पालम अग्निकांड को लेकर भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. इसी को लेकर AAP के दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जहां वो अर्थी और कफन लेकर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी सिस्टम ने जानबूझकर लोगों को नहीं बचाया.
सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान पालम अग्निकांड में बीजेपी सरकार और सरकारी तंत्र पर गंभीर आरोप लगाए.
AAP नेता ने दावा किया कि अग्निकांड वाले मकान के बगल में ही गद्दों की दुकान थी. स्थानीय लोग और दुकानदार पुलिस व फायर ब्रिगेड से मिन्नतें कर रहे थे कि उनकी खराब गाड़ी हटाई जाए, ताकि वो जमीन पर गद्दे बिछा सकें.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को लगा कि अगर गद्दे बिछाने से लोग बच गए तो ये साबित हो जाएगा कि उनकी फायर ब्रिगेड नाकाम रही. अपनी इस बदनामी को रोकने के लिए प्रशासन ने 500 लोगों की भीड़ को मदद करने से रोक दिया और परिवार के 9 लोगों को तड़प-तड़प कर मरने के लिए छोड़ दिया.
उन्होंने सवाल किया कि अगर पहली गाड़ी तारों की वजह से नहीं खुल पा रही थी तो फिर दूसरी गाड़ी कैसे खुल गई, क्योंकि तार तो वहीं मौजूद थे? सरकार सिर्फ अपनी जान बचाना चाहती थी, उन 9 लोगों की जान नहीं बचाना चाहती थी. अगर सरकार सच में उनकी जान बचाना चाहती तो लोगों को गद्दे बिछाने दिए जाते. लेकिन इससे सरकार की पोल खुल जाती कि उनकी फायर ब्रिगेड काम नहीं करती है.
9 लोगों की मौत
घटना की संवेदनशीलता पर बात करते हुए भारद्वाज ने बताया कि वीडियो में 9 मौतों के बाद केवल 8 चिताएं दिख रही हैं. इसका कारण ये है कि एक 70 साल की बुजुर्ग मां अपनी जवान बेटी को बचाने के लिए उसे गले से लगाए रही. आग की लपटों में उनके शव इस कदर चिपक गए कि मरने के बाद भी उन्हें अलग नहीं किया जा सका और दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर करना पड़ा. उन्होंने बीजेपी नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि वो इन मौतों पर पर्दा डालने के लिए 'AAP' नेताओं को सोशल मीडिया पर गालियां दे रहे हैं.
BJP के उन दावों पर पलटवार करते हुए, जिनमें सड़क तंग होने की बात कही गई थी, भारद्वाज ने कहा कि वह सड़क 30 फुट चौड़ी है. उन्होंने भाजपा विधायक के 'ट्रैफिक जाम' वाले बयान को भी झुठलाया और कहा कि सुबह 7 बजे जब दुकानें बंद थीं तो जाम कैसे हो सकता था?
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पुलिस वहां वीडियो बनाने वालों को खदेड़ रही थी, ताकि कोई सबूत इकट्ठा न हो सके. उन्होंने कहा कि 6 साल की बच्ची का कफन देखकर उनकी आत्मा कांप गई है, जबकि बीजेपी नेता इस पर भी ओछी राजनीति कर रहे हैं.
बीजेपी पर साधा निशाना
वहीं, शुक्रवार को हुई शोक सभा में हुए हंगामे का जिक्र करते हुए AAP नेता ने कहा कि बीजेपी नहीं चाहती थी कि इन मौतों के असली कारणों पर चर्चा हो.
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और बीजेपी कार्यकर्ताओं ने महिला पार्षदों और 'आप' नेताओं के साथ मारपीट की. पूर्व विधायक विनय मिश्रा के सिर पर लोहे की कुर्सी से हमला किया गया.
हमने खरीद लिया कफन और अर्थी
भारद्वाज ने मीडिया के सामने सिर पर कफन बांधते हुए कहा कि उन्होंने अपने लिए अर्थी खरीद ली है और वो अब भाजपा के 'गुंडों' या पुलिस की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं.
उन्होंने अंत में मृतकों के नाम गिनाते हुए बताया कि 33 साल का प्रवेश जान बचाने के लिए ऊपर से कूदा था, लेकिन नीचे गद्दे न होने के कारण वह सीधे फायर ब्रिगेड की गाड़ी पर गिरा और उसकी मौत हो गई. हादसे में कमल (39), उनकी पत्नी आशु (35), दीपिका (28) और तीन मासूम बेटियां- निहारिका (15), इवानी (6) और जेसिका (3) की भी जान चली गई.
उन्होंने दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के 'ज्वलनशील पदार्थ' वाले बयान की निंदा करते हुए कहा कि वह महज एक कॉस्मेटिक और होजरी की दुकान थी, जिसे बीजेपी अब मुद्दा बनाकर अपना पल्ला झाड़ रही है.
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