'एक किस्सा है, जिसे मैं कभी नहीं भूला सकता...', पीएम मोदी ने लेख लिख साझा कीं प्रकाश सिंह बादल से जुड़ी यादें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्रई प्रकाश सिंह बादल के साथ जुड़ी यादें साझा की हैं. पीएम मोदी ने पंजाब के पूर्व सीएम की यादों को समेटते हुए एक लेख लिखा है जिसमें उनसे जुड़ी कई बातों का जिक्र किया गया है. 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रकाश सिंह बादल (फाइल फोटो) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रकाश सिंह बादल (फाइल फोटो)

पॉलोमी साहा

  • नई दिल्ली,
  • 28 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 12:18 PM IST

शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के वयोवृद्ध नेता पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का 25 अप्रैल को चंडीगढ़ में निधन हो गया था. प्रकाश सिंह बादल के निधन की खबर पाकर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए सियासत के कई सूरमा चंडीगढ़ पहुंचे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चंडीगढ़ पहुंचकर प्रकाश सिंह बादल के पार्थिव शरीर पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए थे. पीएम मोदी ने अब एक लेख के जरिए प्रकाश सिंह बादल के साथ जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं.

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पीएम मोदी ने प्रकाश सिंह बादल को पिता तुल्य बताते हुए लिखा है कि वे दशकों तक मेरा मार्गदर्शन करते रहे. जब उनके निधन की खबर मिली, मन बहुत दुखी हुआ. उन्होंने प्रकाश सिंह बादल की तारीफ करते हुए आगे लिखा कि पंजाब और भारत की राजनीति को अद्भुत आकार दिया. पीएम मोदी ने प्रकाश सिंह बादल को बड़े दिलवाला बड़ा नेता बताया और लिखा कि पूरे पंजाब में लोग कहते हैं- 'बादल साहब की बात अलग थी.'   

प्रकाश सिंह बादल के दिल में रचे-बसे थे किसान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रकाश सिंह बादल को बड़ा किसान नेता बताते हुए लिखा कि किसान उनके दिल में रचे-बसे थे. उन्होंने 90 के दशक का किस्सा याद करते हुए लिखा है कि तब प्रकाश सिंह बादल पंजाब के मुख्यमंत्री हुआ करते थे और मैं बीजेपी का एक साधारण कार्यकर्ता लेकिन अपने स्वभाव के अनुरूप कोई खाई नहीं बनने दिए. वे गर्मजोशी के साथ ही संवेदनाओं से भरे एक जीवंत व्यक्तित्व थे. जिसने भी बादल साहब के साथ करीब से बातचीत की, उनके स्वभाव का कायल हो गया.

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पीएम मोदी ने अपने लेख में पंजाब में राजनीतिक उथल-पुथल और 1997 के चुनाव का जिक्र करते हुए लिखा है कि हमारी पार्टियां गठबंधन कर चुनाव लड़ीं और बादल साहब हमारे नेता थे. उनकी लोकप्रियता और विश्वास का परिणाम था कि हमें शानदार जीत मिली. उनके नेतृत्व का प्रभाव था कि 1997 से 2017 के बीच हमारा गठबंधन 15 साल तक सूबे की सेवा करता रहा.

एक किस्सा जिसे कभी नहीं भूल सकता

पीएम मोदी ने अपने लेख में आगे लिखा है कि एक किस्सा है जिसे कभी नहीं भूल सकता. प्रकाश सिंह बादल ने एक दिन मुझसे कहा कि हम अमृतसर जाएंगे और मत्था टेकेंगे. साथ में लंगर छकेंगे. अमृतसर पहुंचा और गेस्टहाउस के अपने कमरे में था लेकिन जब उन्हें इसका पता चला तो वे मेरे कमरे में आ गए और मेरा सामान उठाने लगे. उनसे जब ये पूछा कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं तो उना जवाब था- आओ मेरे साथ. वे मुझे अपने कमरे में ले गए और कहा कि तुम यहां रहोगे. वे मेरे मना करने पर भी नहीं माने और मुझे वहां रहना पड़ा. वे खुद दूसरे कमरे में रुक गए.

ये गायें हर तरह से गुजराती हैं

पीएम मोदी ने गोपालन में प्रकाश सिंह बादल की खास रुचि का जिक्र करते हुए लिखा है कि एक मुलाकात के दौरान गिर गाय पालने की इच्छा जताई तो हमने उनके पांच गाय की व्यवस्था की. इसके बाद हम जब भी मिलते, वे गायों की ही बात करते. कहा करते कि ये गायें हर तरह से गुजराती हैं. ये कभी गुस्सा नहीं करतीं, उत्तेजित नहीं होतीं, किसी पर हमला नहीं करतीं. गुजराती भी इन गायों का दूध पी-पीकर विनम्र होते हैं.

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पीएम मोदी ने आगे लिखा है कि साल 2001 के बाद हम अपने-अपने राज्य के मुख्यमंत्री थे और तब मुझे जल संरक्षण, पशुपालन और कृषि को लेकर उनका काफी मार्गदर्शन मिला. उनकी नई-नई चीजें सीखने और जानने में काफी रुचि थी. साल 2014 में केंद्र में एनडीए की सरकार आने के बाद भी मुझे समय-समय पर उनके अनुभव का लाभ मिलता रहा.

मुश्किल दौर में भी कहा पंजाब फर्स्ट और इंडिया फर्स्ट

पीएम मोदी ने अपने लेख में ये भी लिखा है कि प्रकाश सिंह बादल ने जीएसटी के साथ ही कई बड़े सुधारों का पुरजोर समर्थन किया. वे आपातकाल के काले दिनों में भी लोकतंत्र के लिए लड़ने वालों के साथ मजबूती से खड़े रहे. कांग्रेस के जुल्म और अहंकार का सामना उन्हें भी करना पड़ा, उनकी भी सरकारें बर्खास्त की गईं. 1970 और 80 के दशक के मुश्किल दौर में भी बादल साहब ने पंजाब फर्स्ट और इंडिया फर्स्ट की बात कही.

 

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