कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए मणिपुर हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार पर जमकर हमला बोला. राहुल गांधी ने कहा कि लोग कहते हैं ये देश है. कोई कहता है अलग-अलग भाषाएं हैं, कोई कहता है जमीन है, मिट्टी है. कोई कहता है ये सोना है ये चांदी है. उन्होंने कहा कि ये देश एक आवाज है, इस देश के लोगों का दर्द-दुख-कठिनाइयां हैं.
राहुल गांधी ने कहा कि अब कहोगे कि हमने ये बातें अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान क्यों कहीं. अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान इसका क्या काम? तो ऐसा इसलिए क्योंकि देश की आवाज सुनने के लिए अहंकार को, नफरत को मिटाना होगा. उन्होंने कुछ ही दिन पहले अपने मणिपुर जाने का जिक्र किया और कहा कि प्रधानमंत्री आज तक नहीं गए. उनके लिए मणिपुर हिंदुस्तान नहीं है.
उन्होंने कहा कि आज की सच्चाई ये है कि मणिपुर नहीं बचा है. आपने मणिपुर को दो भाग में बांट दिया है, तोड़ दिया है. मणिपुर में हिंदुस्तान की हत्या हुई है. राहुल गांधी ने कहा कि आपने मणिपुर में भारत माता के रखवाले नहीं, हत्यारे हो. आप देशभक्त नहीं हो. आप देशद्रोही हो. राहुल गांधी ने कहा कि मैं मणिपुर के एक रिलीफ कैंप गया था.
उनका इतना कहना था कि ट्रेजरी बेंच की तरफ से राजस्थान की आवाज आई. राहुल ने इस पर कहा कि आज जा रहा हूं. उन्होंने मणिपुर की बात करते हुए कहा कि मैंने महिलाओं, बच्चों से बात की. राहुल गांधी ने रिलीफ कैंप में दो महिलाओं से मुलाकात का किस्सा भी सुनाया और कहा कि एक महिला मेरे सामने ही बेहोश हो गई.
भारत जोड़ो यात्रा से शुरू की बात
इससे पहले राहुल गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि बीजेपी के मित्र रिलैक्स कर सकते हैं, आज अडानी पर नहीं बोलूंगा. राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि समुद्र तट से बर्फीली पहाड़ी तक की यात्रा की, 120 दिन में बहुत से लोगों के साथ. एक कोने से दूसरे कोने तक गया. उन्होंने कहा कि लोग पूछते थे- कन्याकुमारी से कश्मीर तक क्यों चल रहे हो? मुझे ही नहीं मालूम था कि यात्रा क्यों शुरू कर रहा.
राहुल गांधी ने कहा कि सोच रहा था कि हिंदुस्तान को देखना, समझना और लोगों के बीच जाना चाहता हूं. जिस चीज से मुझे प्यार, जिस चीज के लिए मरने को तैयार हूं, जिस चीज के लिए मोदीजी की जेलों में जाने को तैयार हूं, जिस चीज के लिए 10 साल गाली खाई. उन्होंने कहा कि कई साल से हर रोज 8 से 10 किलोमीटर दौड़ता था. मेरे दिमाग में था कि 25 किलोमीटर चलना बड़ी बात नहीं. उस समय अहंकार था मगर भारत अहंकार को एकदम से मिटा देता है.
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