पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच के लिए गठित चार सदस्यीय समिति के सदस्य पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद रविवार को कोलकाता पहुंचे. उन्होंने सवाल उठाया कि हिंसा की घटनाएं सिर्फ तृणमूल कांग्रेस शासित राज्य में ही क्यों होती हैं, जबकि देश के बाकी हिस्सों में चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से होते हैं.
रविवार को पत्रकारों से बातचीत में प्रसाद ने कहा, 'मुझे सिर्फ एक बात कहनी है. पूरे देश में चुनाव होते हैं, चुनाव के बाद सिर्फ बंगाल में ही हिंसा क्यों होती है? ग्राम पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव के दौरान भी हिंसा हुई थी. आज फिर हिंसा की खबरें आ रही हैं.'
'पश्चिम बंगाल में पार्टी कार्यकर्ता और लोग क्यों डरे हुए हैं'
इस मामले को गंभीर बताते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि पश्चिम बंगाल में पार्टी कार्यकर्ता और लोग क्यों डरे हुए हैं. पूरे देश में चुनाव हुए और कहीं भी इस तरह की हिंसा नहीं हुई. क्या कारण है कि हमारे कार्यकर्ता डरे हुए हैं, जनता डरी हुई है? यह बहुत गंभीर मामला है. और अगर ममता बनर्जी लोकतंत्र में विश्वास करती हैं, तो उन्हें इसका जवाब देना होगा.'
प्रसाद ने चुनाव बाद हुई हिंसा के पीड़ितों से मुलाकात के बाद कहा, 'हमने अपने सभी पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की समस्याएं सुनीं. ममता जी, आपके शासन में क्या हो रहा है? लोग मतदान के बाद घर नहीं जा सकते. हमारे एक पार्टी कार्यकर्ता के भाई की हत्या कर दी गई, अब उसे धमकाया जा रहा है. अल्पसंख्यक समुदाय के इतने सारे नेता यहां बैठे हैं और वे ईद मनाने नहीं जा सकते. ममता जी आपके राज्य में क्या हो रहा है?
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, महिलाएं, ओबीसी और अल्पसंख्यक प्रभावित हैं. यह किस तरह का लोकतंत्र है? लोगों को अपने घर जाने का अधिकार है. हमारी पार्टी इन लोगों के साथ है. मैं अपनी पार्टी के कानूनी प्रकोष्ठ से अनुरोध करता हूं कि वे इन लोगों के डिटेल के साथ हाई कोर्ट में अपील करें और सुरक्षा की मांग करें.
भाजपा की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी कोलकाता पहुंची
भाजपा की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी रविवार को स्थिति का तत्काल जायजा लेने और राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा पर आगे की रिपोर्ट देने के लिए कोलकाता पहुंची. समिति का गठन शनिवार को किया गया और इसमें देब और प्रसाद के साथ पार्टी नेता बृजलाल और कविता पाटीदार शामिल हैं.
भाजपा की ओर से कहा गया, 'हमने अभी-अभी भारत के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में लोकसभा चुनाव संपन्न होते देखे हैं. राष्ट्रीय चुनाव के साथ-साथ हुए विधानसभा चुनावों में से दो राज्यों में सत्ता का ट्रांसफर हुआ. यह सब शांतिपूर्ण तरीके से हुआ है, कहीं से भी राजनीतिक हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई है.
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