं.

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भारत में भी दो ऑयल एसेट्स में आग की घटनाएं सामने आई हैं. हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड  (HPCL) की राजस्थान रिफाइनरी के अलावा मुंबई तट के पास ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC)  के ऑयल फील्ड में भी हादसा हुआ. ओएनजीसी की इस फैसिलिटी में 12 अप्रैल को आग लगी थी, जिसे काबू में कर लिया गया था.

राहत की बात यह रही कि राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी के इंफ्रास्ट्रक्चर को कोई गंभीर नुकसान नहीं पहुंचा है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि घटना के मूल कारणों की जांच करने के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया गया है. एचपीसीएल ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि हीट एक्सचेंजर सर्किट में वाल्व/फ्लैंज में से किसी एक के जरिए हाइड्रोकार्बन लीक होने के कारण आग लगी थी. 

अब तक की जानकारी के मुताबिक तेल रिफाइनरियों में आग की ये सभी घटनाएं, दुर्घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन एक पैटर्न नजर आ रहा है. अमेरिका में दो ऑयल एसेट्स- वैलेरो एनर्जी (Valero Energy) के पोर्ट आर्थर रिफाइनरी और मैराथन पेट्रोलियम (Marathon Petroleum) के एल पासो रिफाइनरी में भी विस्फोट और आग की घटनाएं सामने आई हैं. ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक में आग लगने की घटनाएं हुई हैं, और यह अभी तक पूरी तरह से चालू नहीं हुई है. इक्वाडोर और मेक्सिको की तेल रिफाइनरियों में भी आग लगने की घटनाएं हुई हैं.

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म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में 20 अप्रैल को स्थित मॉबी रिवर पोर्ट (Hmawbi River Port) पर एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसने 10 से अधिक ईंधन टैंकरों और जहाजों को अपनी चपेट में ले लिया. आग तेजी से फैल गई और टैंकर धू-धू कर जलने लगे. इमरजेंसी टीमें आग पर पूरी तरह काबू पाने में नाकाम रहीं, और मंगलवार तक भी आग धधकती रही. एक X यूजर ने पोस्ट किया, 'भारत की तेल रिफाइनरी में आग लगे अभी 24 घंटे भी नहीं हुए हैं, और अब म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र के होमालिन बंदरगाह पर हुए एक बड़े विस्फोट के बाद 10 से अधिक ईंधन टैंकरों को आग ने अपनी चपेट में ले लिया. यह अब हद से ज्यादा हो रहा है.'

अरविंद नाम के एक वेरिफाइल यूजर ने 16 अप्रैल को X पोस्ट पर किया था, 'भारतीय तेल रिफाइनरियों को सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त कदम उठाने चाहिए, खासकर अंदरूनी साजिश को लेकर.' यह राजस्थान रिफाइनरी में आग लगने से चार दिन पहले का पोस्ट है. अरविंद ने अपने पोस्ट में कहा कि उन्हें एक बुरा अंदेशा था कि विरोधी देश में किसी तेल रिफाइनरी को निशाना बना सकते हैं. उन्होंने लिखा, 'भूराजनीतिक कारणों से तेल की कीमतें बढ़ाने और भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के लिए विरोधी रिफाइनरी में आग लगा सकते हैं.' इसके ठीक चार दिन बाद, 20 अप्रैल को एचपीसीए की रिफाइनरी में आग लगने की घटना सामने आई.

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अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध से सबसे बड़ा सबक यह सामने आया है कि दुनिया भर के देश कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर कितने ज्यादा निर्भर हैं. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में कई अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, साथ ही इजरायल के प्रमुख शहरों को भी निशाना बनाया. 

ईरान ने खाड़ी देशों की तेल रिफाइनरियों पर भी हमले किए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल और गैस की आपूर्ति को बाधित कर दिया. दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. मध्य पूर्व में जारी इस संघर्ष ने वैश्विक तेल और गैस बाजार को प्रभावित कर दिया है. फरवरी में कच्चे तेल की कीमत करीब 66 डॉलर प्रति बैरल थी, जो मार्च में बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित दो हफ्तों के युद्धविराम के दौरान कीमतों में मामूली गिरावट देखने को मिली, जो इस हफ्ते खत्म होने वाला है. 

दुनियाभर में ऑयल एसेट्स में आग लगने की घटनाएं

इस बीच, अमेरिका-ईरान युद्ध के 45 दिनों के भीतर पांच अलग-अलग देशों की रिफाइनरियों में आग की घटनाएं सामने आईं. रिपोर्ट के मुताबिक ये घटनाएं ड्रोन या मिसाइल हमलों के कारण नहीं, बल्कि तकनीकी खामियों या छोटे लीक की वजह से हुईं, क्योंकि ये रिफाइनरियां युद्ध क्षेत्र से दूर स्थित थीं. टेक्सास में 23 मार्च को वैलेरो एनर्जी के पोर्ट आर्थर प्लांट में विस्फोट की घटना सामने आई. डीजल हाइड्रोट्रीटर में आग लगने के बाद यह विस्फोट हुआ. शुरुआत में ईरान की संलिप्तता को लेकर अटकलें लगीं, लेकिन अधिकारियों ने इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की. मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए.

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मुंबई हाई में 4 अप्रैल को ओएनजीसी के एसएचपी प्लेटफॉर्म पर आग लगने से 10 कर्मचारी मामूली रूप से घायल हो गए. इमरजेंसी टीमों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पा लिया. ओएनजीसी ने आग लगने के कारणों का खुलासा नहीं किया है. 10 अप्रैल को अमेरिका के टेक्सास में एक और बड़ी आग की घटना सामने आई, जब मैराथन पेट्रोलियम की एल पासो रिफाइनरी में तकनीकी खामी के कारण आग लग गई, जिसे जल्द ही बुझा लिया गया.

ऑस्ट्रेलिया में 16 अप्रैल को आग की घटना हुई. विवा एनर्जी की कोरियो ऑयल रिफाइनरी (जीलॉन्ग, मेलबर्न के दक्षिण-पश्चिम) में आग बुझाने के लिए आपातकालीन टीमें पहुंचीं. यह रिफाइनरी विक्टोरिया के करीब 50% और देश के 10% ईंधन का उत्पादन करती है, लेकिन घटना के बाद से यह अभी तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है. सरकार ने पेट्रोल उत्पादन पर असर पड़ने की चेतावनी दी है. इसके बाद 20 अप्रैल को राजस्थान में एचपीसीएल की रिफाइनरी में आग लग गई, जो इसके उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले की घटना थी. आग पर काबू पाने के लिए दर्जनों फायर टेंडर्स को तैनात किया गया और बाद में स्थिति नियंत्रित कर ली गई.

दुनिया भर में तेल रिफाइनरियों में आग क्यों लग रही है?

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एक नॉर्थ अमेरिकन एक्स (X) अकाउंट ने दावा किया कि दुनियाभर के ऑयल एसेट्स में आग लगने की ये घटनाएं सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि तेल आपूर्ति को बाधित करने का पैटर्न हो सकता है. एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी की घटना के बाद एक्स पर लिखते हुए अरविंद ने भी कहा कि अलग-अलग देशों में रिफाइनरियों में लग रही आग की घटनाएं वैश्विक स्तर पर रिफाइंड ऑयल सप्लाई को प्रभावित करने का संकेत हो सकती हैं. उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का हवाला देते हुए कहा, 'एक पक्ष तेल की कमी पैदा करना चाहता है और इसके लिए पहले से तैयारी कर चुका है, जबकि दूसरा पक्ष तेल की भरपूर आपूर्ति बनाए रखकर दूसरे पर दबाव बनाना चाहता है.'

अमेरिका-ईरान युद्ध में तेल सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरा है. सैन्य ताकत के लिहाज से अमेरिका और ईरान की तुलना नहीं की जा सकती. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी शुरुआत में लगा था कि यह युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म हो जाएगा. लेकिन जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित किया- जो फारस की खाड़ी से तेल-गैस एक्सपोर्ट का मुख्य समुद्री मार्ग है, और खाड़ी देशों के तेल ठिकानों पर हमले किए, तो हालात बदल गए. इससे वैश्विक आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा और तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे दुनिया भर के उद्योग प्रभावित हुए.

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अगर विभिन्न देशों की रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होती है, तो इसका फायदा युद्ध में शामिल या बड़े भंडार रखने वाले देशों को मिल सकता है. वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार (303.2 अरब बैरल) है, जबकि ईरान तीसरे स्थान पर है (208.6 अरब बैरल). ऐसे में यदि वैश्विक सप्लाई बाधित होती है और रिफाइनरियां ठप पड़ती हैं, तो बड़े तेल भंडार वाले देशों को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है. दिलचस्प बात यह है कि दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक चीन अब तक आग की ऐसी घटनाओं से अछूता रहा है. कुल मिलाकर, आधिकारिक तौर पर इन घटनाओं को तकनीकी कारणों या दुर्घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं ने 'ग्लोबल पैटर्न' की आशंका को भी जन्म दे दिया है. (रिपोर्ट: अविनाश कातील)

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