राज्यसभा में सोमवार को हंगामा देखने को मिला, जब बीजेपी के सांसद सी सदानंदन मास्टर ने अपने आर्टिफिशियल पैर सदन की मेज पर रख दिए. यह घटनाक्रम राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान हुआ, जिसने सदन के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया.
केरल से ताल्लुक रखने वाले सदानंदन मास्टर, जो पेशे से शिक्षक रह चुके हैं, ने अपनी पहली स्पीच में 31 साल पहले कथित रूप से हुए एक हमले का जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला CPI-M के कार्यकर्ताओं ने किया था. उन्होंने बताया कि वे घर लौट रहे थे, तभी पीछे से पकड़कर उन्हें सड़क पर गिरा दिया गया और उनके पैर काट दिए गए. इस हमले के दौरान नारे भी लगाए जा रहे थे.
अपनी फिजिकल डिसेबिलिटी के बावजूद सदानंदन मास्टर बैठे-बैठे ही भाषण दे रहे थे. उन्होंने कहा कि वे देश और जनता को यह दिखाना चाहते हैं कि लोकतंत्र क्या होता है. उनके इस इमोशनल प्रदर्शन पर विपक्षी बेंचों ने आपत्ति जताई.
CPI-M के सांसद जॉन ब्रिटास ने प्वाइंट ऑफ ऑर्डर उठाते हुए सदन में किसी वस्तु के प्रदर्शन पर आपत्ति जताई. इसके जवाब में सदानंदन मास्टर ने कहा कि लोकतंत्र, टॉलरेंस और मानवता की बातें करने वाले राजनीतिक हिंसा के लिए कमिटेड होते हैं, जो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है.
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प्वाइंट ऑफ ऑर्डर के बाद आर्टिफिशियल अंग सदन की मेज से हटा दिया गया. इस दौरान सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि नियमों का पालन सभी को समान रूप से करना चाहिए.
बहस के अंत में सदानंदन मास्टर ने कहा कि वे CPI-M की ओर से दी गई यातना के कारण अपनी पहली स्पीच के दौरान खड़े नहीं हो सके, जिसका उन्हें खेद है. इसके बाद सदन के नेता जेपी नड्डा ने सभापति से अनुरोध किया कि बहस के दौरान इस्तेमाल किए गए कुछ शब्द कार्यवाही से हटाए जाएं, ताकि सदन की मर्यादा बनी रह सके.
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