बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा, नितिन नवीन ने खिलाई मिठाई

दिल्ली की राजनीति में आज एक बड़ा धमाका हुआ है. आम आदमी पार्टी के संसदीय दल में बड़ी टूट की खबर सामने आई है. AAP के संस्थापक सदस्य और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से अलग होने का एलान कर दिया है. उनके साथ फेहरिस्त में कई सांसद और भी हैं.

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राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल बीजेपी में शामिल हो गए हैं. (Photo: PTI) राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल बीजेपी में शामिल हो गए हैं. (Photo: PTI)

अमित भारद्वाज / हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 24 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:43 PM IST

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके आम आदमी पार्टी (AAP) से अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. राघव ने भारी मन से कहा कि आम आदमी पार्टी अपने उन आदर्शों और बुनियादी मूल्यों से पूरी तरह भटक गई है, जिनके लिए इसे बनाया गया था. उन्होंने अपनी स्थिति तय करते हुए कहा, "मैं आम आदमी पार्टी से दूर जा रहा हूं और जनता की ओर बढ़ रहा हूं." 

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राघव चड्ढा ने एक बेहद चुटीली और सीधी टिप्पणी करते हुए खुद को 'गलत पार्टी में सही आदमी' बताया. उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर अब वे घुटन महसूस कर रहे थे क्योंकि पार्टी का मौजूदा स्वरूप उसके शुरुआती सिद्धांतों से मेल नहीं खाता.

राघव चड्ढा ने बताया कि हमारे साथ दो तिहाई ज्यादा AAP के राज्यसभा सांसद हमारे साथ हैं. उन्होंने साइन भी कर दिया है. इसमें हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल सहित कई नेताओं राघव चड्ढा के साथ शामिल हैं. राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने बीजेपी मुख्यालय पहुंचकर पार्टी की सदस्यता ले ली है.  

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने राघव चड्ढा को मिठाई खिलाई. (Photo: PTI)

राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद अरविंद केजरीवाल रिएक्शन भी आ गया है. पूरी ख़बर को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं.

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नितिन नवीन ने किया स्वागत

बीजेपी चीफ नितिन नवीन ने सोशल मीडिया पोस्ट करते हुए बीजेपी में आए नेताओं का स्वागत किया. उन्होंने लिखा, "आज पार्टी मुख्यालय में राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल का भाजपा परिवार में स्वागत किया. साथ ही, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता को विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में पीएम नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में काम करने के लिए शुभकामनाएं."

राज्यसभा में AAP के पास राज्यसभा में 10 सांसद हैं. 7 पंजाब से और 3 दिल्ली से हैं. ताजा इस्तीफा होने के बाद अब AAP के पास राज्यसभा में सिर्फ तीन सांसद बचे हैं. इनमें संजय सिंह (दिल्ली), एनडी गुप्ता (दिल्ली) और जल कार्यकर्ता बलबीर सिंह सिच्चेवाल (पंजाब) हैं.

'मैं गलत पार्टी में सही आदमी...'

संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, AAP सांसद राघव चड्ढा ने कहा, "हमने फैसला किया है कि हम, राज्यसभा में AAP के 2/3 सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को बीजेपी में मिला लेंगे."

उन्होंने आगे कहा कि AAP को मैंने अपने खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए, अब अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिकता से भटक गई है. अब यह पार्टी देश के हित में नहीं, बल्कि अपने निजी फ़ायदे के लिए काम करती है. पिछले कुछ सालों से, मुझे यह महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं. इसलिए, आज हम यह ऐलान करते हैं कि मैं AAP से खुद को अलग कर रहा हूं और जनता के करीब जा रहा हूं.

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संसद में AAP हुई कमजोर!

आम आदमी पार्टी के पास राज्यसभा में कुल 10 सांसद थे, जिनमें 7 पंजाब और 3 दिल्ली से हैं. हालांकि, आज पार्टी को उस वक्त जबरदस्त झटका लगा, जब तीन प्रमुख सांसदों- राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए पार्टी छोड़ दी और औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गए. इन तीनों सांसदों ने अपने इस्तीफे के साथ ही यह दावा किया है कि राज्यसभा में पार्टी के दो-तिहाई से ज्यादा सांसद अब उनके (बीजेपी) साथ हैं. 

यह भी पढ़ें: कौन हैं आठ सांसद जो AAP छोड़कर बीजेपी में जाएंगे... राघव चड्ढा ने गिनाए नाम

इससे पहले दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान स्वाति मालीवाल भी बगावती रुख अपना चुकी थीं. अब राघव, संदीप और अशोक के जाने से अरविंद केजरीवाल की राज्यसभा में ताकत आधी से भी कम रह गई है. इस बड़ी टूट ने आम आदमी पार्टी के भविष्य और उसकी सांगठनिक एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

इस बगावत के पीछे दिल्ली चुनाव में हुई पार्टी की हार एक बड़ी वजह रही है. दिल्ली की विफलता के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संदीप पाठक को हाशिए पर धकेल दिया था. चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में पाठक को अहम फैसले लेने वाली प्रक्रियाओं से पूरी तरह बाहर कर दिया गया था. संदीप पाठक 2022 के पंजाब चुनाव अभियान के दौरान लाइमलाइट में आए थे. साल 2022 से 2024 के आखिरी तक पाठक ही 'AAP' के अंदर हर बड़ी रणनीतिक फैसला लेते थे. हालांकि, बाद में उन्हें सिर्फ छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाकर सीमित कर दिया गया, जबकि मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को पंजाब, आतिशी को गोवा और गोपाल राय व दुर्गेश पाठक को गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी दी गई.

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