पेट्रोल 100 पार, डीजल की कीमत भी ₹2.71 बढ़ी... 10 दिन में चौथी बार बढ़ोतरी

पेट्रोल-डीजल के दामों में फिर बढ़ोतरी हुई है. पिछले दस दिनों में चौथी बार फ्यूल प्राइस बढ़ाए गए हैं.

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पिछले दस दिनों में चौथी बार फ्यूल प्राइस में बढ़ोतरी हुई है. (File Photo: ITG) पिछले दस दिनों में चौथी बार फ्यूल प्राइस में बढ़ोतरी हुई है. (File Photo: ITG)

आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:12 AM IST

पेट्रोल-डीजल के दाम में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है. पिछले दस दिनों में चौथी बार फ्यूल प्राइस में बढ़ोतरी की गई है. पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपए और डीजल की कीमतों में 2.71 रुपए की बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली में डीजल की कीमत बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत बढ़कर 102.12 रुपये हो गई है.

नई दरों के बाद देश के चारों महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे आम लोगों पर महंगाई का असर और बढ़ सकता है.

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25 मई की सुबह 6 बजे से लागू नई दरों के बाद अलग-अलग शहरों में फ्यूल में बढ़ोतरी देखने को मिली है.

पेट्रोल के नए दाम

  • दिल्ली: 102.12 रुपये (+2.61)
  • कोलकाता: 113.51 रुपये (+2.87)
  • मुंबई: 111.21 रुपये (+2.72)
  • चेन्नई: 107.77 रुपये (+2.46)

डीजल के नए दाम

  • दिल्ली: 95.20 रुपये (+2.71)
  • कोलकाता: 99.82 रुपये (+2.80)
  • मुंबई: 97.83 रुपये (+2.81)
  • चेन्नई: 99.55 रुपये (+2.57)

यह भी पढ़ें: Petrol-Diesel Price Hike: पेट्रोल-डीजल पर महंगाई का ट्रिपल अटैक... क्या 2022 जैसा जारी रहेगा सिलसिला?

ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी से यात्रियों, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और सभी सेक्टरों के व्यवसायों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की उम्मीद है. 16 मई को, भारत में ईंधन की कीमतों में महीनों की स्थिरता के बाद, पेट्रोल और डीज़ल दोनों की कीमतों में 3 रुपये की बढ़ोतरी देखी गई. यह कई लोगों के लिए हैरानी की बात थी, क्योंकि अप्रैल 2022 से ईंधन की दरें लगभग स्थिर बनी हुई थीं. इसका एकमात्र अपवाद मार्च 2024 में था, जब 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई थी.

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जानकारों ने आगाह किया है कि पेट्रोल और डीजल की दरों में लगातार बढ़ोतरी से परिवहन और लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ सकता है, जिससे आखिरकार जरूरी चीजों और खाद्य उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है.

सरकारी अधिकारियों ने पहले कहा था कि लगातार भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच, बढ़ते आयात खर्च को संभालने और ईंधन की आपूर्ति में स्थिरता बनाए रखने के लिए ये बदलाव जरूरी थे.

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