मैं कुछ दिन पहले आगामी पांच विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव प्रबंधन में लगे कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से ऑफ द रिकॉर्ड मिलने गया था. हैरानी की बात यह रही कि नामांकन वापसी की अंतिम तारीख नजदीक होने के बावजूद उनके घर पर पुडुचेरी से आए पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ लगी हुई थी.
जब मैंने कारण पूछा, तो बताया गया कि इस केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन होने के बावजूद कांग्रेस और डीएमके नेताओं के बीच सीट स्तर पर बातचीत और सामंजस्य की प्रक्रिया अभी भी जारी है, ताकि संभावित मैत्रीपूर्ण मुकाबलों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि इंडिया ब्लॉक के भीतर सीट बंटवारे का समझौता नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय हो पाया. तब तक दोनों दल कई सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतार चुके थे. समझौते के अनुसार, कांग्रेस को 16 सीटें दी गईं, जबकि 14 सीटें सहयोगी दलों डीएमके और वीसीके के लिए रखी गईं.
डीएमके ने कैसे कांग्रेस को मात दी!
सूत्रों के मुताबिक, 25 मार्च जो नामांकन वापसी की अंतिम तारीख थी. उस समय तक यह तय नहीं हो सका कि किस सीट पर कौन सी पार्टी चुनाव लड़ेगी. इस स्थिति का लाभ उठाते हुए डीएमके ने छह मौजूदा सीटों के अलावा उन सात अतिरिक्त सीटों पर भी अपने उम्मीदवार उतार दिए, जिन पर कांग्रेस भी दावा कर रही थी. ओझुकरई सीट उसके सहयोगी वीसीके को दी गई.
इस पर नाराजगी जताते हुए वरिष्ठ नेता ने कहा कि डीएमके ने हमारी संभावित सीटों पर एकतरफा उम्मीदवार उतारकर हमें मात दे दी, जिसके चलते हमारे पास 16 सीटों की तय सीमा से अधिक उम्मीदवार उतारने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. नतीजतन, कांग्रेस को 22 सीटों पर नामांकन दाखिल करना पड़ा, जो उसके तय कोटे से 6 अधिक है और यही मैत्रीपूर्ण मुकाबलों की वजह बना.
दोस्त या प्रतिद्वंद्वी?
कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वह केवल अपने निर्धारित 16 उम्मीदवारों का ही समर्थन करेगी और बाकी छह मैत्रीपूर्ण सीटों पर चुनाव लड़ने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है. हालांकि, अब जब उनके नाम ईवीएम में आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में दर्ज हो चुके हैं, तो अंतिम समय में डीएमके और वीसीके के नेता इन कांग्रेस उम्मीदवारों से संपर्क कर रहे हैं, ताकि मतदाताओं में भ्रम की स्थिति न बने.
ये मैत्रीपूर्ण मुकाबले कम से कम पांच-छह सीटों नेल्लीथोप, कालापेट, मुथियालपेट, थट्टांचावडी, कराईकल साउथ और ओझुकरई पर हो रहे हैं.
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पांच सीटों मंगलम, थिरुबुवनाई, राज भवन, कालापेट और कराईकल साउथ पर आमने-सामने हैं, जिससे गठबंधन के साथी जमीनी स्तर पर प्रतिद्वंद्वी बन गए हैं. पिछली विधानसभा चुनावों में कांग्रेस राज भवन और कालापेट में दूसरे स्थान पर रही थी, जबकि डीएमके ने मंगलम में दूसरा स्थान हासिल किया था.
वहीं, थिरुबुवनाई सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती थी, जिससे यह सीट इस बार और भी ज्यादा प्रतिस्पर्धी और गठबंधन सहयोगियों के बीच अहम मुकाबले का केंद्र बन गई है.
राहुल गौतम