दिल्ली में होने जा रही ऐतिहासिक 'कॉन्फ्रेंस'... 25 साल बाद एक जगह जुटेंगे सभी राज्यों के निर्वाचन आयुक्त

करीब 25 साल बाद निर्वाचन आयोग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के निर्वाचन आयुक्तों की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस बुलाई है. 24 फरवरी को भारत मंडपम में होने वाले सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार करेंगे. सम्मेलन में चुनावी कानून, तकनीकी पहल, ईसीआईनेट प्लेटफॉर्म, ईवीएम और मतदाता सूची जैसे विषयों पर राज्यों के साथ समन्वय पर मंथन होगा.

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25 साल बाद चुनावी महामंथन.(File Photo: ITG) 25 साल बाद चुनावी महामंथन.(File Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:17 AM IST

इस सदी में करीब 25 साल बाद निर्वाचन आयोग ने देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के निर्वाचन आयुक्तों की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस बुलाई है. यह सम्मेलन 24 फरवरी को आयोजित होगा, जिसमें सभी राज्य चुनाव आयोगों के साथ चुनावी प्रक्रियाओं और नवाचारों पर विचार साझा किए जाएंगे. इससे पहले ऐसी ही एक कॉन्फ्रेंस वर्ष 1999 में हुई थी, यानी यह इस मिलेनियम और सदी की पहली बड़ी बैठक मानी जा रही है.

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इस राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी भारत मंडपम में की जाएगी. सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार करेंगे. उनके साथ निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी मौजूद रहेंगे.

यह भी पढ़ें: देशभर में एकसाथ SIR कराने की तैयारी, निर्वाचन आयोग की दो दिवसीय अहम बैठक बुधवार से शुरू

36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी

इस सम्मेलन में देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) हिस्सा लेंगे. राज्य निर्वाचन आयुक्त अपने कानूनी विशेषज्ञों के साथ-साथ तकनीकी विशेषज्ञों को भी साथ लाएंगे. ये विशेषज्ञ अपनी-अपनी परियोजनाओं, तकनीकी सुझावों और अनुभवों को सम्मेलन के दौरान साझा करेंगे.

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य निर्वाचन आयोग (ईसीआई) और राज्य निर्वाचन आयोगों (एसईसी) के कामकाज में बेहतर तालमेल स्थापित करना है. बैठक के दौरान राज्यों में चुनाव कराने से जुड़ी प्रक्रियाओं, रसद व्यवस्था और चुनावी कानूनों पर चर्चा की जाएगी.

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चुनावी कानून और तकनीकी पहल पर चर्चा

सम्मेलन के सत्रों में चुनावी कानूनों, मतदाता पात्रता और ईसीआई द्वारा किए गए तकनीकी हस्तक्षेपों पर विस्तार से बातचीत होगी. इसमें यह भी देखा जाएगा कि अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चुनावी व्यवस्था को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है.

हाल ही में लॉन्च किए गए ईसीआईनेट डिजिटल प्लेटफॉर्म, ईवीएम और अन्य तकनीकी विषयों पर भी तालमेल बढ़ाने को लेकर चर्चा होगी. इसके अलावा, निर्वाचन आयोग मतदाता सूची तैयार करने के अपने अनुभव साझा करेगा.

संवैधानिक प्रावधानों पर विचार-विमर्श

सम्मेलन में भारत के संविधान और कानूनी ढांचे के तहत चुनावों के संचालन पर भी चर्चा की जाएगी. राज्य निर्वाचन आयोगों का गठन संबंधित राज्यों के कानूनों के तहत होता है. 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के प्रावधानों को लागू करना भी एसईसी के अधिकार क्षेत्र में आता है.

मतदाता सूची की तैयारी, उसका पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण, साथ ही पंचायतों और नगर निकायों के सभी चुनावों का संचालन करना राज्य निर्वाचन आयोगों की जिम्मेदारी है. इस सम्मेलन के जरिए इन सभी विषयों पर साझा समझ और समन्वय को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा.

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