नया साल, पुराना राग... पाकिस्तान का पंजाब एयरबेस, BrahMos साइट को नुकसान पहुंचाने का दावा, फिर खुल गई पोल

नए साल में भी पाकिस्तान दुष्प्रचार से बाज नहीं आ रहा. अमृतसर एयरबेस और ब्यास स्थित ब्रह्मोस सुविधा पर हमले के झूठे दावे कर सोशल मीडिया पर भ्रामक तस्वीरें फैलाई गईं. हालांकि, उपग्रह चित्रों और रक्षा विशेषज्ञों ने तथ्यों के साथ इन दावों को खारिज कर दिया, जिससे पाकिस्तानी की पोल खुल गई.

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ब्रह्मोस फैसिलिटी को नुकसान पहुंचाने का दावा झूठा साबित हुआ (फोटो- सोशल मीडिया) ब्रह्मोस फैसिलिटी को नुकसान पहुंचाने का दावा झूठा साबित हुआ (फोटो- सोशल मीडिया)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:51 PM IST

नए साल में भी पाकिस्तान सुधरता नहीं दिख रहा. एक बार फिर वह अपने पुराने और जाने-पहचाने हथकंडे अपना रहा है. गुरुवार को, कई पाकिस्तान समर्थक सोशल मीडिया अकाउंट्स ने पिछले साल की लड़ाई के दौरान पंजाब के अमृतसर एयरबेस और ब्यास स्थित ब्रह्मोस सुविधा केंद्र पर हुए हमलों की भ्रामक 'पहले' और 'बाद' की तस्वीरें साझा कीं. हालांकि, एक्सपर्ट्स ने व्यापक रूप से उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरों का उपयोग करके इन दावों का खंडन किया है.

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पाकिस्तान पिछले साल मई (ऑपरेशन सिंदूर) से झूठ बोल रहा है. जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसे करारा झटका दिया था, जिसके तहत नौ आतंकी शिविरों और 11 महत्वपूर्ण सैन्य हवाई अड्डों पर हमले किए गए थे. हालांकि, पाकिस्तान के विपरीत, भारत ने अपने दावों को पुख्ता करते हुए ऑपरेशन के दौरान नष्ट किए गए स्थलों की पहले और बाद की तस्वीरें जारी की हैं, जो पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था.

पाकिस्तान समर्थक अकाउंट्स में दावा किया गया कि फतह मिसाइलों के मिड दूरी के हमलों में अमृतसर वायुसेना स्टेशन के हैंगर और ब्यास क्षेत्र में ब्रह्मोस मिसाइलों की स्टोरेज साइट नष्ट हो गई. हालांकि, भू-खुफिया विशेषज्ञ डेमियन साइमन ने बताया कि इन स्थलों पर ऐसी कोई 'विनाश' दिखाई नहीं दे रहा. दरअसल, निर्माण-पूर्व की तस्वीरों को विनाश के 'संकेत' के रूप में पेश किया जा रहा था.

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भू-खुफिया विशेषज्ञ डेमियन साइमन का पोस्ट

साइमन ने गूगल अर्थ उपग्रह की तस्वीरों के साथ ट्वीट किया और लिखा, 'यह अब तक का सबसे मूर्खतापूर्ण दुष्प्रचार की कोशिश है. भारत-पाकिस्तान संघर्ष खत्म होने के 4 दिन बाद, 15 मई, 2025 को पंजाब, भारत के ब्यास में एक गोला-बारूद स्थल से ली गई 'पहले' की तस्वीर की तुलना नवंबर 2025 की एक तस्वीर से की गई है, ताकि भारत में कथित पाकिस्तानी हमलों से हुए नुकसान को दिखाया जा सके.' 

विशेषज्ञों ने पाकिस्तानी दावों का खंडन किया

पाकिस्तान के दावों का सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर मजाक उड़ाया. एक यूजर ने ट्वीट किया, 'यह देखना हास्यास्पद है कि पाकिस्तानी प्रशंसकों ने ड्रोन हमलों का मुकाबला करने के लिए छतों पर चल रहे कार्यों को मिसाइल हमले के नुकसान के रूप में पेश करने की कोशिश की.'

एक अन्य ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएनटी) विशेषज्ञ ने पोस्ट किया, 'विस्फोट के कोई निशान दिखाई नहीं दे रहे हैं. पाकिस्तानी 2026 में भी हताश हैं. पाकिस्तान से कोई भी 2025 में उपग्रह चित्र उपलब्ध नहीं करा सका, इसलिए निर्माण-पूर्व की तस्वीरों को अब विनाश के रूप में दिखाया जा रहा है.'

रक्षा विशेषज्ञ यूसुफ उन्झावाला ने टिप्पणी की, 'यह हास्यास्पद है कि भारत में, जब कोई नई जानकारी सामने आती है, तो लोग कहते हैं कि अब इसका क्या फायदा, हम अपनी बात मनवाने में नाकाम रहे. वहीं पाकिस्तानी अभी भी किसी तरह से सहारा ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं.'

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यह घटनाक्रम पाकिस्तानी सरकार द्वारा भारत के ऑपरेशन सिंदूर के असर को पहली बार आधिकारिक तौर पर विस्तार से स्वीकार करने के बाद सामने आया है. वहां के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि भारतीय ड्रोन ने नूर खान हवाई अड्डे पर स्थित महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचाया था.

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