'ऑपरेशन सिंदूर से घुटनों पर था PAK, इसलिए बदला संविधान', बोले CDS अनिल चौहान

पाकिस्तान को पिछले साल भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जमकर धो डाला था. उसके सैन्य ठिकानों को भारी नुक़सान पहुंचाया गया था. CDS अनिल चौहान ने कहा है कि इसका असर रहा कि पाकिस्तान को अपने सैन्य और संवैधानिक प्रणाली में बड़े बदलाव करना पड़ा.

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भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के प्रभावों पर बयान दिया (Photo: PTI) भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के प्रभावों पर बयान दिया (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:29 AM IST

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान ने पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल में बताया कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को अपनी सैन्य और संवैधानिक प्रणाली में बड़े बदलाव करने के लिए मजबूर कर दिया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हालिया संवैधानिक संशोधन इस बात का प्रूफ है कि यह अभियान उसके लिए बेहद नुक़सानदायक रहा. 

चौहान ने साफ किया कि ऑपरेशन सिंदूर फिलहाल “पॉज” पर है, लेकिन इसने पाकिस्तान की कमियों और सैन्य कमजोरियों को उजागर कर दिया है. पाकिस्तान ने अपने संविधान के अनुच्छेद 243 में संशोधन करते हुए जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन के पद को समाप्त कर दिया है. इस पद को तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय के लिए बनाया गया था. इसके जगह पर अब ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ का नया पद स्थापित किया गया है.

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हालांकि, अनिल चौहान ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का गठन केवल सेना प्रमुख की सिफारिश पर ही होगा, जो संयुक्तता की भावना के खिलाफ है और शक्ति केंद्रीकरण को दर्शाता है. 

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर में फेल फाइटर जेट अब सऊदी अरब को देगा, बातचीत जारी

चौहान ने यह भी बताया कि अब पाकिस्तान के सेना प्रमुख के जिम्मे अकेले जमीनी सैन्य संचालन ही नहीं, बल्कि नौसेना, वायुसेना और परमाणु और रणनीतिक मामलों का भी नियंत्रण होगा, जो शक्ति के केंद्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है.

उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर से भारत को भी उच्च रक्षा संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण परिचालन सबक मिले हैं. भारत उरी सर्जिकल स्ट्राइक, डोकलाम, गलवान गतिरोध, बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे अभियानों के अनुभवों के आधार पर एक स्ट्रेंडलाइज्ड ज्वाइंट थिएटर कमांड सिस्टम की ओर बढ़ रहा है. इस प्रणाली को मई 2026 तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन भारतीय सशस्त्र बल इसे समय से पहले लागू करने के लिए सक्रिय हैं.

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