गृह मंत्री अमित शाह ने देश में नक्सलवाद के खात्मे के लिए 31 मार्च की डेडलाइन तय की है. यह डेडलाइन करीब आ गई है. इस डेडलाइन के ठीक एक दिन पहले लोकसभा में इस दिशा में किए गए प्रयासों पर चर्चा हो रही है. लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर नियम 193 के तहत चर्चा की शुरुआत शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के सांसद डॉक्टर श्रीकांत शिंदे ने की है.
इससे पहले, लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकरप्सी बिल पर हुई चर्चा का लोकसभा में जवाब दिया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बैंकरप्सी बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस बिल ने बैंकों की सेहत सुधारने में बड़ा योगदान दिया है. यह बिल कुछ संशोधनों के साथ लोकसभा से पारित हो गया है.
लोकसभा में अमित शाह के संबोधन के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित हो गई है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही 1 अप्रैल, बुधवार को दिन में 11 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी.
अमित शाह ने यूपीए सरकार के समय एनएसी का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी एक फोरम बनाई गई. हर्ष मंदर की अध्यक्षता वाले फोरम में एक शीर्ष नक्सली की पत्नी भी सदस्य थी. प्रधानमंत्री रूरल फेलोशिप का एक फेलो महेश राउत महाराष्ट्र में नक्सलियों के साथ संबंध के केस में पकड़ा गया. इसे छुड़ाने के लिए जयराम रमेश ने कांग्रेस के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा. 76 जवान मारे गए थे और छत्तीसगढ़ में पी चिदंबरम जश्न में थे. पी चिदंबरम ने कहा कि हम तो आपसे हथियार छोड़ने को कहेंगे नहीं, आप हथियारबंद आजादी की लड़ाई में विश्वास करते हो. राहुल गांधी कई बार नक्सलियों और इनके समर्थकों के साथ देखे गए. हिडमा जब मारा गया, कितने हिडमा मारोगे के नारे लगे. राहुल गांधी ने इस वीडियो को खुद शेयर किया. भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी राहुल गांधी नक्सल संगठनों से जुड़े लोगों के साथ देखे गए. कांग्रेस की नक्सल समर्थक विचारधारा इसकी जिम्मेदार है. यह बात यहां से रुकेगी नहीं, यह बात चुनाव तक जाएगी और इसका जवाब उनको देना पड़ेगा.
अमित शाह ने कहा कि हमारे गृह मंत्रालय ने इस पूरे अभियान का नेतृत्व किया है. जो हथियार उठाएगा, वह कीमत चुकाएगा. हर नागरिक की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने ऑपरेशन बुढ़ा से लेकर ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म, ऑपरेशन भीमबंधा तक का जिक्र किया और कहा कि ये सारे इलाके नक्सल मुक्त हो गए. तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा में पांच साल लड़ने के लायक हथियार, आईईडी बनाने की फैक्ट्रियां, पांच साल का अनाज वहां भरा था. बहुत गर्मी थी. पहाड़ पर 45 डिग्री टेंपरेचर था. जवानों को पीने के लिए 300 ग्राम पानी देते थे. ब्लैक फॉरेस्ट ऑपरेशन 21 दिन चला और हमने पूरा असलहा जब्त कर लिया. इसी ने छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा में नक्सलवादी आंदोलन का अंत कर दिया. बड़ी विनम्रता के साथ कोबरा, छत्तीसगढ़ पुलिस और सीआरपीएफ को मनपूर्वक नमन करता हूं. तेलंगाना ने कहा कि हम ऊपर नहीं आएंगे, जो नीचे आएंगे, उनको रोकेंगे और रोका है. इसके लिए धन्यवाद. अमित शाह ने कहा कि इनकी पार्टी के सेंट्रल कमेटी के 21 सदस्य थे, एक पकड़ा गया है, सात ने सरेंडर किया, 12 मारे गए और एक फरार है. उससे भी बातचीत चल रही है. उन्होंने दंडकारण्य से ओडिशा तक, पोलित ब्यूरो के मारे गए और सरेंडर करने वाले सदस्यों के आंकड़े सदन में बताए और कहा कि उनके पोलित ब्यूरो मेंबर और सीएमसी पूरा समाप्त हो गया है. पूरी व्यवस्था होने के बाद देश को सूचित करूंगा. ये बोल सकता हूं कि हम नक्सलमुक्त हो गए हैं, ऐसा कहने में कोई संकोच नहीं है. बसवराजू से हिडमा तक, मारे गए आतंकियों के नाम सदन में गिनाए और कहा कि वेणुगोपाल, वासुदेव, पल्लूरी प्रसाद राव चंदना, टिपरी तिरुपति ने भी सरेंडर कर दिया. मुख्य हथियारी माओवादी समाप्त हो गए हैं. पुनर्वास नीति को भी अपनाया है. आत्मसमर्पण पर 50 हजार की राशि घोषित है. सामूहिक सरेंडर पर प्रोत्साहन राशि दोगुनी कर देते हैं. मोबाइल सरकार की ओर से दिया जाता है. हमने कैंप लगाए हैं सरेंडर के लिए. कई स्वयंसेवी संस्थाएं नक्सलियों को सामान्य नागरिक बनाने का प्रयास कर रही हैं. किसी बच्ची को नेल पॉलिश लगाने को देते हैं, तो वो रो पड़ती है. मेहंदी हाथ में लगती है, उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता. कुछ लोग मां-बाप को ही पीटने लगते हैं कि क्यों दे दिया नक्सलियों को, हमारा जीवन तबाह हो गया. कैंप में जाकर दो रात बिताइए, आपको मालूम पड़ेगा कि नक्सलवादियों ने क्या किया है.
अमित शाह ने कहा कि सीएपीएफ और राज्य पुलिस का समन्वय बढ़ाया. जिम्मेदारियां स्पष्ट कर दीं और ऑल एजेंसी अप्रोच शुरू किया. फंडिंग और सपोर्ट सिस्टम पर भी प्रहार किए. पुनर्वास योजना लेकर आए. विकास में कोई वैक्यूम नहीं छोड़ा. आज वहां राज्य की उपस्थिति है और नक्सलवाद की हार का सबसे बड़ा कारण यह है कि राज्य अब हर गांव में पहुंच गया है और वहां पंचायत का गठन हो चुका है. 20 अगस्त, 2019, 24 अगस्त 2024 और 31 मार्च 2026, तीन तिथियां बताना चाहता हूं. 20 अगस्त 2019 को गृह मंत्रालय में एक मीटिंग हुई. पूर्व नक्सलियों को खुफिया इनपुट में लेने का काम, ये सब उसी मीटिंग में डिजाइन किए गए. देर क्यों लगी, क्योंकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी. छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने नक्सलवादियों को बचाकर रखा. इस पर विपक्ष ने हंगामा किया. उन्होंने कहा कि मुझे किसी व्यक्ति के सामने नहीं करना है. भूपेश बघेल को पूछो प्रूफ दूं क्या यहां पर. हां बोलें तो बोलो, वरना फंस जाओगे. 2023 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदली और दूसरे ही महीने वहां गया था. बीजेपी की सरकार ने पूरे सहयोग का आश्वासन दिया था. 24 अगस्त 2024 को हमने यह ऐलान किया कि 31 मार्च 2026 को हम नक्सलवाद पूरी तरह से समाप्त कर देंगे. अमित शाह ने 2014 के बाद उठाए गए कदम गिनाए और कहा कि कम्युनिकेशन की सारी व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त कर दी गई.
अमित शाह ने कहा कि नक्सली वोट से नहीं, बुलेट से सत्ता चाहते हैं. नक्सलियों से लड़ते हुए पांच हजार जवान शहीद हुए. कुछ लोग बातों से नहीं मानते. बच्चों का अपहरण कर उनको नक्सली बनाया गया. किसानों के खेत में बारूद बिछाकर उनको बगैर पैर का बना दिया गया. हमने करीब दो हजार आर्टिकल पढ़े, जिनमें नक्सलियों की वकालत की गई. मैं इनको मानवतावादी नहीं मानता. मानवतावादी होते, तो उन बच्चों की भी बात करते. किसानों की भी बात करते. मानवतावादी दृष्टिकोण एकतरफा नहीं हो सकता. उन्होंने सलवा जुडूम का जिक्र करते हुए कहा कि कोर्ट ने हथियार वापस लेने का आदेश दे दिया. नक्सलियों के हाथ में हथियार था, नक्सलियों ने सलवा जुडूम से जुड़े लोगों को चुन-चुनकर गोली मार दिया. वही सुदर्शन रेड्डी विपक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति उम्मीदवार थे. कांग्रेस जो कहती है न, कि हमारा क्या लेनादेना है. यही लेना-देना है. हम उनको वोट देने वालों की भी निंदा करता हूं. आइडियोलॉजी कभी जनता के भले से ऊपर नहीं हो सकती. कभी अबोध आदिवासियों की सुरक्षा से ऊपर नहीं हो सकती. 2014 के बाद पूरे क्षेत्र में 17 हजार 589 किलोमीटर सड़क बनाने की मंजूरी दी है, इनमें से 12 हजार किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं. 20 हजार करोड़ खर्च हो चुके हैं. छह हजार करोड़ के खर्च से पांच हजार मोबाइल टावर हम लगा चुके हैं. आठ हजार फोरजी टावर लगाने का आदेश पीएम मोदी ने किया है. 1804 बैंक शाखाएं 12 साल में खुली हैं. 1321 एटीएम खुले हैं. 6025 डाकघर खुले. हमने माओवादियों से चर्चा नहीं की, उनको समाप्त किया और विकास को आगे बढ़ाया. 259 एकलव्य विद्यालय, आईटीआई, कौश विकास केंद्र बनाए और इन सबमें भी लगभग आठ सौ करोड़ का खर्च किया. जगदलपुर में सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल हमने बनवाया. जनजातीय युवा एक्सचेंज के कार्यक्रम भी हमने बनाए. अमित शाह ने आदिवासी बेल्ट में चलाई जा रही योजनाएं भी गिनाईं और उनके आवंटन भी गिनाए. ऐसा नहीं है कि कांग्रेस विकास कराना नहीं चाहती थी. ये विकास कराने जाते थे, नक्सली धमाके करके मार देते थे. हमने धमाके कर के मारने वालों को समाप्त करके विकास कराया है.
अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर में इन्होंने समानांतर सरकार चलाई और विकास की योजनाओं को रोकने का काम किया. बस्तर में इनका गृह मंत्री होता था. किस प्रकार की व्यवस्था खड़ी करना चाहते थे. जो बातचीत की बात कर रहे हैं, उनको बताना चाहता हूं, बस्तर की हर तहसील में जाकर कह चुका हूं कि हथियार डाल दीजिए, सरकार आपका पुनर्वास करेगी. हमारी सरकार की पॉलिसी है, जो हथियार डाल देता है, उसी से चर्चा होती है. जहानाबाद में एक हजार नक्सलियों ने सीआरपीएफ कैंप और जेल पर कब्जा करके कैदियों को मुक्त कराया. झारखंड में 70 ट्रकों में एक साथ आग लगा दी. वार्षिक वसूली इनकी 240 करोड़ रुपये थी. इसको कैसे जस्टिफाइ कर सकते हैं. आज नक्सलवाद मूल कहां से आया, हमारे देश में किसी भी तरह से ऐसी स्थिति नहीं थी जहां ऐसी विचारधारा पनप पाए. 1914 के युद्ध में रूस की हालत बिगड़ गई. 1905 में खूनी रविवार की घटना ने शासन से जनता का विश्वास तोड़ दिया. मजबूर होकर निकोलस ने गद्दी छोड़ दी. वहां लेनिन की अगुवाई में साम्राज्यवादी सरकार आई. 1921 में चीन में माओ उनके नेता बने. 1934-35 में एक लॉन्ग मार्च हुआ और 1939 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना हुई. जैसे ही रूस में साम्यावादियों की सरकार बनी, यहां कम्युनिस्टि पार्टी ऑफ इंडिया की स्थापना हुई. इसके बीच में कोई रिश्ता है क्या.
अमित शाह ने कहा कि रूस की सरकार ने स्पॉन्सर करके दुनियाभर में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की, जिसका एक हिस्सा हमारे देश में बना. इन्होंने तो अंग्रेजों का भी समर्थन किया था. 1964 में सीपीआई एम बना. सीपीआई थी, फिर सीपीआईएम क्यों बनी. ये भी समझना होगा. चीन और रूस, दोनों में अलग-अलग विचारधारा की सरकार आई, तब एक चीन समर्थित पार्टी भी खोल दी. जो अभी अमरा राम बोल रहे थे. 1969 में सीपीआई (एमएल) की स्थापना हुई. इसका उद्देश्य था संसदीय राजनीति का विरोध करके सशस्त्र क्रांति करना. यहां राजशाही थी नहीं, अंग्रेज थे नहीं. लोकतांत्रिक सरकार थी. इन्होंने सशस्त्र क्रांति और संसदीय सिस्टम का विरोध करने के लिए सीपीआई (एमएल) बनी, यही आज के माओइस्ट हैं.
अमित शाह ने कहा कि भारत के युवाओं के लिए नक्सलवाद की टाइमलाइन भी बताना चाहता हूं. 1969 में इस आंदोलन की शुरुआत बंगाल के नक्सलबाड़ी से शुरू हुई. 80 का दशक आते-आते ये तीन राज्यों में फैले. 90 का दशक आते आते यहां भी विलय शुरू हुआ. 2004 में दो गुट मिल गए और सीपीआई माओवादी का गठन किया. 2000 से 2004, ये चार साल छोड़कर पूरे समय कांग्रेस पार्टी की सरकार रही. 1970 में एक नारा लगा था, अंतरात्मा की आवाज पर मतदान करें. संजीव रेड्डी के खिलाफ इंदिरा गांधी ने उम्मीदवार उतारा. अपनी पार्टी में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए इंदिरा गांधी ने माओवादियों के समर्थन को लपक लिया. जब तक वह सत्ता में नहीं आईं, माओवादी विचारधार की गिरफ्त में रहीं. यही वह समय है, जब माओवाद फैला. कई एक्सपर्ट यह कहते थे कि सत्ता के समर्थन के बिना ये रेड कॉरिडोर संभव ही नहीं है. जो हथियार पकड़े गए हैं, उनमें 92 फीसदी हथियार पुलिस के लूटे हुए हैं. थाने लूटे गए, गोलियां लूट लीं. एक भ्रांति के तहत वामपंथी विचारधारा ने अन्याय से बचने का नारा प्रोपेगैंडा के तहत फैलाया.
अमित शाह ने कहा कि अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए संविधान ने रास्ता बनाया है. इसी रास्ते से राजकुमार रोत यहां बैठे हैं, वरना वे भी सरेंडर की लिस्ट में होते अगर हथियार लिया होता. किसी समस्या का समाधान बहस से निकल सकता है, हथियार से नहीं. इन्होंने वैक्यूम खड़ा करने का प्रयास किया है. माओवादी हिंसा करने वालों का दिन लद गया है. कई देशों में हुआ है, कम्बोडिया, कोलंबिया, पेरू... कई देशों का इतिहास इससे भरा पड़ा है. यह एक वैचारिक लड़ाई है. माओवादी उग्रवादियों को अन्याय के खिलाफ हथियारों की लड़ाई मानने की गलती नहीं करनी चाहिए. वामपंथी विचारधारा अपना आधार खो चुकी है. इनका एक मात्र एजेंडा है देश में वैक्यूम खड़ा करना और रक्तपात. यह सफल नहीं होगा. इन्होंने जनता अदालत के नाम से एक सिस्टम खड़ा कर लोगों को फांसी पर चढ़ाया. इसका जस्टिफिकेशन नहीं हो सकता. फैसला अदालतों में ही होगा. त्रिस्तरीय न्यायिक प्रणाली है.
अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों ने मूवमेंट के लिए बस्तर को ही क्यों चुना, इसे विस्तार से बताना चाहता हूं. देश लंबी गुलामी से आजाद हुआ था. रेवेन्यू सीमित था. कई जगह दूर-दराज के इलाकों तक स्टेट की पहुंच कम थी. विकास नहीं पहुंचा था. जहां स्टेट पहुंचा ही नहीं था, वहां अत्याचार की बात कहां से आ गई. सच्चाई तो यह है कि जहां तक स्टेट की पहुंच कम थी, उन इलाकों को रेड कॉरिडोर के लिए चुना गया. जो आदिवासी तिलका मांझी, भगवान बिरसा मुंडा को अपना हीरो मानता रहा था, वह अचानक माओ को अपना हीरो क्यों मानने लगा. आदिवासियों को माओवादियों ने बरगलाया. उनको लगा कि थोड़ा पढ़-लिख जाएगा तो हमारे साथ नहीं रहेगा. माओवादियों ने स्कूल, बैंक जला दिया. विकास को उन तक पहुंचने ही नहीं दिया. गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, नक्सलवाद के कारण इन इलाकों में वर्षों तक गरीबी रही. यह गरीबी के कारण नहीं फैला, इसकी जड़े वैचारिक रहीं. नक्सलबाड़ी, बस्तर, सहरसा और यूपी के बलिया की साक्षरता की दर 33 परसेंट है. प्रति व्यक्ति आय भी चारो क्षेत्रों में समान थी. नक्सलबाड़ी और बस्तर में नक्सल मूवमेंट पनपा, लेकिन सहरसा और बलिया में इनके लायक भूगोल नहीं था. अगर विकास ही पैमाना होता, तो बहुत से इलाके ऐसे थे, जहां विकास नहीं पहुंचा था. वहां क्यों नहीं नक्सलवाद पहुंचा. अन्याय किसी के भी साथ हो सकता है, विकास कम ज्यादा हो सकता है, हम संवैधानिक रास्ते से लड़ाई लड़ेंगे या हाथ में हथियार लेकर किसी को मार डालेंगे. ये डरने वाली नहीं, सबके साथ न्याय करने वाली सरकार है. क्या हथियार उठा लेना लोकतांत्रिक तरीका है. क्या संविधान के बताए सारे रास्ते कुंद हो गए, बंद हो गए.
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने भी देश के सामने स्वीकार किया था कि सबसे बड़ी आंतरिक समस्या हथियारी माओवाद है. मगर कुछ नहीं हुआ. मोदी सरकार में कई समस्याओं का निराकरण हुआ. अनुच्छेद 3790, 35 ए हट गए. राम मंदिर बन चुका है. कई सारे बड़े काम जो आजादी के समय से देश की चाहती थी कि कभी न कभी हो, वह सारे काम नरेंद्र मोदी के 12 साल में हुए हैं. ये 12 साल देश के लिए बहुत शुभंकर साबित हुए हैं. नक्सलमुक्त भारत भी इसी में हो रहा है. इन सारी चीजों का सबसे बड़ा फायदा किस चीज से हुआ है, तो पॉलिटिकल साइंस का विद्यार्थी नक्सल मूवमेंट के खात्मे को नंबर एक पर रखेगा. इस घटना के पीछे सीएपीएफ, कोबरा, छत्तीसगढ़ पुलिस और आदिवासी बाशिंदों को जाता है. अगर उनका सहयोग न होता, तो कई रिकॉर्ड है. जब जनता साथ नहीं देती है, तो बड़े-बड़े शहंशाह दुम हिलाकर भागे हैं. इस समस्या के कारण हजारो युवा मारे गए, जवान शहीद हो गए, उन सभी को पूरे सदन की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि देना चाहता हूं.अमित शाह ने कहा कि यह जो विचारधारा है, इसका विकास से कोई लेनदेन नहीं है. यह विचारधारा क्या है माओवाद. हम जब आजाद हुए, कहा- सत्यमेव जयते. माओवाद का ध्रुव वाक्य है- सत्ता बंदूक की नली से निकलती है. इनका लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं. यहां ढेर सारे लोग तीन घंटे से कह रहे कि अन्याय है तो अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं. लड़ने का तरीका क्या है. क्या हम अंग्रेजों से नहीं लड़े. कुछ लोगों ने शहीद भगत सिंह और बिरसा मुंडा से तुलना कर दी. यही विचारधारा कहती है कि दीर्घकालीन युद्ध ही हमारी विचारधारा को फैला सकती है. इन्होंने तिलका मांझी, बिरसा मुंडा को आदर्श नहीं समझा. इन्होंने आदर्श माओ को कहा. इसमें भी ये फॉरेन से आयात करते हैं.
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ये जो वकील बने हुए हैं, एक हथियारी मूवमेंट के. कहते हैं हमारे साथ अन्याय हो रहा है. अन्या हो रहा है तो उसके लिए व्यवस्थाएं बनी हैं. अदालतें बनी हैं. हथियार उठा लोगे. संविधान को नहीं मानोगे. ऐसा नहीं चलेगा. ये नरेंद्र मोदी की सरकार है. जो भी हथियार उठाएगा, उसका यही अंजाम होगा. उन्होंने कहा कि बस्तर में लाल आतंक की परछाई थी, इसलिए वहां विकास नहीं पहुंचा. राजकुमार रौत जैसे साथी कह रहे हैं आदिवासी का विकास नहीं हुआ. 70 में से 60 साल तो सरकार कांग्रेस की रही. फिर क्यों विकास नहीं हुआ. आपने क्यों नहीं किया विकास आज आप हिसाब मांग रहे हो. मैं पूरा बताऊंगा. वहां करोड़ों लोग गरीबी में वर्षों तक जीते रहे, किसी ने चिंता नहीं की. 20 हजार युवा मारे गए, कई दिव्यांग बन गए और उन तक विकास नहीं पहुंचा. कौन जिम्मेदार है. क्या देश की सबसे बड़ी पंचायत को इस पर चिंतन नहीं करना चाहिए. नक्सलवाद का मूल कारण विकास की डिमांड नहीं, एक आइडियोलॉजी है. जिसे एक राष्ट्रपति चुनाव के कारण इंदिरा गांधी ने स्वीकार कर लिया.
अमित शाह लोकसभा में नक्सलवाद पर बोल रहे हैं. रेड कॉरिडोर में गिने जाने वाले 12 राज्य और आदिवासियों की ओर से आपका चर्चा के लिए धन्यवाद देता हूं. वे सालों से चाहते थे कि यह व्यवस्था एकबार संसद में उजागर हो और पूरी दुनिया उसको जाने. मगर लंबे समय तक उसको मौका नहीं दिया गया.
दमन दीव से निर्दलीय सांसद उमेशभाई बाबूभाई पटेल नक्सलवाद पर बोल रहे थे. पटेल ने बोलना शुरू ही किया था कि चेयर से कुमारी शैलजा ने बेल बजा दिया. इस पर निर्दलीय सांसद भड़क गए. उन्होंने कहा कि सबको तीन-तीन, चार-चार मिनट मिले हैं. मेरे साथ ऐसा क्यों. मैं छोटे प्रदेश से आता हूं, क्या मेरे साथ ऐसा इसलिए. मुझे मेरी बात कहने तो दीजिए. वह जब बोल रहे थे, उसी बीच चेयर से कुमारी शैलजा ने फिर से बेल बजाई और कहा कि खतम करिये. इस पर उन्होंने कहा कि खतम तो करने दीजिए. अभी वह बोल ही रहे थे कि चेयर से कुमारी शैलजा ने राजकुमार रौत का नाम ले लिया. राजकुमार रौत ने कहा नक्सलवाद पर चर्चा में नक्सल प्रभावित राज्यों के कितने सांसदों को बोलने का मौका दिया गया. सदन में भी यह हो रहा है.
आरजेडी सांसद प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने राज्यसभा में सीएपीएफ रेगुलेटरी बिल का विरोध किया. उन्होंने सीएपीएफ के अधिकारियों, जवानों का दर्द भी बयान किया और कहा कि हम आज श्रद्धांजलि के देश में तब्दील हो गए हैं.
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असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सीपीआई (एमएल) ने 1974 से 1977 तक तीन साल के लिए भी आंदोलन वापस लिया था. फिर से हथियार उठा लिया था. यह 90 परसेंट मिलिट्री एक्शन है. एक भी सदस्य ने यह नहीं कहा कि हम विचारधारा सरेंडर कर रहे हैं. हमने नेपाल, बांग्लादेश में देखा कि यूथ ने गवर्नमेंट नहीं, गवर्नेंस बदलने के लिए आंदोलन किया.
लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि इस समस्या का समाधान मुलायम सिंह यादव के बताए रास्ते पर चलकर ही हो सकती है. उन्होंने कहा कि आदिवासियों का शोषण होगा तो हम समाजवादी लोग इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे.
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राजस्थान के सीकर से सीपीआई (एम) के सांसद अमरा राम ने कहा कि आदिवासियों की अनुमति के बिना जमीन नहीं लेने के नियम को नेस्तनाबूद कर देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि वन अधिकार कानून बनने के बाद 90 फीसदी लोगों के आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए और पीढ़ी दर पीढ़ी रह रहे आदिवासी समुदाय के लोगों को खदेड़ने का काम किया जा रहा है. नासिक से आदिवासी मुंबई की ओर बढ़ने लगे, तब वहां की डबल इंजन सरकार को जमीन के पट्टे बहाल करने पड़े. इसी सरकार के नेतृत्व में जेएनयू के छात्रसंघ के चारो पदाधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया, क्योंकि वे अपने अधिकार की बात कर रहे थे. इस सरकार ने चुनाव को निरस्त कर दिया. छात्रावासों में गैस नहीं मिल रही है, उस पर चर्चा कराने के लिए सरकार के पास समय नहीं है.
राज्यसभा में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स रेगुलेटरी बिल पर चर्चा चल रही है. उच्च सदन में भोजनावकाश के बाद दो बजे जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, सदन में सीएपीएफ बिल चर्चा के लिए लिया गया. इस बिल पर सदन में चर्चा जारी है.सीएपीएफ बिल पर राज्यसभा में बीजेपी के सांसद डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी बोल रहे हैं.
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि नक्सलवाद को पैदा करने वाले लोग हैं. ये वही लोग है, जो दबे-कुचले, शोषित-वंचित लोगों का शोषण करते हैं. उन्होंने कहा कि नक्सलियों में भी जागरूकता आई कि मार-काट से कुछ हासिल नहीं होगी. गया के कई प्रखंड नक्सल से अति प्रभावित क्षेत्र हैं. आज भी यह इलाका सुखाड़ से प्रभावित है. सरकार ने खनन रोक दिया. इससे आम लोग प्रभावित हुए हैं. इस क्षेत्र से जुड़े लोग मुख्यधारा से जुड़ने का हर संभव प्रयास करते हैं. विकास का मॉडल क्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से नहीं बनाया जा रहा. जनप्रतिनिधियों से कोई फीडबैक नहीं लिया जाता. इमामगंज का उदाहरण देते हुए अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि एक गांव है हीरनपथरा. इस गांव के लोग आज भी आजादी पाने के लिए तरस रहे हैं. ऐसे अनेकों गांव हैं. यहां न पुल-पुलिया है, ना ही रोड. छकरबंधा नक्सल राजधानी कहा जाता था, यहां तक कच्ची रोड है, वह रोड भी नहीं बनी. सरकार से हमारी मांग है कि स्थानीय सामाजिक संगठन, बुद्धिजीवि, पंचायत-प्रखंड, जनप्रतिनिधि-प्रशासन-पुलिस का फीडबैक सिस्टम बने.
विपक्षी दलों ने लोकसभा में एलपीजी संकट पर चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया. विपक्षी दलों ने कहा कि पूरा देश एलपीजी संकट से जूझ रहा है और आप नियम 193 के तहत नक्सलवाद पर चर्चा लेकर आ गए. विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी करनी पड़ी.
महुआ मोइत्रा ने नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान कहा कि आज देश राइटविंग आतंकवाद से त्रस्त है. एनर्जी क्राइसिस से निपटने के लिए किसी रोडमैप की कोई बात नहीं हो रही है. आज आपने अचानक नक्सलवाद पर चर्चा शुरू करा दी. कितने महान हैं अमित शाह जी, सबको ठोक कर ठंडा कर दिया. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद 1969 में सिलीगुड़ी के पास नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ और बाकी जगह फैला. लेफ्ट विंग एक्स्ट्रीमिज्म कानून-व्यवस्था की परेशानी नहीं थी.आज बीजेपी दावा कर रही है कि हमने इस समस्या का समाधान कर दिया. मनरेगा, फॉरेस्ट राइट्स एक्ट जैसे कदमों का इसमें बड़ा योगदान रहा. 2019 से 2025 के बीच किलिंग बढ़ी, गिरफ्तारियां कम हुईं. सिक्योरिटी रिलेटेड फंड्स 44 परसेंट खर्च नहीं हुए इस वित्तीय वर्ष में. एक लाख से अधिक वैकेंसी हैं सीएपीएफ में. सीआरपीएफ में 122 सुसाइड हुए, 2020 से 2025 तक इस्तीफों में तीन गुना इजाफा हुआ है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नक्सल प्रभावित इलाकों में 12 हजार किलोमीटर रोड मंजूर हुई है. 2700 किलोमीटर रोड फंड की कमी के कारण अभी पेंडिंग हैं. महुआ मोइत्रा ने 2011 से 2017 के बीच नक्सलियों के सरेंडर के आंकड़े बताए और कहा कि हमने मिलिट्री पावर यूज नहीं की. हमने वेलफेयर पर जोर देकर पश्चिम बंगाल को नक्सल मुक्त बनाया.
लोकसभा में नक्सलवाद के खात्मे के लिए किए गए प्रयासों पर चर्चा ल रही है. इस चर्चा का गृह मंत्री अमित शाह शाम पांच जवाब दे सकते हैं. नियम 193 के तहत चल रही इस चर्चा के बाद वोटिंग का नियम नहीं है. गृह मंत्री अमित शाह इस चर्चा पर बोल सकते हैं.
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव को स्पीकर ओम बिरला ने टोका, तब उन्होंने कहा कि ठीक है, हम छोड़ दे रहे हैं. स्पीकर ने उनसे सवाल पूछने को कहा. धर्मेंद्र यादव के सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष को निशाने पर लिया.
लोकसभा में लिस्टेड बिजनेस लिए जाते समय स्पीकर ने चेयर से रक्षा खडसे का नाम गलत ले लिया. रक्षा खडसे ने इसे करेक्ट किया और फिर अपने नाम के आगे लिस्टेड बिजनेस सदन पटल पर रखा.
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लोकसभा में नक्सलवाद समाप्त करने की दिशा में किए गए प्रयासों पर लोकसभा में नियम 193 के तहत चर्चा की शुरुआत हो गई है. शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के सांसद डॉक्टर एकनाथ शिंदे ने इस चर्चा की शुरुआत करते ह8ुए कहा कि जो लोग कहते थे कि इसे खतम नहीं किया जा सकता, उनको यह करारा जवाब है. गृह मंत्री ने एक डेडलाइन तय की और उस डेडलाइन से पहले इसको खतम करने का प्रयास भी किया. यह कहा करते थे कि इसे समाप्त नहीं किया जा सकता. अगर विपक्ष ने समय पर इंटरवेंशन किया होता, तो नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ आंदोलन वहीं का वहीं रोका जा सकता था.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में बैंकरप्सी बिल पर चर्चा का जवाब दे रही हैं. वित्त मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि इस बिल पर 46 सदस्यों ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि आईबीसी 2016 ने बहुत योगदान दिया. यह भारतीय बैंकिंग सेक्टर की हेल्थ सुधारने के लिए है. बैंकिंग सेक्टर में इसने बड़ा रोल निभाया है. 1 लाख 4 हजार और 99 करोड़ रुपये बैंकों ने वसूले हैं. यह आईबीसी के कारण ही संभव हो सका.
लोकसभा में एलपीजी संकट को लेकर चर्चा की मांग पर विपक्ष ने सोमवार को जोरदार हंगामा किया. विपक्ष के हंगामे के कारण स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही 12.30 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी. सदन की कार्यवाही अब 12.30 बजे दोबारा शुरू होगी.
लोकसभा में विपक्ष के सदस्यों ने एलपीजी क्राइसिस पर चर्चा की मांग की है. विपक्ष के सदस्यों ने कहा कि नक्सलवाद पर चर्चा हो, हम इससे भाग नहीं रहे. हम चर्चा के लिए तैयार हैं. लेकिन देश में इस समय एलपीजी का संकट है. इस मुद्दे पर चर्चा की मांग बीएसी में भी उठी थी. सरकार ने भी इसके लिए सहमति दी थी. अब सरकार चर्चा से भाग रही है. पता नहीं क्यों सरकार चर्चा से भाग रही है. स्पीकर ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को समझा करें. इस पर् मंत्री ने डिटेल स्टेटमेंट दिया था. सर्वदलीय बैठक भी हो चुकी है.
लोकसभा में आज गृह मंत्री अमित शाह की ओर से तय नक्सल मुक्त भारत के लिए तय डेडलाइन 31 मार्च 2026 से एक दिन पहले यानी आज 30 मार्च को लोकसभा में नक्सलवाद के ख़ात्मे पर चर्चा होगी. यह चर्चा नियम 193 के तहत होगी. श्रीकांत शिंदे इस चर्चा की शुरुआत करेंगे. गौरतलब है कि नियम 193 के अंतर्गत चर्चा के लिए सदन के समक्ष कोई औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत करना जरूरी नहीं है. इस नियम के तहत आने वाले मामलों पर चर्चा के बाद मतदान नहीं हो सकता है. सूचना देने वाला सदस्य संक्षिप्त वक्तव्य दे सकता है और अध्यक्ष को पूर्व सूचना दे चुके सदस्यों को चर्चा में भाग लेने की अनुमति दी जा सकती है.