अंतरिक्ष की उड़ान को कर्तव्य पथ पर सम्मान, शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक चक्र

गणतंत्र दिवस के मौके पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया. शुभांशु शुक्ला की कहानी दिखाती है कि हिम्मत सिर्फ युद्ध के मैदानों के लिए नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की ऊंचाइयों के लिए भी है.

Advertisement
शुभांशु शुक्ला को अशोक्र चक्र से सम्मानित किया है. (Photo: PTI) शुभांशु शुक्ला को अशोक्र चक्र से सम्मानित किया है. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST

गणतंत्र दिवस के मौके पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया. भारत में ऐसे कई अचीवर्स हैं, जो देश का नाम रोशन कर रहे हैं लेकिन शुभांशु शुक्ला की कामयाबी की उड़ान का किस्सा चारों तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है. शुभांशु शुक्ला को कल अशोक चक्र से सम्मानित किया गया. गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस बहादुर IAF अधिकारी से अंतरिक्ष यात्री बने शुभांशु शुक्ला के लिए अशोक चक्र को मंज़ूरी दी थी. इसी के साथ, शुभांशु भारत के सबसे सम्मानित शांति काल का वीरता पुरस्कार पाने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए.

Advertisement

शुभांशु शुक्ला की कहानी दिखाती है कि हिम्मत सिर्फ युद्ध के मैदानों के लिए नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की ऊंचाइयों के लिए भी है. लखनऊ के एक युवा सपने देखने वाले से लेकर एक स्पेसक्राफ्ट के कंट्रोल तक शुक्ला की यात्रा भारत के अंतरिक्ष सपनों के लिए एक टर्निंग पॉइंट से कम नहीं है.

राकेश शर्मा की उड़ान के 41 साल के गैप को खत्म करते हुए, उनकी यात्रा लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है. यह सम्मान न सिर्फ स्किल को पहचान देता है, बल्कि ऑर्बिट में इंसानी सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी हिम्मत को भी पहचानता है.

लखनऊ से स्पेस तक का सफर...

लखनऊ में जन्मे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने 17 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की, जब उन्होंने कारगिल युद्ध और IAF एयरशो से प्रेरित होकर, अपने माता-पिता को बताए बिना, एक दोस्त के फॉर्म का इस्तेमाल करके नेशनल डिफेंस एकेडमी के लिए अप्लाई किया. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को 'अशोक चक्र' से किया जा सकता है सम्मानित, ISS में रिसर्च कर रचा था इतिहास

साल 2006 में शुभांशु शुक्ला एक फाइटर पायलट के तौर पर IAF में शामिल हुए और Su-30MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar और Hawk जैसे जेट पर 2,000 घंटे से ज़्यादा उड़ान भरी. इसके बाद, शुभांशु एक टेस्ट पायलट और कॉम्बैट लीडर बने और IISc बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की.

साल 2019 में, ISRO ने उन्हें गगनयान के लिए चुना, जिसके बाद उन्होंने रूस के यूरी गगारिन सेंटर में ट्रेनिंग ली. इसके साथ ही उन्होंने NASA और ISRO के सेशन में भी हिस्सा लिया. उन्हें इस प्रोग्राम के लिए चार फाइनल उम्मीदवारों में से एक के रूप में चुना गया था.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »