'निर्माण समय लेता है और व‍िनाश...', मणिपुर में मोहन भागवत ने द‍िए शांति के सूत्र, 'ह‍िंदू' शब्द पर कही ये बात

मणिपुर के हालात और सामाजिक सौहार्द पर गहराई से बातचीत के लिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार को इम्फाल में एक अहम क्लोेज्ड डोर मीट‍िंग में शामिल हुए. तीन दिन के इस दौरे में भागवत ने सभ्यता, एकता और लंबे समय तक शांति कायम करने की जरूरत पर जोर दिया. ये पहली बार है जब 2023 की जातीय हिंसा के बाद वे मणिपुर पहुंचे हैं, ऐसे समय में जब राज्य अब भी स्थिरता की दिशा में संघर्ष कर रहा है.

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RSS चीफ़ का मणिपुर को मंत्र: संवाद बढ़ेगा तो सुलगेगा नहीं समाज RSS चीफ़ का मणिपुर को मंत्र: संवाद बढ़ेगा तो सुलगेगा नहीं समाज

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 20 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 9:29 PM IST

RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने गुरुवार को इम्फाल में एक क्लोज्ड डोर बैठक को संबोधित किया. ये मणिपुर में उनकी तीन दिन की यात्रा का पहला बड़ा संवाद था. अपने संबोधन में भागवत ने RSS की सभ्यतागत जड़ों, राष्ट्रीय जिम्मेदारियों और मणिपुर में लंबे समय तक शांति और स्थिरता लाने के लिए जरूरी प्रयासों पर विस्तार से बात की.

भागवत ने कहा कि RSS हमेशा से राष्ट्रीय चर्चा का विषय रहा है, लेकिन इसमें कई बार भ्रम और गलतफहमियां भी जुड़ जाती हैं. उन्होंने कहा कि RSS जैसा कोई संगठन नहीं है, जैसे समुद्र, आसमान या महासागर की कोई तुलना नहीं. RSS की वृद्धि स्वाभाविक है. इसे समझना है तो शाखा में जाना चाहिए. हमारा उद्देश्य पूरे हिंदू समाज को संगठित करना है. साथ ही उन्हें भी जो हमारे विरोधी हैं. हमारा लक्ष्य सत्ता बनाना नहीं है.

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'आरएसएस को सच के आधार पर समझें'

उन्होंने कहा कि RSS के खिलाफ गलत सूचनाएं 1932–33 से ही चल रही हैं, खासकर विदेशों में मौजूद ऐसे समूहों से जो भारत की सभ्यता को सही से नहीं समझते. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि संगठन को प्रचार के आधार पर नहीं, सच के आधार पर समझें.

भागवत ने RSS संस्थापक डॉ. के.बी. हेडगेवार के जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि वे प्रतिभाशाली, देशभक्त और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े थे. उन्होंने कहा कि हेडगेवार ने महसूस किया कि देश की प्रगति के लिए समाज का एकजुट होना जरूरी है और संगठन मनुष्य निर्माण की पद्धति है, इसी सोच से RSS की स्थापना हुई. 

हिंंदू शब्द का अर्थ समझाया 

उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS में हिंदू शब्द धार्मिक नहीं बल्कि सभ्यतागत अर्थ में प्रयोग होता है. उन्होंने कहा कि हिंदू कोई संज्ञा नहीं बल्कि विशेषण है. उन्होंने बताया कि राष्ट्र की ताकत सिर्फ नेतृत्व में नहीं, समाज की गुणवत्ता और एकता में होती है. उन्होंने वेदों की पंक्ति 'एकम् सत् विप्रा बहुधा वदन्ति' का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य, करुणा, पवित्रता और तप ही धर्म का सार हैं और यही हिंदू सभ्यता की समावेशी प्रकृति को दिखाते हैं.

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उन्होंने आगे कहा कि विविधता कोई भ्रम नहीं है. विविधता, एकता की ही अभिव्यक्ति है. भारत की प्राचीन राष्ट्र-कल्पना पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि भारत पश्चिमी देशों की तरह युद्धों से नहीं बना, बल्कि ऋषियों की तपस्या और मानव कल्याण की सोच से बना. वसुधैव कुटुंबकम इसी व्यापक दृष्टि का प्रमाण है.

'समाज मजबूत होता है, तब दुनिया सुनती है'

समाज की मजबूती पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कमजोर की बात कोई नहीं सुनता. जब समाज मजबूत होता है, तब दुनिया सुनती है. RSS का काम है योग्य और जिम्मेदार व्यक्तियों को तैयार करना. उन्होंने कहा कि RSS अपने लिए गौरव नहीं चाहता, बल्कि देश के लिए काम करता है.

उन्होंने RSS के शताब्दी वर्ष के पांच परिवर्तन क्षेत्रों का उल्लेख किया. जो कि निम्न प्रकार से हैं. 

  1. सामाजिक समरसता
  2. परिवार जागरण
  3. पर्यावरण संरक्षण
  4. स्वबोध (अपनी पहचान और स्वदेशी को समझना)
  5. नागरिक कर्तव्य

विनाश मिनटों में होता है, लेकिन...

भागवत ने मणिपुरी संस्कृति, वहां की स्थानीय भाषा, परंपराएं और पोशाक की भी सराहना की और कहा कि इन्हें और मजबूत करने की जरूरत है. मणिपुर की वर्तमान स्थिति पर उन्होंने कहा कि शांति बहाल करने के प्रयास समाज और समुदाय स्तर पर चल रहे हैं. विनाश मिनटों में होता है, लेकिन निर्माण वर्षों लेता है. वह भी तब, जब सबको साथ लेकर चलना हो. शांति के लिए धैर्य, सहयोग और अनुशासन जरूरी है.

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उन्होंने कहा कि सिर्फ सरकार पर निर्भर नहीं होना चाहिए. समाज की जागरूकता और आत्मनिर्भरता जरूरी है. कौशल विकास, आर्थिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण है. भागवत ने अपने संबोधन का समापन RSS के मूल मंत्र से 'संपूर्ण समाज का संगठन, सज्जन शक्ति के बल पर' से किया. सत्र के दौरान उन्होंने युवाओं, आरक्षण और क्षमता निर्माण पर भी चर्चा की.

जातीय हिंसा के बाद पहली मण‍िपुर यात्रा 

RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार को इम्फाल पहुंचे. भारी सुरक्षा के बीच उनका स्वागत इम्फाल एयरपोर्ट पर किया गया. मई 2023 में हुई जातीय हिंसा के बाद ये उनकी पहली मणिपुर यात्रा है. इम्फाल पहुंचते ही भागवत सीधे कोंजेंग लाइकाई स्थित RSS राज्य कार्यालय गए, जहां उन्होंने उद्यमियों और प्रमुख नागरिकों से मुलाकात की. ये दौरा RSS के शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों का हिस्सा है. अधिकारियों के मुताबिक ये यात्रा ज्यादातर आंतरिक बैठकों और संवाद पर केंद्रित होगी, न कि किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम पर.

बंद कमरे में करेंगे बातचीत

RSS पदाधिकारियों के अनुसार, अगले तीन दिनों में भागवत कई समूहों जैसे बुद्धिजीवियों, युवा नेताओं, जनजातीय प्रतिनिधियों और RSS कार्यकर्ताओं से से बंद कमरे में बातचीत करेंगे. एक RSS सदस्य ने कहा कि उनका मुख्य फोकस संवाद पर होगा, निर्देश देने पर नहीं.  शुक्रवार, 21 नवंबर को भागवत की मुलाकात पहाड़ी जिलों चुराचांदपुर और कांगपोकपी के जनजातीय नेताओं से होगी. इसके बाद वे इम्फाल घाटी के युवाओं और मणिपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकों से मिलेंगे. महिलाओं की स्वयं-सहायता समूहों के साथ भी उनकी बैठकें तय हैं.

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यहां जुटेंगे 500 से ज्यादा स्वयंसेवक 

शाम को थांगमेइबंद स्थित RSS मुख्यालय में होने वाली शाखा में 500 से अधिक स्वयंसेवकों के आने की संभावना है, जहां भागवत 'मणिपुर: संघर्ष से सद्भाव तक' विषय पर संबोधन देंगे. बता दें कि ये दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मणिपुर अब भी पिछले साल की हिंसा और विस्थापन की स्थिति से उबरने की कोशिश कर रहा है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भागवत राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों से मिलेंगे या नहीं.

RSS का कहना है कि यह दौरा संगठन के शताब्दी समारोह यानी आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर हो रहे आयोजन का हिस्सा है और इसका उद्देश्य आंतरिक संवाद को मजबूत करना है. इसमें किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम या रैली की घोषणा नहीं की गई है. अगले 72 घंटों तक भागवत अपनी बैठकों और कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, जिसके बाद वे मणिपुर यात्रा समाप्त करेंगे.

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