केंद्र सरकार ने नीति आयोग में दो नए सदस्य नियुक्त किए हैं. इनके नाम हैं डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम और डॉ. जोरम अनिया. इन दोनों की नियुक्ति के साथ नीति आयोग में पूर्णकालिक सदस्यों की कुल संख्या सात हो गई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन दोनों को बधाई दी और कहा कि इनके अनुभव नीति बनाने में बहुत मददगार होगा. इनमें से एक नियुक्ति ऐतिहासिक भी है क्योंकि अरुणाचल प्रदेश की एक महिला पहली बार इस स्तर पर पहुंची हैं.
24 अप्रैल 2026 को सरकार ने नीति आयोग का पुनर्गठन किया था. उस दिन अशोक कुमार लाहिड़ी को उपाध्यक्ष बनाया गया. साथ ही पांच पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किए गए जिनके नाम हैं अर्थशास्त्री के.वी. राजू, एम्स अस्पताल के निदेशक एम. श्रीनिवास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अभय करंदीकर, वैज्ञानिक गोबर्धन दास और पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा.
अब दो नए सदस्य और जुड़े
इस हफ्ते कैबिनेट सचिवालय ने एक अधिसूचना जारी करके दो और नामों की घोषणा की. ये हैं डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम और डॉ. जोरम अनिया. इनकी नियुक्ति उस दिन से मानी जाएगी जिस दिन ये अपना कार्यभार संभालेंगे. इनकी नियुक्ति तब तक रहेगी जब तक आगे कोई नया आदेश न आए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके दोनों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि इन दोनों का गहरा अनुभव और समझ नीति निर्माण को और मजबूत बनाएगी. उन्हें भरोसा है कि इनके योगदान से हर क्षेत्र में नई सोच और विकास को बढ़ावा मिलेगा.
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डॉ. जोरम अनिया कौन हैं?
डॉ. जोरम अनिया अरुणाचल प्रदेश से हैं और उनकी नियुक्ति को ऐतिहासिक बताया जा रहा है. वो एक जानी-मानी शिक्षाविद और एसोसिएट प्रोफेसर हैं. वो अरुणाचल प्रदेश प्राइवेट एजुकेशनल रेगुलेटरी कमीशन की सदस्य भी हैं. उन्हें पढ़ाने, शोध और जन नीति के क्षेत्र में 18 से ज्यादा साल का अनुभव है.
वो न्यीशी समुदाय की पहली महिला हैं जिन्होंने पीएचडी की है. इसके साथ ही वो हिंदी भाषा में पीएचडी करने वाली अरुणाचल प्रदेश की पहली महिला भी हैं. वे न्यीशी साहित्य और संस्कृति पर कई पुस्तकें लिखी और संपादित की हैं. उनके कई शोध प्रकाशन भी हैं.
मुख्तार के अनुसार उनकी इस नियुक्ति ने अरुणाचल प्रदेश से एक बड़ी बौद्धिक आवाज को राष्ट्रीय नीति निर्माण के सबसे विकसित मंच पर पहुंचाया है जो एक ऐतिहासिक पल है.
डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम कौन हैं?
डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम एक जाने-माने सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ और विकास कार्यकर्ता हैं. वो सीनेटर से डॉक्टर हैं. वे स्वामी विवेकानंद युवा आंदोलन यानी SVYM की स्थापना की है. इसके साथ ही वे ग्रासरूट्स रिसर्च एंड एडवोकेसी आंदोलन यानी GRAAM भी बनाई है. वे अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के हार्वर्ड केनेडी स्कूल से लोक प्रशासन में मास्टर डिग्री ली है.
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