खाड़ी देशों में छिड़ी लड़ाई का असर राजस्थान में दिखने लगा है. कपड़े से लेकर सेरामिक और मार्बल तक के कंपनियों में कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई नहीं होने से इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन डिस्टर्ब हो गई है. हजारों की संख्या में फैक्ट्रियां बंद हुई हैं, जिसमें बड़ी संख्या में मजदूर बेरोजगार हुए हैं.
फैक्ट्रियां बंद होने से कोराना जैसे दौर का डर सताने लगा है, जो मजदूर बचे भी हैं उनके एलपीजी घरेलू सिलेंडर नहीं मिलने से खाने-पीने का भी संकट पैदा हो गया है. अजमेर सियालदह ट्रेन जैसे हीं जयपुर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर रुकी मजदूरों की भारी भीड़ बिहार यूपी और पश्चिमी बंगाल लौटने के लिए ट्रेन में चढ़ने के लिए मारामारी करने लगे. सामान लेकर ट्रेन में घूमने की जद्दोजहद में लगे मजदूर ने कहा कि जयपुर के पास रींगस में बोरोसिल फैक्ट्री में काम कर रहे थे. फैक्ट्री में कमर्शियल एलपीजी सप्लाई बंद होने से ताला लग गया है. सभी मज़दूर परिवार लेकर घर लौट रहे हैं. परिवार को यहां रखे भी कैसें हम छोटा सिलेंडर भरवाते थे जो अब मिलना बंद हो गया है.
अजमेर किशनगंज गरीब नवाज एक्सप्रेस में भी जयपुर के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर यही हालात दिखें. ट्रेन में घुसने के लिये लोग एक दूसरे को मरने मारने पर उतारू हैं. सभी लोग सामान लेकर लौट रहे हैं. पंकज और अनीस जयपुर के सीतापुरा इंडस्ट्रियल इलाके में केमिकल फैक्ट्री में काम करते हैं, जहां तीन दिन पहले मालिक ने फैक्ट्री बंद करने की बात कहकर हिसाब कर दिया. युद्ध कब समाप्त होगा पता नहीं इसलिए सामान लेकर लौट रहे हैं.
केंद्र सरकार ने दो दिन पहले सभी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन को पत्र भेजा कि पिछले साल के एवरेज LPG कंजप्शन के आधार पर भारत सरकार कमर्शियल LPG की सप्लाई फैक्ट्रियों को करेगी. उसके अगले दिन राजस्थान सरकार ने पत्र लिखा कि पिछले साल के जो एवरेज कंजम्प्शन होंगे उसके 70 फीसदी कमर्शियल LPG का सप्लाई फैक्ट्रियों को करेंगे. लेकिन ये एवरेज कौन निकालेगा और कौन LPG इन फैक्ट्रियों को देगा इसके बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है.
भारत सरकार और राजस्थान सरकार की तरफ से जो हेल्पलाइन दिए गए हैं उस पर इंडस्ट्री के मालिक फोन कर रहे है तो कहा जा रहा है इस तरह के आदेश हमें प्राप्त नहीं हुए हैं. बगरू इंडस्ट्री एसोसिएशन के महासचिव नवनीत झालानी ने कहा कि उक्त हेल्पलाइन के नंबर 14435 पर मैंने कॉल किया था. दो बार तो एक एक मिनट तक घंटी बजकर कॉल कर गई.
तीसरी बार में कॉल लगी तो एक महिला ने कॉल उठाया उनसे जब मैंने पूछा कि इंडस्ट्री को एप्लाई करने के लिए क्या प्रक्रिया रहेगी, कहां अप्लाई करना होगा तथा एवरेज को साबित करने के लिए क्या बिलों की कॉपी देनी पड़ेगी या और कोई व्यवस्था है? इस पर उनका जवाब था कि इंडस्ट्री के लिए तो अभी ऐसी कोई व्यवस्था हुई ही नहीं है. जब मैंने उनसे कल के राज्य सरकार और केंद्र सरकार के आदेशों का हवाला दिया तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे किसी आदेश के बारे में जानकारी नहीं दी गई है. उन्होंने कहा कि हम तो सुबह छह बजे से आकर ड्यूटी पर बैठे हैं और हमें इस बारे में कुछ पता नहीं है.
शरत कुमार