महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र विवाद गहराया, CM फडणवीस ने दिए जांच के आदेश

महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र जारी करने को लेकर विवाद गहरा गया है. मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया अधिकारियों के स्तर पर हुई और अब उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं. चार दिनों में जारी 75 प्रमाणपत्रों पर प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

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सीएम फडणवीस ने मामले में जांच के आदेश दिए हैं. (File Photo) सीएम फडणवीस ने मामले में जांच के आदेश दिए हैं. (File Photo)

ओमकार

  • नई दिल्ली,
  • 17 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:32 AM IST

महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्रों के वितरण को लेकर विवाद सामने आया है, जिस पर देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय ने सफाई देते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया अधिकारियों के स्तर पर पूरी की गई थी और मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी.

सीएमओ ने बताया कि जिन अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग प्रमाणपत्र जारी करने में किया गया, उनकी भी जांच की जाएगी. कार्यालय ने कहा कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी. इस बीच पुष्टि हुई है कि 28 जनवरी से 2 फरवरी के बीच चार दिनों में कुल 75 अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र जारी किए गए थे.

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यह मामला उस समय और विवादित हो गया जब यह सामने आया कि यह प्रक्रिया राज्य में आधिकारिक शोक की अवधि के दौरान हुई. दरअसल, 28 जनवरी को उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती में विमान दुर्घटना में मौत के बाद सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक और अवकाश घोषित किया था. इसके बावजूद मंत्रालय में कुछ अधिकारियों द्वारा लंबित फाइलों को निपटाने और मंजूरी देने के आरोप सामने आए हैं.

75 शैक्षणिक संस्थानों जारी किया गया सर्टिफिकेट

जानकारी के मुताबिक राज्य भर के करीब 75 शैक्षणिक संस्थानों को इसी अवधि में अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान किया गया. बताया जा रहा है कि संबंधित फाइलें अगस्त से लंबित थीं, जिन्हें अचानक शोक अवधि के दौरान तेजी से मंजूरी दी गई. महीनों तक लंबित रहे प्रस्तावों का अचानक निपटारा होने से प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और निर्णय लेने की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

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अधिकारियों के फैसले की जांच होगी!

सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच समिति पूरे घटनाक्रम की समीक्षा करेगी और यह देखा जाएगा कि नियमों का पालन हुआ या नहीं. अधिकारियों की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया की भी विस्तार से जांच की जाएगी. फिलहाल इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक जवाबदेही और प्रक्रियागत शुचिता को लेकर राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक बहस को तेज कर दिया है.

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