#RollbackUGC से सुप्रीम कोर्ट तक... कैसे बढ़ा UGC नियमों का विवाद? याच‍िका दाख‍िल कर की ये मांग

यूजीसी के नए इक्विटी और एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियम अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गए हैं. इन नियमों को चुनौती देती एक जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह व्यवस्था केवल SC/ST और OBC वर्गों तक सीमित है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों को कथित जातिगत भेदभाव के मामलों में न तो समान सुरक्षा मिलती है और न ही प्रभावी शिकायत निवारण का अधिकार.

Advertisement
UGC के नए नियमों पर सवर्ण-विरोध का आरोप, मामला सुप्रीम कोर्ट में (Photo: Arun Kumar) UGC के नए नियमों पर सवर्ण-विरोध का आरोप, मामला सुप्रीम कोर्ट में (Photo: Arun Kumar)

नलिनी शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:56 PM IST

यूजीसी के 'इक्विटी प्रमोशन' नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है. यह याचिका जनहित याचिकाएं दायर करने वाले वकील विनीत जिंदल ने दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि यूजीसी के ये नियम SC, ST और OBC के अलावा बाकी वर्गों के लोगों को शिकायत दर्ज कराने और संस्थागत सुरक्षा का अधिकार नहीं देते.

Advertisement

याचिका में यह भी कहा गया है कि जाति के आधार पर भेदभाव झेलने वाले हर व्यक्ति को सुरक्षा मिलनी चाहिए, चाहे वह किसी भी जाति से क्यों न हो. याचिका के मुताबिक, जाति के आधार पर किया गया कोई भी भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

UGC विवाद: क्या है पूरा मामला और सुप्रीम कोर्ट तक कैसे आया

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को 'प्रमोशन ऑफ इक्व‍िटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेंशस, 2026' नाम से नए नियम लागू किए, जिनका लक्ष्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकना है. इन नियमों के तहत शिक्षण संस्थानों को Equal Opportunity Centre, Equity Committee, 24×7 हेल्पलाइन और Equity Squad जैसी व्यवस्थाएं बनाने की बात की गई ताकि भेदभाव की शिकायतें तुरंत सुलझाई जा सकें.

Advertisement

नए नियमों की वजह से सोशल मीडिया पर भारी बहस शुरू हो गई, खासकर सामान्य (सवर्ण) वर्ग के छात्रों और कुछ संगठनों का मानना है कि नियम निर्धारित जाति वर्गों के अलावा बाकी लोगों के अधिकारों की रक्षा ठीक से नहीं करते और झूठी शिकायतों का डर बढ़ाते हैं. इस असहमति के बीच एक जनहित याचिका (PIL) सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि नियमों के कुछ प्रावधान समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आजादी जैसे मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं, इसलिए उनकी वैधता की जांच होनी चाहिए.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement