प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि हमें ना रुकना है, ना पीछे मुड़कर देखना है. हमें लक्ष्य को प्राप्त करना है. पीएम मोदी ने कहा कि देश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है. विश्व का भारत के प्रति आकर्षण बढ़ा है. आज दुनिया भरोसे के साथ भारत की ओर देख रही है. इस दौरान पीएम मोदी ने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी से जुड़ा किस्सा सुनाया और बताया कि उस दौरान प्लानिंग कमीशन किस तरह काम करता था, जिसमें असली समस्या का हल निकल ही नहीं पाता था. उन्होंने राज्यसभा में 'खच्चर-जीप मॉडल' का जिक्र किया.
हमने बैंकिंग सेक्टर को विश्वास में लिया- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस के पास न तो इच्छाशक्ति थी, न नीति. देश आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है. 2014 के पहले कांग्रेस नेताओं के फोन पर बड़े-बड़े लोन दिए जाते थे. एनपीए बढ़ता जा रहा था. हमने बैंकिंग सेक्टर को विश्वास में लिया, रिफॉर्म्स किए और आज एनपीए एक फीसदी से भी नीचे पहुंच गया है. उन्होंने बगैर गारंटी मुद्रा लोन से लेकर पीएसयू के रिकॉर्ड प्रॉफिट पर पहुंचने तक का जिक्र किया और कहा कि ये पीएसयू मेक इन इंडिया को पूरा कर रहे हैं.
इन पीएसयू को कांग्रेस के नेताओं ने बदहाली की कगार पर पहुंचा दिया था. हमने किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को चार लाख करोड़ रुपये भेजने का काम किया है. छोटे किसानों को लेकर हमें बड़ा दर्द है. उन्होंने इसी दौरान एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि, 'हमारे देश के एक नेता हिमाचल प्रदेश के दौरे पर थे और वहां से आने के बाद खुद उन्होंने यह घटना कहीं सुनाई. नेता ने कहा कि काफी लंबे समय तक मुझे योजना आयोग से संघर्ष करना पड़ा. क्योंकि वे काफी समय तक पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग योजनाएं बनाने को तैयार ही नहीं थे.'
पहाड़ी इलाके में खच्चर चाहिए थे, लेकिन जीप ही भेजी
पीएम मोदी ने कहा- उन्होंने बताया था कि 'हमने कहा कि पहाड़ी इलाकों में हमारे मजदूरों को जीप की नहीं, खच्चर की जरूरत है. तब योजना आयोग की तरफ से कहा गया कि हम पैसा तो जीप के लिए ही देंगे, खच्चर के लिए नहीं. क्योंकि ऐसी कोई पॉलिसी ही नहीं है कि खच्चर के लिए पैसे दिए जाएं. उस समय वहां सड़क नहीं थी. पीएम मोदी ने कहा कि ये भाषा इंदिरा गांधी की थी.
उन्होंने कहा कि, 'कांग्रेस के लंबे शासनकाल में यही कार्यशैली रही. इंदिरा जी जानती थीं कि ये पाप चल रहा, लेकिन सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. वह जिस प्लानिंग कमीशन की धज्जियां उड़ा रही थीं, उसके जन्मदाता खुद उनके पिता जी थे. 2014 तक सब परेशान थे, लेकिन सुधार को तैयार नहीं थे. 2014 में जब हमें मौका मिला, हमने उस कमीशन को खत्म कर दिया और नीति आयोग बनाया, जो आज तेज गति से काम कर रहा है.'
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