केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 'इंडिया टुडे इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव 2026' में भविष्य के भारत का एक रोडमैप पेश करते हुए बताया कि कैसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी देश की तस्वीर बदल देंगे. उन्होंने लॉजिस्टिक लागत को सिंगल डिजिट पर लाने, भविष्य के ईंधन के रूप में 1 डॉलर प्रति किलो वाले हाइड्रोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सैटेलाइट तकनीक के जरिए पहाड़ी रास्तों को भूस्खलन से सुरक्षित बनाने जैसे अहम लक्ष्यों पर चर्चा की.
गडकरी ने बताया कि इन क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के लिए कैपिटल इन्वेस्टमेंट जरूरी है, और यह तभी संभव है जब देश में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद हो. बिना मजबूत आधारभूत संरचना के न तो ग्रोथ संभव है और न ही आर्थिक प्रगति तेजी से हासिल की जा सकती. इसलिए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना सबसे अहम है.
भारत की लॉजिस्टिक लागत लगभग 14–16 प्रतिशत है, जबकि चीन में यह करीब 8 प्रतिशत और यूरोपीय देशों में लगभग 12 प्रतिशत है. नितिन गडकरी बताते हैं कि उनका लक्ष्य भारत की लॉजिस्टिक लागत को सिंगल डिजिट तक लाना है.
हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन
नितिन गडकरी ने हाइड्रोजन को भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण ईंधन करार देते हुए बताया कि सरकार ने इसके लिए एक विशेष पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसके तहत कुछ राष्ट्रीय राजमार्गों को हाइड्रोजन आधारित परिवहन के लिए तैयार किया जा रहा है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना में रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा ग्रुप, वोल्वो, एचपीसीएल और अशोक लेलैंड जैसी दिग्गज कंपनियाँ सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं. गडकरी का विजन बायोमास और विभिन्न ऑर्गेनिक वेस्ट से हाइड्रोजन का उत्पादन कर इसकी लागत को घटाकर मात्र 1 डॉलर प्रति किलोग्राम तक लाना है.
हालांकि, उन्होंने इस मार्ग में आने वाली दो बड़ी चुनौतियों हाइड्रोजन का सुरक्षित परिवहन और फिलिंग स्टेशनों की स्थापना का भी उल्लेख किया, जहां एक स्टेशन बनाने की लागत वर्तमान में लगभग 6–7 करोड़ रुपये है. उन्होंने साफ किया कि देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए हाइड्रोजन के साथ-साथ बायोफ्यूल जैसे वैकल्पिक ईंधन भी आने वाले समय में गेम-चेंजर साबित होंगे.
यह भी पढ़ें: नितिन गडकरी ने सड़क बनाने के लिए ढहा दिया था ससुर का घर, पत्नी के खुलासे पर चौंक गईं फराह खान
पहाड़ों पर भूस्खलन की समस्या का हल
नितिन गडकरी ने बताया कि पहाड़ी सड़कों पर भूस्खलन की समस्या से निपटने के लिए हमने पहले ही 350 स्थलों की पहचान कर ली है. स्विट्जरलैंड की कंपनी के साथ हमारा सहयोग है, जिनके पास बेहतरीन तकनीक है. अब सैटेलाइट से हमें समय से पहले ही भूस्खलन की संभावना का संकेत मिल जाता है, जिससे विभाग तुरंत कार्रवाई कर सकता है. 350 स्थलों में से लगभग 230 पर काम शुरू हो चुका है.
नितिन गडकरी ने बताया कि हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए हमने कई अहम कदम उठाए हैं. अब तक 88 लाख से अधिक पेड़ सफलतापूर्वक रोपे जा चुके हैं. सड़क निर्माण में बायो बिटुमेन का उपयोग भी शुरू हो गया है. नागपुर-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मानसेर के पास 1 किलोमीटर सड़क पर इसका प्रयोग किया गया है.
केंद्रीय अनुसंधान संगठन चावल के भूसे से बायो बिटुमेन बनाने पर शोध कर रहा है. पेट्रोलियम बिटुमेन में 30% बायो बिटुमेन, 15% प्रयुक्त रबर टायर और 7% प्लास्टिक का मिश्रण किया जाए. देश में बायो बिटुमेन की जरूरत 11 लाख टन है, जबकि रिफाइनरियों की क्षमता फिलहाल 5 लाख टन ही है. इससे आयात कम होगा और कचरे को धन में बदलने का रास्ता खुलेगा.
गडकरी ने निर्माण क्षेत्र में लागत कम करने और गुणवत्ता बेहतर बनाने पर जोर दिया. उन्होंने आगे बताया कि उनका लक्ष्य भारत को प्रदूषण मुक्त दिशा में आगे बढ़ाना है. चाहे वह वायु प्रदूषण हो, जल प्रदूषण या ध्वनि प्रदूषण.
कैसे लगेगी सड़क हादसों पर लगाम?
सड़क हादसों पर नितिन गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा उनके मंत्रालय का एक सबसे चुनौतीपूर्ण और क्षेत्र रहा है. पिछले 12 सालो के कड़े प्रयासों के बावजूद, देश में हर साल लगभग 5 लाख दुर्घटनाएं और 1.8 लाख मौतें होती हैं. इन मौतों के पीछे मानवीय गलतियां एक बड़ा कारण हैं, जैसे हेलमेट न पहनना, वाहन चलाते समय फोन पर बात करना और सीट बेल्ट का उपयोग न करना. सरकार अब सड़क इंजीनियरिंग की कमियों को दूर करने के लिए 'ब्लैक स्पॉट्स' की पहचान कर रही है और नई डीपीआर (DPR) में सभी निवारक उपायों को शामिल कर रही है, ताकि बुनियादी ढांचे के स्तर पर दुर्घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके.
तकनीकी मोर्चे पर, भारत अब 'भारत NCAP' स्टार रेटिंग और अनिवार्य छह एयरबैग जैसे वैश्विक मानकों को अपना चुका है. नवीनतम पहल के तहत, आईटी विभाग से विशेष फ्रीक्वेंसी खरीदी गई है ताकि ट्रकों और बसों में ऐसी तकनीक लगाई जा सके जो टक्कर होने से पहले ही खतरे को भांपकर वाहन को स्वतः रोक दे. गडकरी ने जोर दिया कि कानून को सख्त करने और दंड बढ़ाने के साथ-साथ 'मानवीय व्यवहार' को बदलना सबसे जरूरी है. इसके लिए वे अमिताभ बच्चन, विक्की कौशल और आलिया भट्ट जैसे सितारों के साथ मिलकर जन-जागरूकता अभियान चला रहे हैं, ताकि शिक्षा और सहयोग के माध्यम से लोगों के जीवन को बचाया जा सके.
aajtak.in