'पायलट तो मर गए... अब वो खुद को बचाने नहीं आएंगे', प्लेन क्रैश की जांच रिपोर्ट पर मनोज झा ने उठाए सवाल

जांच रिपोर्ट को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने सवाल उठाते हुए कहा, 'जिनके ऊपर आरोप लगाया जा रहा है वो लोग तो मर गए हैं. पायलट कैसे अपने आपको बचाने आएंगे अब. बड़ी कंपनी है, बड़े लोग हैं. इनके हाथ में सब कुछ है. पायलट तो मर गए हैं. वो तो अब आकर कुछ कहेंगे नहीं. रिपोर्ट में गंभीरता का अभाव दिखा.'

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RJD सांसद मनोज झा ने प्लेन क्रैश की शुरुआती जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं. (फाइल फोटो) RJD सांसद मनोज झा ने प्लेन क्रैश की शुरुआती जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं. (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 3:18 PM IST

अहमदाबाद में 12 जून को हुए एअर इंडिया विमान हादसे को लेकर विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी कर दी है. रिपोर्ट में विमान के दोनों पायलट्स के बीच हुई बातचीत को शामिल किया गया है, जिसमें एक पायलट को दूसरे से यह कहते सुना गया- 'आपने फ्यूल स्विच क्यों बंद कर दिया?' फ्यूल स्विच बंद होने के चलते विमान ने थ्रस्ट खो दिया और कुछ ही सेकंड में हादसा हो गया.

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'पायलट खुद को बचाने अब कैसे आएंगे'

इस रिपोर्ट को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने सवाल उठाते हुए कहा, 'जिनके ऊपर आरोप लगाया जा रहा है वो लोग तो मर गए हैं. पायलट कैसे अपने आपको बचाने आएंगे अब. बड़ी कंपनी है, बड़े लोग हैं. इनके हाथ में सब कुछ है. पायलट तो मर गए हैं. वो तो अब आकर कुछ कहेंगे नहीं. रिपोर्ट में गंभीरता का अभाव दिखा.'

'रिपोर्ट की गोपनीयता के उल्लंघन पर गंभीर आपत्ति'

वहीं, पायलट्स एसोसिएशन का कहना है कि जांच में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है और रिपोर्ट को मीडिया में लीक किया जाना बेहद असंवेदनशील और गोपनीयता के उल्लंघन जैसा है. संघ ने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'हमें रिपोर्ट की गोपनीयता के उल्लंघन पर गंभीर आपत्ति है. जांच के लिए उपयुक्त योग्यता वाले विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं की गई है.'

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ऑब्जर्वर के रूप में जांच में शामिल किए जाने की मांग

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब 10 जुलाई को वॉल स्ट्रीट जर्नल ने फ्यूल कंट्रोल स्विच के अनजाने में हिलने को लेकर एक रिपोर्ट छापी, तो वह जानकारी वहां तक कैसे पहुंची? एसोसिएशन ने यह आरोप भी लगाया कि जांच एकतरफा रूप से पायलट्स को दोषी ठहराने की मंशा से की जा रही है और यह सरासर गलत है. साथ ही उन्होंने यह मांग की है कि उन्हें एक ऑब्जर्वर के रूप में जांच प्रक्रिया में शामिल किया जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके.

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